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भद्रा काल के कारण आठ को नहीं बांधी जाएगी राखी : राजू
Fri, 01 Aug 2025 12:23 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:23 AM IST
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31जेएनडी25-राजू शर्मा पुजारी। संवाद
- फोटो : kathua news
उचाना। भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस बार नौ अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म के अनुसार रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है लेकिन इस वर्ष भद्रा काल के कारण तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
उचाना कलां के प्राचीन शिव मंदिर पुजारी राजू शर्मा ने बताया कि पूर्णिमा तिथि आठ अगस्त को दोपहर दो बजकर 12 मिनट पर शुरू होकर नौ अगस्त को दोपहर एक बजकर 21 मिनट तक रहेगी लेकिन आठ अगस्त की दोपहर 2 बजकर 12 से लेकर नौ अगस्त की सुबह 1 बजकर 52 तक भद्रा काल रहेगा, जो अशुभ माना जाता है।
मान्यता है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती। इसलिए इस बार रक्षाबंधन 9 अगस्त को उदया तिथि में मनाया जाएगा। इस दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह पांच बजकर 35 मिनट से दोपहर एक बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
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इसी अवधि में बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं। पुजारी ने कहा कि रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं जबकि भाई बहन को जीवन भर उसकी रक्षा का वचन देता है।
इस दिन घरों में उत्सव जैसा माहौल रहता है। मिठाइयों और उपहारों का आदान-प्रदान होता है। रक्षा बंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह पारिवारिक मूल्यों, आपसी प्रेम और संस्कारों को समर्पित त्योहार है, जिसका इंतजार पूरे साल लोग करते हैं।
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उचाना कलां के प्राचीन शिव मंदिर पुजारी राजू शर्मा ने बताया कि पूर्णिमा तिथि आठ अगस्त को दोपहर दो बजकर 12 मिनट पर शुरू होकर नौ अगस्त को दोपहर एक बजकर 21 मिनट तक रहेगी लेकिन आठ अगस्त की दोपहर 2 बजकर 12 से लेकर नौ अगस्त की सुबह 1 बजकर 52 तक भद्रा काल रहेगा, जो अशुभ माना जाता है।
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मान्यता है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती। इसलिए इस बार रक्षाबंधन 9 अगस्त को उदया तिथि में मनाया जाएगा। इस दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह पांच बजकर 35 मिनट से दोपहर एक बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
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इसी अवधि में बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं। पुजारी ने कहा कि रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं जबकि भाई बहन को जीवन भर उसकी रक्षा का वचन देता है।
इस दिन घरों में उत्सव जैसा माहौल रहता है। मिठाइयों और उपहारों का आदान-प्रदान होता है। रक्षा बंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह पारिवारिक मूल्यों, आपसी प्रेम और संस्कारों को समर्पित त्योहार है, जिसका इंतजार पूरे साल लोग करते हैं।