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घोटाला दबाने वालों को ही जांच सौंपने का किसानों ने किया विरोध

Mon, 23 Dec 2019 11:21 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 23 Dec 2019 11:21 PM IST
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the formers protested against handing over the investigation to the officials who suppressed the scam
द पेगां प्राथमिक कृषि सहकारी समिति लिमिटेड (पैक्स) में किसानों ने कर्मचारियों पर पैसे डकारने के जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच के लिए पैक्स ने अपने ही तीन अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है। किसानों ने इस कमेटी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पैक्स के अधिकारियों ने दो महीने पहले यह मामला दबा दिया था, उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। किसानों ने कहा कि वह मुख्यमंत्री मनोहरलाल से मिलकर इस मामले की किसी दूसरी एजेंसी या बैंक अधिकारियों से जांच करवाने की मांग करेंगे। किसानों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो इसमें कई बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आएंगे। यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इस मामले को भी दबा दिया जाएगा।
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संडील गांव के किसान बलजीत, चांदीराम, जगपाल, रामफल, तेजपाल, महिपाल, सुभाष, महा सिंह, कर्मबीर, मागेंराम, रमेश, पवन ने कहा कि अभी तो केवल पेगां पैक्स का मामला ही सामने आया है। यदि पूरे जिले में पैक्सों की जांच की जाए तो बड़े स्तर पर घोटाला सामने आएगा। किसानों ने कहा कि दो महीने पहले भी यह मामला सामने आया था। उस समय पैक्स के बड़े अधिकारियों ने तीन कर्मचारियों से पांच-पांच लाख रुपये जमा करवाकर यह मामला दबा दिया। अब पैक्स के अधिकारी मामले की जांच करेंगे तो वह अपनों को बचाने का पूरा प्रयास करेंगे या फिर उनसे राशि जमा करवाकर मामले को रफा-दफा करवा सकते हैं। वह इस बारे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। इस जांच को किसी अन्य बैंक अधिकारियों या अन्य एजेंसी अधिकारियों से करवाकर मामले को सामने लाया जा सकता है। किसानों ने कहा कि छोटे-छोटे किसान कर्ज लेकर अपना गुजारा करते हैं, लेकिन पैक्स कर्मचारी इन छोटे-छोटे किसानों को ही अपना निशाना बना रहे हैं। किसानों का यह भी आरोप है कि दो महीने पहले तीन कर्मचारियों ने घोटाला दबाने के लिए जो पैसे जमा करवाए थे, वह भी पैक्स से लोन पर लिए थे। इससे साफ है कि इस मामले में छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों तक की मिलीभगत है।
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पेगां पैक्स 2456 सदस्य
पेगां पैक्स के 2456 किसान सदस्य हैं। इनमें 703 ऐसे किसान हैं जो नियमित अपने खाते में लेनदेन करते हैं। इनमें से 273 किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें से 1480 किसान अपने ऋण नहीं चुकाने के कारण डिफाल्टर हो गए हैं। अकेले संडील गांव में 512 किसान डिफाल्टर हैं। इन डिफाल्टर किसानों के ही खातों में ज्यादा गड़बड़ी की गई है।
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मामले की निष्पक्ष होगी जांच
मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि किसान चाहें तो दो-तीन किसानों को जांच कमेटी में शामिल किया जा सकता है। जिन कर्मचारियों गड़बड़ की है, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। यदि किसानों को यह लगता है कि पैक्स अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करेंगे तो वह कहीं से भी जांच करवा सकते हैं। किसानों को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा।
जयप्रकाश वर्मा, महाप्रबंधक को ऑपरेटिव सहकारी समिति, जींद।
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