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Jind News: रामराय की बेटी संध्या ने पदक जीत बढ़ाया जिले का मान, अब एशियन गेम्स 2028 पर नजर
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11जेएनडी39 : संध्या ढुल ।
- फोटो : मिहींपुरवा में स्थित भरतपुर गांव।
जींद। गांव रामराय की बेटी संध्या ढुल ने कठिन संघर्ष और मेहनत के दम पर हैंडबाल में अपनी अलग पहचान बनाई है। आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों के बावजूद संध्या ने हार नहीं मानी।
लगातार अभ्यास करते हुए अब तक नेशनल स्तर पर नौ पदक और राज्य स्तर पर 15 से अधिक पदक अपने नाम कर चुकी हैं। अब उनका लक्ष्य वर्ष 2028 में होने वाले एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतना है।
संध्या ने छठी कक्षा में वर्ष 2014 से हैंडबाल खेलना शुरू किया था। गांव रामराय से प्रतिदिन सुबह-शाम जींद पहुंचकर अभ्यास करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन खेल के प्रति जुनून ने कभी कदम पीछे नहीं हटने दिए। मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेन में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर भी मिला।
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उन्होंने तीन ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट, सब जूनियर नेशनल और जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। वर्ष 2021 में पिता के निधन के बाद संध्या का हौसला जरूर टूटा लेकिन उनके चाचा जयबीर ढुल ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।
संध्या को डीसी कार्यालय में नौकरी भी मिल चुकी है लेकिन खेलों के प्रति उनका जुनून आज भी बरकरार है। वह प्रतिदिन अभ्यास कर रही हैं ताकि एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतने का सपना पूरा कर सकें। संध्या की सफलता आज ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
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लगातार अभ्यास करते हुए अब तक नेशनल स्तर पर नौ पदक और राज्य स्तर पर 15 से अधिक पदक अपने नाम कर चुकी हैं। अब उनका लक्ष्य वर्ष 2028 में होने वाले एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतना है।
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संध्या ने छठी कक्षा में वर्ष 2014 से हैंडबाल खेलना शुरू किया था। गांव रामराय से प्रतिदिन सुबह-शाम जींद पहुंचकर अभ्यास करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन खेल के प्रति जुनून ने कभी कदम पीछे नहीं हटने दिए। मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेन में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर भी मिला।
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उन्होंने तीन ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट, सब जूनियर नेशनल और जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। वर्ष 2021 में पिता के निधन के बाद संध्या का हौसला जरूर टूटा लेकिन उनके चाचा जयबीर ढुल ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।
संध्या को डीसी कार्यालय में नौकरी भी मिल चुकी है लेकिन खेलों के प्रति उनका जुनून आज भी बरकरार है। वह प्रतिदिन अभ्यास कर रही हैं ताकि एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतने का सपना पूरा कर सकें। संध्या की सफलता आज ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।