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विकास के दावे बेमानी, साढ़े तीन किलोमीटर दूर रंधाना से लाना पड़ रहा पानी

Fri, 14 Oct 2022 12:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 12:42 AM IST
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The claims of development are meaningless, water has to be brought from Randhana, three and a half kilometers away
शहर से तीन किलोमीटर दूर बसा गांव अशरफगढ़, जहां पेयजल की बहुत बड़ी समस्या है। संवाद - फोटो : Jind
जींद। शहर से मात्र तीन किलोमीटर दूर अशरफगढ़ गांव में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। न स्वास्थ्य, न यातायात और न ही शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त है।
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ग्रामीणों का आरोप है कहने को तो जींद शहर से सटा हुआ है, लेकिन सरकार और प्रशासन का गांव की तरफ थोड़ा सा भी ध्यान नहीं है। गांव में लोगों को पीने का पानी तक नहीं है। ग्रामीणों को साढ़े तीन किलोमीटर दूर रंधाना गांव से पानी लाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। गांव में दो आरओ के कैंपरों की दो गाड़ियां आती हैं। नौकरीपेशा वाले लोग कैंपर रखवा रहे हैं। सरपंच चुनाव में ग्रामीणों को हर बार उम्मीदवार गांव में विकास कार्य करवाने और उनको मूलभूत सुविधाएं देने के आश्वासन देकर वोट ले जाते हैं, लेकिन पूरी योजना ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाती।
ग्रामीणों का कहना है कि जो भी उम्मीदवार गांव की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करवाने का ठोस आश्वासन देगा, उसे ही वोट दिए जाएंगे। इस बार वह झूठे आश्वासन देने वाले को वोट नहीं देंगे। छह हजार की आबादी वाले गांव अशरफगढ़ में 2500 के लगभग मतदाता हैं। गांव में केवल प्राथमिक पाठशाला है। बच्चों को पढ़ने के लिए शहर के सरकारी स्कूलों में साइकिलों पर आना पड़ता है। गांव से शहर तक आने-जाने की कोई परिवहन सुविधा नहीं है। गांव में स्वास्थ्य सेवाएं बिल्कुल ठप हैं।
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फिलहाल गांव में प्राथमिक पाठशाला है। बच्चों को छठी कक्षा के लिए शहर के सरकारी स्कूलों में दाखिला लेना पड़ता है। साइकिल या फिर अन्य वाहन का सहारे बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई छुड़वा देते हैं। गांव के सरकारी स्कूल का दर्जा बढ़ाया जाना चाहिए।
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-राजेश, ग्रामीण।
गांव में खेलने के लिए कहीं भी जमीन नहीं है। पिछले सरपंचों ने खेलों की तरफ ध्यान नहीं दिया। गांव में खेल स्टेडियम ही नहीं है। इस बार ऐसा सरपंच बने जो गांव में खेल स्टेडियम बनवाएं, जिससे गांव से खिलाड़ी तैयार होकर देश-प्रदेश का नाम रोशन करें।
-पवन, ग्रामीण।
गांव में जमीनी पानी बिल्कुल खारा है। उस पानी का प्रयोग न तो पशुओं और न ही लोगों के लिए हो सकता है, क्योंकि उसमें फ्लोराइड ही बहुत ज्यादा है। उस पानी का प्रयोग से बाल झडने लगे हैं। इस बार सरपंच से उम्मीद है कि वह ग्रामीणों को साफ और मीठा पानी मुहैया करवाए।

-अशोक, ग्रामीण।
गांव में सभी गलियां पक्की हैं और दोनों तरफ नालियां भी बनी हुई हैं, लेकिन गांव से पानी बाहर निकालने के लिए एक स्थाई जगह नहीं है, जिसके कारण बारिश के दिनों में समस्या गंभीर हो जाती है। पानी निकासी की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।
-सचिन, ग्रामीण।
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