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नगर परिषद की दुकानों के किरायेदार दुकानदार बने मालिक
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नगर परिषद कार्यालय । संवाद
- फोटो : Jind
जींद। पिछले साल दिसंबर महीने में प्रॉपर्टी सर्वे के दौरान सामने आई खामियां अभी पूरी तरह से ठीक भी नहीं हुई थी कि सर्वे कंपनी ने एक और बड़ा बवंडर कर दिया। नगर परिषद की शहर में लगभग 200 दुकानें हैं, जिनको किराये पर दिया हुआ है। याशी कंपनी ने सर्वे के दौरान इन किराएदार दुकानदारों को ही दुकानों का मालिक बना दिया। अब अधिकारियों को इसका पता चला तो इन गलतियों को ठीक करने के आदेश दिए गए हैं।
सरकार द्वारा शहरों में प्रॉपर्टी का सर्वे कर इसका रिकार्ड तैयार करने का ठेका याशी कंसल्टेंसी एजेंसी को दिया था। एजेंसी के काम पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे, लेकिन पिछले साल दिसंबर महीने में जब लोगों को प्रापर्टी सर्वे के नोटिस बांटने का काम शुरू हुआ तो इसमें काफी खामियां सामने आईं।
इसके बाद प्रशासन ने याशी कंसल्टेंसी को त्रुटियां ठीक करने के आदेश दिए। इसके लिए जगह-जगह शिविर लगाए गए। शहर के लगभग सात हजार लोगों ने अपनी प्रॉपर्टी में खामियां होने की शिकायत की और इनको ठीक करने के लिए आवेदन किए थे। अब नगर परिषद ने जब इन प्रॉपर्टी की खामियों को जांच तो पाया कि नगर परिषद ने जिन दुकानदारों को अपनी दुकानें किराए पर दी हुई हैं, उनको ही मालिक बना दिया गया है। इस प्रकार के प्रकरणों से साफ है कि कंपनी के कर्मचारियों ने कितनी लापरवाही से कार्य किया है।
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कुछ प्रॉपर्टी में गलतियां हुई हैं। नगर परिषद की दुकानों के मालिक किराएदारों को दिखाया गया है, इन गलतियों को ठीक करने के निर्देश दिए हैं। सभी गलतियां कंपनी ही ठीक करके देगी। लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
-सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी
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सरकार द्वारा शहरों में प्रॉपर्टी का सर्वे कर इसका रिकार्ड तैयार करने का ठेका याशी कंसल्टेंसी एजेंसी को दिया था। एजेंसी के काम पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे, लेकिन पिछले साल दिसंबर महीने में जब लोगों को प्रापर्टी सर्वे के नोटिस बांटने का काम शुरू हुआ तो इसमें काफी खामियां सामने आईं।
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इसके बाद प्रशासन ने याशी कंसल्टेंसी को त्रुटियां ठीक करने के आदेश दिए। इसके लिए जगह-जगह शिविर लगाए गए। शहर के लगभग सात हजार लोगों ने अपनी प्रॉपर्टी में खामियां होने की शिकायत की और इनको ठीक करने के लिए आवेदन किए थे। अब नगर परिषद ने जब इन प्रॉपर्टी की खामियों को जांच तो पाया कि नगर परिषद ने जिन दुकानदारों को अपनी दुकानें किराए पर दी हुई हैं, उनको ही मालिक बना दिया गया है। इस प्रकार के प्रकरणों से साफ है कि कंपनी के कर्मचारियों ने कितनी लापरवाही से कार्य किया है।
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कुछ प्रॉपर्टी में गलतियां हुई हैं। नगर परिषद की दुकानों के मालिक किराएदारों को दिखाया गया है, इन गलतियों को ठीक करने के निर्देश दिए हैं। सभी गलतियां कंपनी ही ठीक करके देगी। लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
-सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी