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आंदोलन की दशा-दिशा सही, हठधर्मिता छोड़े सरकार : जयप्रकाश
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पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश। अमर उजाला
- फोटो : Jind
जींद। किसान संगठनों की मजबूती से कृषि कानूनों के विरोध में जारी आंदोलन सही दिशा व दशा में चल रहा है। यह आंदोलन की खूबसूरती है कि इतने सारे संगठन एक साथ मिल कर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार को हठधर्मिता छोड़कर तुरंत प्रभाव से कृषि कानून वापस लेने चाहिए। यह कहना है पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कलायत के पूर्व विधायक जयप्रकाश का। वे शनिवार राजा मलिक के घर धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भी कृषि सुधार के नाम पर कानून बनाए थे। इसके विरोध में शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दादा मातू राम के नेतृत्व में आंदोलन चला। आंदोलन के कारण अंग्रेजों को भी कानून वापस लेने पड़े थे, लेकिन देश की सरकार हठधर्मिता अपना रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब किसानों का नहीं देश का आंदोलन बन गया है। यह आंदोलन पूरी तरह से गैर राजनीतिक है। यही कारण है कि कांग्रेस आंदोलन को सिर्फ समर्थन दे रही है। हालांकि कांग्रेस के लोग लगातार धरनों में शामिल हो रहे हैं।
2002 में हुई नौ किसानों की मौत : पूर्व मंत्री जयप्रकाश ने कहा कि 2002 में जींद के कंडेला में हुए किसान आंदोलन में सरकार ने गोली चलवाकर नौ किसानों को मौत के घाट उतार दिया। तब भी कांग्रेस ने किसानों की आवाज को उठाया और इनेलो को सत्ता से बाहर कर दिया था।
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लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार : जयप्रकाश ने कहा कि किसी ठेकेदार का फोन आया है कि लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है। टेंडर छोड़ने से पहले ही सात प्रतिशत कमीशन मांगा जा रहा है। उन्होंने नाम लिए बिना कहा कि ऐसे लोगों पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को नकेल डालनी चाहिए। गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास है।
देवीलाल का असली वारिस कौन
जयप्रकाश ने कहा कि स्वर्गीय देवीलाल ने ओमप्रकाश चौटाला को अपना राजनीतिक वारिस तय किया। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला ने डॉ. अजय चौटाला को और डॉ. अजय चौटाला ने दुष्यंत चौटाला को वारिस बनाया। वहीं अब दुष्यंत चौटाला, अभय चौटाला व रणजीत चौटाला खुद को देवीलाल की नीतियों पर चलने वाले बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को सोचना चाहिए कि अच्छे नेता के वंशज यदि गलत चलें तो उनकी पहचान करें।
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उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भी कृषि सुधार के नाम पर कानून बनाए थे। इसके विरोध में शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दादा मातू राम के नेतृत्व में आंदोलन चला। आंदोलन के कारण अंग्रेजों को भी कानून वापस लेने पड़े थे, लेकिन देश की सरकार हठधर्मिता अपना रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब किसानों का नहीं देश का आंदोलन बन गया है। यह आंदोलन पूरी तरह से गैर राजनीतिक है। यही कारण है कि कांग्रेस आंदोलन को सिर्फ समर्थन दे रही है। हालांकि कांग्रेस के लोग लगातार धरनों में शामिल हो रहे हैं।
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2002 में हुई नौ किसानों की मौत : पूर्व मंत्री जयप्रकाश ने कहा कि 2002 में जींद के कंडेला में हुए किसान आंदोलन में सरकार ने गोली चलवाकर नौ किसानों को मौत के घाट उतार दिया। तब भी कांग्रेस ने किसानों की आवाज को उठाया और इनेलो को सत्ता से बाहर कर दिया था।
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लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार : जयप्रकाश ने कहा कि किसी ठेकेदार का फोन आया है कि लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है। टेंडर छोड़ने से पहले ही सात प्रतिशत कमीशन मांगा जा रहा है। उन्होंने नाम लिए बिना कहा कि ऐसे लोगों पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को नकेल डालनी चाहिए। गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास है।
देवीलाल का असली वारिस कौन
जयप्रकाश ने कहा कि स्वर्गीय देवीलाल ने ओमप्रकाश चौटाला को अपना राजनीतिक वारिस तय किया। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला ने डॉ. अजय चौटाला को और डॉ. अजय चौटाला ने दुष्यंत चौटाला को वारिस बनाया। वहीं अब दुष्यंत चौटाला, अभय चौटाला व रणजीत चौटाला खुद को देवीलाल की नीतियों पर चलने वाले बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को सोचना चाहिए कि अच्छे नेता के वंशज यदि गलत चलें तो उनकी पहचान करें।