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स्वाइन फ्लू : जिले में लगातार जा रही सूअरों की जान, अभी तक एक भी गांव तक नहीं पहुंचा पशुपालन विभाग

Thu, 25 Aug 2022 11:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2022 11:54 PM IST
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Swine Flu: The life of pigs going continuously in the district, not a single village has reached animal husbandry department yet
संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। जिले में स्वाइन फ्लू के कारण लगातार सूअरों की जान जा रही है। मोरखी गांव के बाद अब खेड़ी मसानिया में भी 70 से ज्याद सूअरों की मौत हो चुकी है। अभी तक एक भी गांव में पशुपालन विभाग नहीं पहुंचा है। लंपी चर्म रोग वायरस से इतने पशुओं की मौत नहीं हुई, जितने सूअरों की मौत स्वाइन फ्लू से हुई है। अभी तक पशुपालन विभाग ने एक भी सूअर के सैंपल लेकर जांच के लिए नहीं भेजे हैं। पशुपालन विभाग तो अभी तक यह मानने को भी तैयार ही नहीं है कि जिले में स्वाइन फ्लू नामक बीमारी भी फैली हुई है।
पिछले चार दिन से अकेले मोरखी गांव में 40 के आसपास सूअरों की मौत हो चुकी है। मोरखी गांव के लोगों ने इसकी शिकायत भी पशुपालन विभाग को दी लेकिन अभी तक उनके गांव में एक भी पशु चिकित्सक यह जानने के लिए भी नहीं पहुंचा कि उनके गांव में अब तक कितने सूअरों की मौत हुई है। मोरखी गांव में सूअरों की मौत के बाद खेड़ी मसानिया गांव के लोगों ने भी अमर उजाला को अपने गांव में पिछले एक सप्ताह में 70 सूअरों की मौत होने की बात कही है। गांव के लोग मृत सूअरों को खेतों में दफन कर रहे हैं। अफ्रीकन स्वाइन फ्लू हर उम्र के सूअरों में आ रही है। बच्चे इस बीमारी के कारण जल्दी दम तोड़ रहे हैं जबकि जवान सूअर तीन से चार दिन बाद दम तोड़ रहे हैं।
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मोरखी गांव में बचा केवल एक ही सूअर
मोरखी गांव में एक सप्ताह पहले 50 सूअर ग्रामीणों के पास थे, लेकिन अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि गांव में केवल एक ही सूअर बचा हुआ है। रोशन, बंटी, प्रेम के बाद अब नुपा, राममेहर, कप्तान व प्रेमों के सूअरों ने भी दम तोड़ दिया है। यह लोग सूअर पालन के सहारे ही अपनी आजीविका चला रहे थे लेकिन अब इनके बाड़ों में एक भी सूअर नहीं बचा है।
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खेड़ी मसानिया में बरपा कहर
खेड़ी मसानिया गांव में कभी 100 से अधिक सूअर थे लेकिन अब गिने चुने ही सूअर बचे हुए हैं। पिछले एक सप्ताह में खेड़ी मसानिया निवासी सुनील के 15 सूअर, 18 बच्चे, सतीश का एक सूअर, राजेश के दो, शमशेर के सात, राकेश के दो सूअर सात बच्चे व कुलदीप के 18 सूअर मौत की नींद सो चुके हैं। ग्रामीणों को अब सूअर पालन से भी डर लगने लगा है। सुनील ने कहा उसका पशुबाड़ा पहले सूअरों से भरा हुआ था, जो अब खाली हो चुका है।
पशुपालन विभाग को गांवों का दौरा करने के निर्देश दिए हैं। सूअर पालक इसकी सूचना पशुपालन विभाग को भी दे सकते हैं।
-डॉ. मनोज कुमार, डीसी।
25जेएनडी13 : मोरखी गांव में एक बाड़े में मरे पड़े सूअर के बच्चे। संवाद।
25जेएनडी23 : खेड़ी मसानिया गांव में मरा पड़ा सूअर। संवाद।
25जेएनडी24 : जिला प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट करते खेड़ी मसानिया गांव के लोग। संवाद।
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