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वेदों के ज्ञान से ही दूर होंगी सामाजिक बुराइयां : आचार्या आर्याशा
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09जेएनडी05: दिवसीय वैदिक सत्संग समारोह का शुभारंभ हवन के साथ करते हुए आयोजक। स्रोत: आयोजक
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जींद। राम नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में शुक्रवार को तीन दिवसीय वैदिक सत्संग समारोह का शुभारंभ अग्निहोत्र के साथ हुआ। 9 से 11 अक्तूबर तक चलने वाले समारोह के पहले दिन शुक्रवार को प्रातकालीन सत्र में आर्य जगत की विदुषी आचार्या आर्याशा दर्शनाचार्या ने वेदों के ज्ञान को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
आचार्या आर्याशा ने कहा कि वर्तमान समय में समाज अव्यवस्था, अशांति, तनाव, भ्रष्टाचार, नशे और अनेक सामाजिक कुरीतियों से जूझ रहा है। कुसंस्कारों और अपसंस्कृति का प्रभाव युवा पीढ़ी को भटका रहा है। दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और महिलाओं के अपमान जैसी बुराइयां समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने धर्म के नाम पर फैल रहे अंधविश्वास, आडंबर और पाखंड पर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए वेदों के ज्ञान का प्रचार-प्रसार जरूरी है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को वैदिक शिक्षाओं को समझकर अपने आचरण में उतारना चाहिए।
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नैतिक मूल्यों और संस्कारों को अपनाकर ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इस अवसर पर सोनीपत से पहुंची वैदिक भजनोपदेशिका कुमारी तन्नु आर्या ने मधुर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को वेदों और शास्त्रों के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर आर्य समाज के संरक्षक प्रो. ओमकुमार आर्य, रामकरण आर्य, प्रधान कंवर साहब आर्य, पूर्व प्रधान कर्ण सिंह आर्य, मंत्री अजीत आर्य, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण आर्य मौजूद रहे।
आचार्या आर्याशा ने कहा कि वर्तमान समय में समाज अव्यवस्था, अशांति, तनाव, भ्रष्टाचार, नशे और अनेक सामाजिक कुरीतियों से जूझ रहा है। कुसंस्कारों और अपसंस्कृति का प्रभाव युवा पीढ़ी को भटका रहा है। दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और महिलाओं के अपमान जैसी बुराइयां समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने धर्म के नाम पर फैल रहे अंधविश्वास, आडंबर और पाखंड पर भी चिंता जताई।
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उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए वेदों के ज्ञान का प्रचार-प्रसार जरूरी है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को वैदिक शिक्षाओं को समझकर अपने आचरण में उतारना चाहिए।
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नैतिक मूल्यों और संस्कारों को अपनाकर ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इस अवसर पर सोनीपत से पहुंची वैदिक भजनोपदेशिका कुमारी तन्नु आर्या ने मधुर भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को वेदों और शास्त्रों के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर आर्य समाज के संरक्षक प्रो. ओमकुमार आर्य, रामकरण आर्य, प्रधान कंवर साहब आर्य, पूर्व प्रधान कर्ण सिंह आर्य, मंत्री अजीत आर्य, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण आर्य मौजूद रहे।