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कैसे लगेगी आस्था की डुबकी, सूखा पड़ा तीर्थ
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Mon, 28 Nov 2016 11:57 PM IST
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सूखा पड़ा पिंडतारक।
- फोटो : jind
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देवापितृकार्य अमावस्या पर मंगलवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पहुंचेंगे, लेकिन पिंडतारक तीर्थ में स्नान पानी नहीं होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानियों से दो-चार होना पड़ सकता है। तीर्थ में पानी भरने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस अनदेखी से तीर्थ पर कर्मकांड करने वाले पंडितों को भी परेशानी हो रही है।
पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ काफी प्राचीन तीर्थ है और इस तीर्थ का संबंध महाभारतकाल से जुड़ा हुआ है। महाभारत के युद्ध के पश्चात पांडवों ने पितृ शांति के लिए इस तीर्थ में स्नान कर यहां पिंडदान किया था। इसके बाद से हर अमावस्या पर यहां मेला लगता है और दूर-दूर से श्रद्धालु स्नान व पिंडदान करने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण तीर्थ का पानी पूरी तरह से सूख गया है। तीर्थ में पानी नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पडे़गा। तीर्थ पर मौजूद पंडितों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा यहां पर बैठने वाले पंडितों की 150 से 300 रुपये तक की पर्ची तो काटी जाती है, जिससेे तीर्थ की साफ-सफाई व पानी भरने जिम्मेदारी प्रशासन की है। लेकिन अभी तक यहां तीर्थ में पानी नहीं छोड़ा गया।
साफ-सफाई की नहीं कोई व्यवस्था
यहां तीर्थ पर साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं हैं। तीर्थ में पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे काफी परेशानी हो रही है।
रतिराम, पंडित।
पानी नहीं होने से श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
अभी तक पिंडतारक तीर्थ में पानी नहीं छोड़ा गया है, यहां आमावस्या के दिन दूर-दूर से श्रुद्धालु आते हैं, तीर्थ के साथ श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। जिससे तीर्थ में पानी नहीं होने से श्रद्धालुओं को निराश होना पड़ता हैं।
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रमेश, पंडित।
पिंडारा पिंडतारक तीर्थ कुरुक्षेत्र बोर्ड के अधीन आता है। बोर्ड द्वारा तीर्थ की देख-रेख की जाती है और अलग से इसका बजट होता है। हालांकि, तीर्थ को साफ सुथरा रखने के लिए पिंडारा गांव की पंचायत से 25 लोगों की टीम गठित की गई थी, लेकिन हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
कमेटी से की जाएगी बात
अभी तक जानकारी नहीं है कि तीर्थ में पानी क्यों नहीं पहुंचा। इसके लिए डीसी ने गांव की कमेटी भी गठित कर रखी है। इस मामले में कमेटी के सदस्यों बात की जाएगी और तीर्थ में पानी डाल दिया जाएगा।
-सतबीर कुंडू, एसडीएम।
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पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ काफी प्राचीन तीर्थ है और इस तीर्थ का संबंध महाभारतकाल से जुड़ा हुआ है। महाभारत के युद्ध के पश्चात पांडवों ने पितृ शांति के लिए इस तीर्थ में स्नान कर यहां पिंडदान किया था। इसके बाद से हर अमावस्या पर यहां मेला लगता है और दूर-दूर से श्रद्धालु स्नान व पिंडदान करने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण तीर्थ का पानी पूरी तरह से सूख गया है। तीर्थ में पानी नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पडे़गा। तीर्थ पर मौजूद पंडितों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा यहां पर बैठने वाले पंडितों की 150 से 300 रुपये तक की पर्ची तो काटी जाती है, जिससेे तीर्थ की साफ-सफाई व पानी भरने जिम्मेदारी प्रशासन की है। लेकिन अभी तक यहां तीर्थ में पानी नहीं छोड़ा गया।
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साफ-सफाई की नहीं कोई व्यवस्था
यहां तीर्थ पर साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं हैं। तीर्थ में पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे काफी परेशानी हो रही है।
रतिराम, पंडित।
पानी नहीं होने से श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
अभी तक पिंडतारक तीर्थ में पानी नहीं छोड़ा गया है, यहां आमावस्या के दिन दूर-दूर से श्रुद्धालु आते हैं, तीर्थ के साथ श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। जिससे तीर्थ में पानी नहीं होने से श्रद्धालुओं को निराश होना पड़ता हैं।
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रमेश, पंडित।
पिंडारा पिंडतारक तीर्थ कुरुक्षेत्र बोर्ड के अधीन आता है। बोर्ड द्वारा तीर्थ की देख-रेख की जाती है और अलग से इसका बजट होता है। हालांकि, तीर्थ को साफ सुथरा रखने के लिए पिंडारा गांव की पंचायत से 25 लोगों की टीम गठित की गई थी, लेकिन हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
कमेटी से की जाएगी बात
अभी तक जानकारी नहीं है कि तीर्थ में पानी क्यों नहीं पहुंचा। इसके लिए डीसी ने गांव की कमेटी भी गठित कर रखी है। इस मामले में कमेटी के सदस्यों बात की जाएगी और तीर्थ में पानी डाल दिया जाएगा।
-सतबीर कुंडू, एसडीएम।