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Jind News: राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस...अब नागरिक अस्पताल में हर माह 200–250 डिलीवरी हो रहीं
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10जेएनडी01-नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिला की दवा लिखती डॉ. ज्योति। संवाद
जींद। गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर माह प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष शिविर लगा रहा है। इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं को निशुल्क स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधाएं दी जाती हैं।
जिले में हर माह औसतन 200 से 250 डिलीवरी नागरिक अस्पताल में हो रही हैं। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रसव घर पर होते थे। प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु के मामले सामने आते थे। हालांकि, अब जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से अधिक महिलाएं अस्पतालों में प्रसव को प्राथमिकता दे रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लगाए जा रहे शिविरों में गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, पोषण और नियमित जांच के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है। आयरन और कैल्शियम की कमी से बचाव के लिए गुड़, चना और अन्य पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जाती है। जरूरतमंद महिलाओं को पोषण सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाले जोखिमों की समय रहते पहचान कर जटिलताओं को कम करना और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है।
स्टाफ की निगरानी में रहते हैं जोखिम भरे मामले
गर्भवतियों के जोखिम भरे मामलों को लेकर विभाग गंभीर है। जिन महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, शुगर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पाई जाती हैं उन्हें चिह्नि कर उनके लिए अलग से उपचार की व्यवस्था की जाती है। इससे जटिलताओं को कम करने और प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार के खतरे से बचाव में मदद मिलती है। आशा वर्करों के माध्यम से इन महिलाओं पर लगातार नजर रखी जाती है और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी गर्भवती से संपर्क साधा जाता है।
वर्जन
गर्भवतियों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर हर माह चार शिविर लगाए जाते हैं जिनमें महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान सावधानियां बरतने, समय पर जांच कराने और पोषण का ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया जाता है।
-डॉ. सुमन कोहली, सीएमओ, नागरिक अस्पताल जींद
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जिले में हर माह औसतन 200 से 250 डिलीवरी नागरिक अस्पताल में हो रही हैं। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रसव घर पर होते थे। प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु के मामले सामने आते थे। हालांकि, अब जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से अधिक महिलाएं अस्पतालों में प्रसव को प्राथमिकता दे रही हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लगाए जा रहे शिविरों में गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, पोषण और नियमित जांच के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है। आयरन और कैल्शियम की कमी से बचाव के लिए गुड़, चना और अन्य पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जाती है। जरूरतमंद महिलाओं को पोषण सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाले जोखिमों की समय रहते पहचान कर जटिलताओं को कम करना और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है।
स्टाफ की निगरानी में रहते हैं जोखिम भरे मामले
गर्भवतियों के जोखिम भरे मामलों को लेकर विभाग गंभीर है। जिन महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, शुगर या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पाई जाती हैं उन्हें चिह्नि कर उनके लिए अलग से उपचार की व्यवस्था की जाती है। इससे जटिलताओं को कम करने और प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार के खतरे से बचाव में मदद मिलती है। आशा वर्करों के माध्यम से इन महिलाओं पर लगातार नजर रखी जाती है और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी गर्भवती से संपर्क साधा जाता है।
वर्जन
गर्भवतियों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर हर माह चार शिविर लगाए जाते हैं जिनमें महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान सावधानियां बरतने, समय पर जांच कराने और पोषण का ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया जाता है।
-डॉ. सुमन कोहली, सीएमओ, नागरिक अस्पताल जींद