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Jind News: सीआरएसयू में आंतरिक मूल्यांकन को लेकर छात्रों में रोष
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20जेएनडी37: मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते छात्र संगठन के सदस्य। स्रोत : संगठन
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को लेकर छात्रों में रोष है। बुधवार को किसान छात्र एकता संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुमित लाठर के नेतृत्व में पहुंचे विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने के बावजूद प्रशासन ठोस समाधान नहीं कर रहा।
सुमित लाठर ने कहा कि विश्वविद्यालय में आंतरिक मूल्यांकन प्रक्रिया अभी तक पूरी तरह पारदर्शी नहीं बन पाई है। अधिकांश विभागों में विद्यार्थियों को समय रहते आंतरिक अंक नहीं दिखाए जाते और न ही यह स्पष्ट किया जाता है कि अंक किस आधार पर दिए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई विभागों में योग्यता और प्रदर्शन के बजाय मनमर्जी से अंक लगाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि कॉमर्स, बॉटनी, मैथ, लॉ, जूलॉजी, पॉलिटिकल साइंस, लाइब्रेरी साइंस, केमिस्ट्री, बायोटेक और होटल मैनेजमेंट विभागों ने आंतरिक अंक तो जारी किए, लेकिन वर्गीकरण और मॉडरेशन के नियमों का पालन नहीं किया।
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वहीं हिंदी, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक्स, फिजिकल एजुकेशन, फिजिक्स, हिस्ट्री, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, मास कम्युनिकेशन, इंग्लिश, साइकोलॉजी, बीसीए, योगा और म्यूजिक विभागों ने अभी तक अंक सार्वजनिक नहीं किए हैं।
संगठन का आरोप है कि कुछ विभाग परीक्षाओं से एक दिन पहले अंक जारी कर रहे हैं जिससे विद्यार्थियों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। छात्रों को यह आशंका बनी रहती है कि कहीं पक्षपात या मनमाने तरीके से उनके अंक प्रभावित न हो जाएं।
संगठन ने मांग की कि सभी विभागों में आंतरिक अंकों और वर्गीकरण प्रणाली को तुरंत सार्वजनिक किया जाए। पूरे विश्वविद्यालय में समान नीति लागू हो और नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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सुमित लाठर ने कहा कि विश्वविद्यालय में आंतरिक मूल्यांकन प्रक्रिया अभी तक पूरी तरह पारदर्शी नहीं बन पाई है। अधिकांश विभागों में विद्यार्थियों को समय रहते आंतरिक अंक नहीं दिखाए जाते और न ही यह स्पष्ट किया जाता है कि अंक किस आधार पर दिए गए हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कई विभागों में योग्यता और प्रदर्शन के बजाय मनमर्जी से अंक लगाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि कॉमर्स, बॉटनी, मैथ, लॉ, जूलॉजी, पॉलिटिकल साइंस, लाइब्रेरी साइंस, केमिस्ट्री, बायोटेक और होटल मैनेजमेंट विभागों ने आंतरिक अंक तो जारी किए, लेकिन वर्गीकरण और मॉडरेशन के नियमों का पालन नहीं किया।
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वहीं हिंदी, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक्स, फिजिकल एजुकेशन, फिजिक्स, हिस्ट्री, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, मास कम्युनिकेशन, इंग्लिश, साइकोलॉजी, बीसीए, योगा और म्यूजिक विभागों ने अभी तक अंक सार्वजनिक नहीं किए हैं।
संगठन का आरोप है कि कुछ विभाग परीक्षाओं से एक दिन पहले अंक जारी कर रहे हैं जिससे विद्यार्थियों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। छात्रों को यह आशंका बनी रहती है कि कहीं पक्षपात या मनमाने तरीके से उनके अंक प्रभावित न हो जाएं।
संगठन ने मांग की कि सभी विभागों में आंतरिक अंकों और वर्गीकरण प्रणाली को तुरंत सार्वजनिक किया जाए। पूरे विश्वविद्यालय में समान नीति लागू हो और नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।