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दोहों से भक्ति, प्रेम और समानता का दिया संदेश : स्वामी राघवानंद
Thu, 13 Mar 2025 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 13 Mar 2025 12:03 AM IST
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12जेएनडी02-गांव निर्जन में आयोजित भंडारे में भाग लेते श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु
जींद। गांव निर्जन में संत नेकीराम महाराज की 180वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में सतगुरु नेकीराम महाराज की साध संगत, डेरा साघान घीसा पंथी और गांव निर्जन के ग्रामीणों ने भाग लिया। इस मौके पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। समारोह की अध्यक्षता स्वामी राजेश्वरानंद, स्वामी सदानंद और स्वामी सुखदेवा नंद ने की।
स्वामी राघवानंद ने कहा कि संत कबीरदास 15वीं सदी के भारतीय कवि, संत और समाज सुधारक थे। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख कवियों में से एक थे। कबीरदास ने अपने दोहों के माध्यम से भक्ति, प्रेम और समानता का संदेश दिया। वे अंधविश्वास, पाखंड और व्यक्ति पूजा के विरोधी थे। उन्होंने भारतीय समाज में जाति और धर्मों के बंधनों को तोड़ा। कबीरदास ने भगवान की निर्गुण रूप की आराधना की। कबीरदास ने सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की। उनकी रचनाएं सिखों के गुरु ग्रंथ में शामिल हैं। स्वामी राघवानंद ने कहा कि संत किसी एक समाज के नहीं होते, बल्कि उनकी शिक्षाएं पूरे समाज के लिए होती हैं। जिन पर चल कर लोग अपने जीवन में उच्चतम स्थान हासिल कर लेते हैं। उन्होंने आमजन से भी आह्वान किया कि संत कबीर की शिक्षाओं को जीवन में अपनाएं।
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स्वामी राघवानंद ने कहा कि संत कबीरदास 15वीं सदी के भारतीय कवि, संत और समाज सुधारक थे। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख कवियों में से एक थे। कबीरदास ने अपने दोहों के माध्यम से भक्ति, प्रेम और समानता का संदेश दिया। वे अंधविश्वास, पाखंड और व्यक्ति पूजा के विरोधी थे। उन्होंने भारतीय समाज में जाति और धर्मों के बंधनों को तोड़ा। कबीरदास ने भगवान की निर्गुण रूप की आराधना की। कबीरदास ने सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की। उनकी रचनाएं सिखों के गुरु ग्रंथ में शामिल हैं। स्वामी राघवानंद ने कहा कि संत किसी एक समाज के नहीं होते, बल्कि उनकी शिक्षाएं पूरे समाज के लिए होती हैं। जिन पर चल कर लोग अपने जीवन में उच्चतम स्थान हासिल कर लेते हैं। उन्होंने आमजन से भी आह्वान किया कि संत कबीर की शिक्षाओं को जीवन में अपनाएं।
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