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Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Sikh Gurdwara Management Committee met separately in protest

अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के विरोध में उतरे सिख

Tue, 08 Jul 2014 01:04 AM IST
जींद, अमरउजाला/ब्यूरो
जींद, अमरउजाला/ब्यूरो Updated Tue, 08 Jul 2014 01:04 AM IST
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प्रदेश में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाए जाने के विरोध में सोमवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया।

कमेटी के सदस्यों ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर विरोध जताया। हरियाणा सरकार द्वारा अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाए जाने के निर्णय को रद करने का ज्ञापन गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भेजने के लिए आरटीए को सौंपा गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के आह्वान पर सोमवार को सिख जत्थे गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब में एकत्रित हुए।
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एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने हरियाणा सरकार के निर्णय की निंदा की। बाद में एसजीपीसी के सदस्य अमीर सिंह रसींदा के नेतृत्व में सिख लघु सचिवालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर, सिख कौम द्वारा बेमिसाल कुर्बानियां देने के बाद अस्तित्व में आई है। सन् 1925 में सिख गुरुद्वारा एक्ट पास किया गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के जनरल हाउस में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से 170 सदस्य सिख संगत चुनकर भेजती है। इसके अलावा सारे देश में से 15 सदस्यों का ऑप्ट किया जाता है। विभिन्न राज्यों में स्थित पांच तख्त साहिबान जत्थेदार साहिबान भी जनरल हाउस के सदस्य होते हैं।
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गुरुद्वारा एक्ट 1925 की मंशा के अनुसार शिरोमणि कमेटी पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में स्थित गुरुद्वारा साहिबानों की सेवा संभाल अच्छे ढंग से करती है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिखों की सिरमौर धार्मिक संस्था है जो हमेशा ही सिख कौम के लिए हर संभव प्रयत्न करती है। सिख धर्म के प्रचार के लिए दुनिया भर में सिख मिशन स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार सिखों में फूट डालना चाहती है इसलिए इस तरह के निर्णय पास किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि विश्वभर के सिखों के हकों को ध्यान में रखकर सिखों की पार्लियामेंट और सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को कमजोर करने और सिखों में फूट डालने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने की कोशिश हमेशा के लिए बंद किया जाए। बाद में कमेटी के सदस्य नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। उपायुक्त के न मिलने पर आररटीए एसके चहल प्रदर्शनकारियों के पास पहुंचे और मांगों से संबंधित ज्ञापन लिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि गृहमंत्री को मांगों से संबंधित ज्ञापन भेज दिया जाएगा।



जानबूझकर एसजीपीसी को नहीं करने दिया जा रहा काम
एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा कि हरियाणा में जब भी एसजीपीसी ने कोई बड़ा शिक्षण संस्थान खोलना चाहा तो प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने उसको लटकाने का काम किया है। एसजीपीसी द्वारा स्कूल और कालेजों को बनाने के लिए सरकार सीएलयू और एनओसी नहीं दे रही है। सरकार ने कई गुरुद्वारों की जमीन को छीन लिया है। एसजीपीसी ने जींद में तकनीकी कालेज बनाने की घोषणा की थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने इसके लिए सीएलयू व एनओसी नहीं दी। इसी प्रकार वर्ष 2005-06 में एसजीपीसी ने शाहाबाद मारकंडा में मीरीपीरी मेडिकल कालेज की नींव रखी थी मगर सरकार ने भवन का निर्माण कार्य रुकवा दिया। सरकार ने अंबाला के साथ लगती करोड़ों रुपये कीमत की चार एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर ली। अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा कि कैथल में आयोजित कार्यक्रम में सिख धर्म की मर्यादा का उल्लंघन किया गया है। कार्यक्रम के आयोजक और मुख्यमंत्री ने सिरोपा पहनते समय ने तो सिर पर कपड़ा डाला और न ही सिर झुकाया। सिरोपा हमेशा सिर झुकाकर लेते हैं। जिन लोगों को धर्म की मर्यादा का ज्ञान नहीं है तो वह सिख धर्म की रक्षा कैसे करेंगे।


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