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Jind News: जुलाई माह में चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
Mon, 21 Apr 2025 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:30 AM IST
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जींद स्थित हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण करते रेलवे महाप्रबंधक अशोक वर्मा। संवाद
जींद। जुलाई माह में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच दौड़ेगी। हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण दो माह में पूरा हो जाएगा। रविवार को उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया।
महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने कहा कि हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का निर्माण कार्य चेन्नई में अंतिम चरण में चल रहा है। वहीं हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे बनाने वाली कंपनी इसमें सुरक्षा का पूरा इंतजाम कर रही है। चेन्नई में बन रही ट्रेन को जींद लाया जाएगा। इसके बाद ट्रेन का ट्रायल लिया जाएगा और इसके बाद सुचारू रूप से जींद से सोनीपत के बीच आवागमन शुरू हो जाएगा।
महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने निरीक्षण के दौरान रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं को भी सुना। उन्होंने जींद में वाशिंग लाइन जो अभी 17 कोच की है, उसको बढ़ाकर 23 कोच की करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से इस बारे में चर्चा की और कहा कि छह कोच की लाइन को बढ़ाने के लिए जिस भी चीज की जरूरत है उसकी तैयारी पूरी की जाए। इसके अलावा रेलवे जंक्शन के नए के जीर्णोद्धार का कार्य अगस्त सितंबर तक पूरा हो जाएगा। इसमें फुट ओवरब्रिज का काम बकाया है और वह भी जल्दी पूरा हो जाएगा। इससे प्लेटफार्म नंबर एक से दो पर आने जाने में आसानी होगी। अभी दो प्लेटफार्म हैं और दोनों को एक दूसरे से जोड़ा जा रहा है।
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रेलवे के पैनल पर आएंगे दो अस्पताल
एनआरएमयू और डीआरएमयू यूनियन के नेताओं ने महाप्रबंधक को मांग पत्र सौंपे। नेताओं ने जींद में रेलवे के पैनल पर किसी भी अस्पताल के नहीं होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि जींद में लगभग चार हजार रेलवे के कर्मचारी और एक हजार पूर्व कर्मचारी हैं। इन लोगों के इलाज के लिए रेलवे के पैनल पर कोई अस्पताल नहीं है। पहले दो अस्पताल होते थे, लेकिन वर्तमान में एक भी अस्पताल पैनल पर नहीं है। रेलवे के कर्मचारियों ने कहा कि जींद में दो अस्पतालों को पैनल पर लेने के लिए फाइल प्रोसेस में चल रही है। उन्होंने महाप्रबंधक से इसे जल्द स्वीकृति प्रदान करने की मांग की। महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर इस काम को जल्दी से करवाएंगे ताकि रेलवे के कर्मचारियों को कोई दिक्कत न हो।
नहीं बढ़ाए जाएंगे सफाई कर्मचारी
एनआरएमयू ने महाप्रबंधक के सामने जींद में सफाई कर्मचारियों की कमी का मामला भी उठाया। उन्होंने बताया कि पहले यहां पर 36 सफाई कर्मचारी होते थे, लेकिन अब इनकी संख्या 12 रह गई है। ऐसे में वर्क लोड बढ़ रहा है। उन्होंने सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की। महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने एनआरएमयू की उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि 12 कर्मचारी काफी हैं। अभी इसमें बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
तीन हजार किलो हाइड्रोजन भंडारण की होगी क्षमता
जंक्शन के पास बनाए जा रहे प्लांट में लगभग तीन हजार किलोग्राम हाइड्रोजन गैस का भंडारण किया जा सकेगा। प्लांट को रोजाना 40 हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। वहीं स्टेशन की छत्तों का पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आठ-दस डिब्बों की होगी। यह हाइब्रिड ट्रेन होगी। इसमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटी लगे होंगे। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी। ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी और इस ताप से बिजली पैदा होगी। बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी, जिससे ट्रेन चलेगी। इस दौरान धुएं की जगह सिर्फ भाप और पानी निकलेगा।
