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Jind News: महिला एवं बाल विकास विभाग को डायरेक्टर ने दोबारा रिमांइडर भेज मांगा जवाब
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13जेएनडी07-13 मार्च को अमर उजाला में प्रकाशित समाचार। संवाद
जींद। कथित समाजसेविका को मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान दिलवाने पर महिला एवं बाल विकास विभाग के डायरेक्टर ने रिमांइडर भेजकर जिला महिला एवं बाल विकास विभाग से जवाब मांगा है। इससे पहले डायरेक्टर ने 9 मार्च को विभाग को नोटिस भेजकर कथित समाजसेविका के बारे में पूरी जानकारी भेजने और विभाग अधिकारियों की लापरवाही के बारे में भी बताने बारे कहा गया था, लेकिन विभाग ने डायरेक्टर को जवाब नहीं दिया है।
विभाग ने बाल संरक्षण अधिकारी से 10 मार्च को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था, लेकिन अबतक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। वीरवार को पीड़ित इस मामले में सीटीएम से मिले और उन्होंने कथित समाजसेविका के खिलाफ तथ्य प्रस्तुत किए। एडवोकेट नरेंद्र सिंहमार, एडवोकेट सतीश नरवाल, बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एडवोकेट राजेश गोयत, उपप्रधान एडवोकेट विशाल खटकड़ और नवोदय वेलफेयर एसोसिएशन जींद के पूर्व प्रधान अजीत आर्य का शिष्टमंडल शामिल हुआ।
उनका कहना था कि कथित समाजसेविका 26 जनवरी, 15 अगस्त और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर किसी न किसी बहाने सम्मानित हो रही है। वह अपने तथ्य छिपाकर पूरे प्रशासन की आंख में धूल झोंक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है, क्योंकि इससे पहले वह बाल संरक्षण अधिकारी के समक्ष कथित समाजसेविका से संबंधित पूरी जानकारी मुहैया करवा चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद भी विभाग ने सम्मानित करवाने के लिए उसका नाम आगे भेज दिया। पीड़ितों ने बताया कि वह इस मामले में सीटीएम से मिले थे। उनको कुछ दस्तावेज दिखाए। सीटीएम ने आश्वासन दिया है कि तथ्यों को ध्यान में रखकर इस मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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संदेह के घेरे में जांच कमेटी की कार्यप्रणाली
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पंचकूला में सम्मानित करवाने के लिए 8 जनवरी को लिया गया साक्षात्कार भी संदेह के घेरे में है। महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ ने साक्षात्कार के दौरान शामिल होना भी जरूरी नहीं समझा। उन्होंने इस कार्य के लिए एक सीडीपीओ की ड्यूटी लगा दी थी। इसके बाद किसी भी कमेटी सदस्य ने कथित समाजसेविका के दस्तावेजों पर ध्यान नहीं दिया। सभी ने औपचारिकता पूरी करते हुए आवेदनों की सूची को आगे भेज दिया।
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विभाग ने बाल संरक्षण अधिकारी से 10 मार्च को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था, लेकिन अबतक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। वीरवार को पीड़ित इस मामले में सीटीएम से मिले और उन्होंने कथित समाजसेविका के खिलाफ तथ्य प्रस्तुत किए। एडवोकेट नरेंद्र सिंहमार, एडवोकेट सतीश नरवाल, बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एडवोकेट राजेश गोयत, उपप्रधान एडवोकेट विशाल खटकड़ और नवोदय वेलफेयर एसोसिएशन जींद के पूर्व प्रधान अजीत आर्य का शिष्टमंडल शामिल हुआ।
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उनका कहना था कि कथित समाजसेविका 26 जनवरी, 15 अगस्त और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर किसी न किसी बहाने सम्मानित हो रही है। वह अपने तथ्य छिपाकर पूरे प्रशासन की आंख में धूल झोंक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है, क्योंकि इससे पहले वह बाल संरक्षण अधिकारी के समक्ष कथित समाजसेविका से संबंधित पूरी जानकारी मुहैया करवा चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद भी विभाग ने सम्मानित करवाने के लिए उसका नाम आगे भेज दिया। पीड़ितों ने बताया कि वह इस मामले में सीटीएम से मिले थे। उनको कुछ दस्तावेज दिखाए। सीटीएम ने आश्वासन दिया है कि तथ्यों को ध्यान में रखकर इस मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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संदेह के घेरे में जांच कमेटी की कार्यप्रणाली
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पंचकूला में सम्मानित करवाने के लिए 8 जनवरी को लिया गया साक्षात्कार भी संदेह के घेरे में है। महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ ने साक्षात्कार के दौरान शामिल होना भी जरूरी नहीं समझा। उन्होंने इस कार्य के लिए एक सीडीपीओ की ड्यूटी लगा दी थी। इसके बाद किसी भी कमेटी सदस्य ने कथित समाजसेविका के दस्तावेजों पर ध्यान नहीं दिया। सभी ने औपचारिकता पूरी करते हुए आवेदनों की सूची को आगे भेज दिया।