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Jind News: बजट खा गया भोजन...प्रसूता के हिस्से आया सिर्फ बिस्किट

Tue, 13 May 2025 03:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Tue, 13 May 2025 03:00 AM IST
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The food budget was eaten up...the delivery lady got only biscuits
अलेवा (जींद)। सीएचसी अलेवा में प्रसव के बाद एक महिला भूख से बिलबिलाती रही। अस्पताल कर्मचारियों ने उसे सिर्फ दूध और बिस्किट का पैकेट थमा दिया। जब महिला ने खाना मांगा तो स्टाफ ने बजट का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया। बाद में परिजनों ने घर से खाना मंगवाकर महिला को भोजन कराया। महिला के परिजनों ने इस मामले की अस्पताल के अधिकारियों से शिकायत की है।
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गोहियां निवासी महिला अजमेरो उर्फ जगीरो ने बताया है कि उसकी बहू सपना ने सोमवार सुबह 6 बजे सीएचसी अलेवा में एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। प्रसव के बाद सपना को पीने के लिए दूध और बिस्किट का पैकेट थमा दिया। सपना ने जब खाना मांगा तो स्टाफ ने बजट का हवाला देकर खाना देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने घर से खाना मंगवाकर उसे भोजन कराया।
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जगीरो ने सवाल उठाया कि यूं तो स्वास्थ्य विभाग और सरकार गर्भवतियों के लिए कई प्रकार की योजनाएं चलाने की बात कहती है, लेकिन धरातल पर खाना तक नहीं दिया जाता है।
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प्रसव के बाद भोजन देने के क्या हैं नियम
सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं को नाश्ता, दूध और भोजन मिलता है। नॉर्मल डिलीवरी में प्रसूता को कम से कम 48 घंटे और ऑपरेशन के बाद सात दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता है। इस दौरान महिला को डाइट के तौर पर प्रतिदिन 100 रुपये मिलते हैं। इसी से प्रसूता को भोजन दिया जाता है।
क्या बोलीं जिम्मेदार----
-अक्तूबर से इस मद में एक भी रुपया नहीं मिला है। मैं अपनी जेब से 14 हजार रुपये खर्च कर चुकी हूं। बजट के अभाव में अब 4-5 दिन से प्रसव के बाद महिलाओं को खाना नहीं दिया जा रहा है।

-पूनम, डाइट इंचार्ज, सीएचसी अलेवा।

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वर्जन-प्रसव के बाद महिलाओं को खाना नहीं देना गलत है। इसके लिए बजट का बहाना नहीं बनाया जा सकता। दूसरे जगहों से पैसा लेकर महिलाओं को खाना दिया जा सकता है। इस मुद्दे पर एसएमओ से बात की जाएगी।
-डॉ. सुमन कोहली, सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल जींद।
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