जींद में बन रहे हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया गया। हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण दो महीने में पूरा हो जाएगा। वहीं चेन्नई में ट्रेन तैयार की जा रही है। इसके बाद हाइड्रोजन गैस से चलने वाली ट्रेन का ट्रायल लिया जाएगा, उसके बाद जींद से सोनीपत के बीच ट्रेन शुरू कर दिया जाएगा।
-अशोक वर्मा, महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे दिल्ली
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महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने कहा कि हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का निर्माण कार्य चेन्नई में अंतिम चरण में चल रहा है। वहीं हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे बनाने वाली कंपनी इसमें सुरक्षा का पूरा इंतजाम कर रही है। चेन्नई में बन रही ट्रेन को जींद लाया जाएगा। इसके बाद ट्रेन का ट्रायल लिया जाएगा और इसके बाद सुचारू रूप से जींद से सोनीपत के बीच आवागमन शुरू हो जाएगा।
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महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने निरीक्षण के दौरान रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं को भी सुना। उन्होंने जींद में वाशिंग लाइन जो अभी 17 कोच की है, उसको बढ़ाकर 23 कोच की करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से इस बारे में चर्चा की और कहा कि छह कोच की लाइन को बढ़ाने के लिए जिस भी चीज की जरूरत है उसकी तैयारी पूरी की जाए। इसके अलावा रेलवे जंक्शन के नए के जीर्णोद्धार का कार्य अगस्त सितंबर तक पूरा हो जाएगा। इसमें फुट ओवरब्रिज का काम बकाया है और वह भी जल्दी पूरा हो जाएगा। इससे प्लेटफार्म नंबर एक से दो पर आने जाने में आसानी होगी। अभी दो प्लेटफार्म हैं और दोनों को एक दूसरे से जोड़ा जा रहा है।
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रेलवे के पैनल पर आएंगे दो अस्पताल
एनआरएमयू और डीआरएमयू यूनियन के नेताओं ने महाप्रबंधक को मांग पत्र सौंपे। नेताओं ने जींद में रेलवे के पैनल पर किसी भी अस्पताल के नहीं होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि जींद में लगभग चार हजार रेलवे के कर्मचारी और एक हजार पूर्व कर्मचारी हैं। इन लोगों के इलाज के लिए रेलवे के पैनल पर कोई अस्पताल नहीं है। पहले दो अस्पताल होते थे, लेकिन वर्तमान में एक भी अस्पताल पैनल पर नहीं है। रेलवे के कर्मचारियों ने कहा कि जींद में दो अस्पतालों को पैनल पर लेने के लिए फाइल प्रोसेस में चल रही है। उन्होंने महाप्रबंधक से इसे जल्द स्वीकृति प्रदान करने की मांग की। महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर इस काम को जल्दी से करवाएंगे ताकि रेलवे के कर्मचारियों को कोई दिक्कत न हो।
नहीं बढ़ाए जाएंगे सफाई कर्मचारी
एनआरएमयू ने महाप्रबंधक के सामने जींद में सफाई कर्मचारियों की कमी का मामला भी उठाया। उन्होंने बताया कि पहले यहां पर 36 सफाई कर्मचारी होते थे, लेकिन अब इनकी संख्या 12 रह गई है। ऐसे में वर्क लोड बढ़ रहा है। उन्होंने सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की। महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने एनआरएमयू की उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि 12 कर्मचारी काफी हैं। अभी इसमें बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
तीन हजार किलो हाइड्रोजन भंडारण की होगी क्षमता
जंक्शन के पास बनाए जा रहे प्लांट में लगभग तीन हजार किलोग्राम हाइड्रोजन गैस का भंडारण किया जा सकेगा। प्लांट को रोजाना 40 हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। वहीं स्टेशन की छत्तों का पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आठ-दस डिब्बों की होगी। यह हाइब्रिड ट्रेन होगी। इसमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटी लगे होंगे। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी। ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी और इस ताप से बिजली पैदा होगी। बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी, जिससे ट्रेन चलेगी। इस दौरान धुएं की जगह सिर्फ भाप और पानी निकलेगा।
जींद में बन रहे हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया गया। हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण दो महीने में पूरा हो जाएगा। वहीं चेन्नई में ट्रेन तैयार की जा रही है। इसके बाद हाइड्रोजन गैस से चलने वाली ट्रेन का ट्रायल लिया जाएगा, उसके बाद जींद से सोनीपत के बीच ट्रेन शुरू कर दिया जाएगा।
-अशोक वर्मा, महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे दिल्ली