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राखी बांधने से पहले बस में बहनों को खाने पड़े धक्के, रोहतक रोड पर ज्यादा दिक्कत रही
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रक्षाबंधन पर्व पर भाई को रक्षा सूत्र बांधने से पहले रोडवेज बस में बहनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। क्योंकि कई रूटों पर बसों की संख्या कम थी तो महिलाओं की संख्या ज्यादा। जींद-रोहतक रोड पर महिलाओं को ज्यादा परेशानी हुई। जींद-हिसार रूट पर भी यह हाल रहा। इन दोनों रूटों पर आधे घंटे से ज्यादा समय तक बस नहीं मिलने से महिलाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि रोडवेज की तरफ से महिलाओं की सुखद यात्रा के लिए पूरे प्रबंध करने के दावे किए गए थे, पर इन दोनों रूटों पर यह सही नहीं साबित हुए। वहीं निजी बस संचालकों ने भी रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए किराया नहीं लिया।
शनिवार दोपहर से महिलाओं के लिए शुरू हुई निशुल्क यात्रा के बाद से ही जींद डिपो पर महिला व बच्चों की संख्या लगातार बढ़ने लगी थी। इसके चलते परिवहन विभाग ने जिस रूट पर ज्यादा यात्री दिखे, वहां पर बस लगाने के प्रयास किए गए, लेकिन यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण रोडवेज की व्यवस्था कई बूथों पर नाकाम साबित हुई। जिस भी बूथ पर बस लगती, वह दो मिनट में ही भर जाती थी। बस को तुरंत ही रवाना कर दिया जा रहा था। रोडवेज बेड़े में बसों की संख्या के आगे यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण महिलाओं को इस परेशानी को उठाना पड़ा।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम में रही महिलाओं की यात्रा
बस अड्डे पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस का सख्त पहरा रहा। सुबह से शाम तक पुलिसकर्मी बार-बार बस अड्डे के अंदर तो कभी बाहर नजर बनाए हुए थे। सुरक्षा को लेकर महिला व पुरुष पुलिसकर्मी वर्दी के अलावा सिविल ड्रेस में लगातार ध्यान रख रहे थे।
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कोरोना का नहीं लगा डर, लगातार रही भीड़
कोरोना की चिंता किए बिना महिलाओं ने बसों में सफर किया। इस दौरान बस अड्डे के बाहर, बस के अंदर व फिर दुकानों पर कहीं भी शारीरिक दूरी के नियमों का ध्यान नहीं रखा गया। किसी भी महिला या पुरुष यात्री के मुंह पर मास्क नहीं दिखाई दिया। बसों में निर्धारित संख्या से दोगुना लोगों ने यात्रा की।
जींद से रोहतक रूट पर रही ज्यादा दिक्कत
सबसे ज्यादा समस्या जींद-रोहतक रूट पर रही। इस रूट पर आधे-आधे घंटे में एक बस आ रही थी। लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि बूथ पर लगने से पहले ही वह भर जाती थी। बस को तुरंत निकाल दिया जा रहा था। रोडवेज ने दावा किया था कि हर 10 से 15 मिनट में बस सर्विस रहेगी, लेकिन रोहतक रूट पर यात्रियों को सुविधा देने में वह पूरी तरह से नाकाम रहा।
रात 9 बजे तक चलीं बसें
रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए रोडवेज ने रात 9 बजे तक महिलाओं को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बसों का परिचालन किया। हालांकि शाम सात बजे के बाद नाममात्र ही बसें चलीं, लेकिन महिलाओं को परेशानी न हो, इसका पुरा ख्याल रखा गया।
यात्रियों को सुविधा देने का किया प्रयास : गुलाब सिंह दूहन
जींद डिपो के महाप्रबंधक गुलाब सिंह दूहन ने कहा कि बहनों को त्योहार के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसको देखते हुए बेहतर सर्विस दी गई, लेकिन कई रूटों पर यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण कुछ समय के लिए परेशानी हुई। रोडवेज की सभी 140 बस रूटों पर चलाई गई, ताकि किसी भी रूट पर परेशानी न हो।
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शनिवार दोपहर से महिलाओं के लिए शुरू हुई निशुल्क यात्रा के बाद से ही जींद डिपो पर महिला व बच्चों की संख्या लगातार बढ़ने लगी थी। इसके चलते परिवहन विभाग ने जिस रूट पर ज्यादा यात्री दिखे, वहां पर बस लगाने के प्रयास किए गए, लेकिन यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण रोडवेज की व्यवस्था कई बूथों पर नाकाम साबित हुई। जिस भी बूथ पर बस लगती, वह दो मिनट में ही भर जाती थी। बस को तुरंत ही रवाना कर दिया जा रहा था। रोडवेज बेड़े में बसों की संख्या के आगे यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण महिलाओं को इस परेशानी को उठाना पड़ा।
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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम में रही महिलाओं की यात्रा
बस अड्डे पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस का सख्त पहरा रहा। सुबह से शाम तक पुलिसकर्मी बार-बार बस अड्डे के अंदर तो कभी बाहर नजर बनाए हुए थे। सुरक्षा को लेकर महिला व पुरुष पुलिसकर्मी वर्दी के अलावा सिविल ड्रेस में लगातार ध्यान रख रहे थे।
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कोरोना का नहीं लगा डर, लगातार रही भीड़
कोरोना की चिंता किए बिना महिलाओं ने बसों में सफर किया। इस दौरान बस अड्डे के बाहर, बस के अंदर व फिर दुकानों पर कहीं भी शारीरिक दूरी के नियमों का ध्यान नहीं रखा गया। किसी भी महिला या पुरुष यात्री के मुंह पर मास्क नहीं दिखाई दिया। बसों में निर्धारित संख्या से दोगुना लोगों ने यात्रा की।
जींद से रोहतक रूट पर रही ज्यादा दिक्कत
सबसे ज्यादा समस्या जींद-रोहतक रूट पर रही। इस रूट पर आधे-आधे घंटे में एक बस आ रही थी। लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि बूथ पर लगने से पहले ही वह भर जाती थी। बस को तुरंत निकाल दिया जा रहा था। रोडवेज ने दावा किया था कि हर 10 से 15 मिनट में बस सर्विस रहेगी, लेकिन रोहतक रूट पर यात्रियों को सुविधा देने में वह पूरी तरह से नाकाम रहा।
रात 9 बजे तक चलीं बसें
रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए रोडवेज ने रात 9 बजे तक महिलाओं को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बसों का परिचालन किया। हालांकि शाम सात बजे के बाद नाममात्र ही बसें चलीं, लेकिन महिलाओं को परेशानी न हो, इसका पुरा ख्याल रखा गया।
यात्रियों को सुविधा देने का किया प्रयास : गुलाब सिंह दूहन
जींद डिपो के महाप्रबंधक गुलाब सिंह दूहन ने कहा कि बहनों को त्योहार के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसको देखते हुए बेहतर सर्विस दी गई, लेकिन कई रूटों पर यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण कुछ समय के लिए परेशानी हुई। रोडवेज की सभी 140 बस रूटों पर चलाई गई, ताकि किसी भी रूट पर परेशानी न हो।