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Jind News: छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में दूसरे दिन भी जिला बार एसोसिएशन का कामकाज ठप
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फोटो 24जेएनडी08-दिल्ली में लाठीचार्ज के विरोध में कार्य स्थगित के चलते सुनसान दिखाई दे रहा अदाल
जींद। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में शुक्रवार को दूसरे दिन भी जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप रखा। अधिवक्ताओं ने अदालत परिसर में एकत्र होकर घटना की निंदा की और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।
अधिवक्ता अजय वशिष्ठ, भूपेश सैनी, विज्ञान मोहन, रामकेश, दिनेश भाटी, रामरूप चहल, अरविंद लाठर, राजेश गोयत, सुनील राज बामणिया, विनोद सारसर, देशराज सरोहा, तमन्ना जांगड़ा ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग उचित नहीं है। उनका कहना था कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करने चाहिए ताकि युवाओं को बार-बार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का सांविधानिक अधिकार है।
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ऐसे में प्रशासन को संयम और संवेदनशीलता के साथ स्थिति का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान करने की मांग की। दूसरे दिन भी अदालत में कार्य स्थगित रहने के कारण नियमित कामकाज प्रभावित रहा। कई मामलों की सुनवाई टल गई और पेशी भुगतने आए लोगों को अगली तारीख दी गई।
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अधिवक्ता अजय वशिष्ठ, भूपेश सैनी, विज्ञान मोहन, रामकेश, दिनेश भाटी, रामरूप चहल, अरविंद लाठर, राजेश गोयत, सुनील राज बामणिया, विनोद सारसर, देशराज सरोहा, तमन्ना जांगड़ा ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग उचित नहीं है। उनका कहना था कि युवा देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
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सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करने चाहिए ताकि युवाओं को बार-बार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का सांविधानिक अधिकार है।
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ऐसे में प्रशासन को संयम और संवेदनशीलता के साथ स्थिति का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान करने की मांग की। दूसरे दिन भी अदालत में कार्य स्थगित रहने के कारण नियमित कामकाज प्रभावित रहा। कई मामलों की सुनवाई टल गई और पेशी भुगतने आए लोगों को अगली तारीख दी गई।