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Jind News: खराब कांटों को बदलने में जुटा रेलवे, आठ माह से रेंगकर गुजर रहीं ट्रेन
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22जेएनडी21: दबलैन रेलवे फाटक पर कांटे बदलने का चल रहा कार्य। संवाद।
नरवाना। दिल्ली-बठिंडा रेलमार्ग पर स्थित दबलैन रेलवे फाटक पर खराब कांटों की वजह से पिछले आठ माह से ट्रेनें रेंगकर गुजर रहीं हैं। कांटे खराब होने से ट्रेनों को सुरक्षा की दृष्टि से महज पांच किमी प्रति घंटा की रफ्तार से निकाला जा रहा है। ट्रेनें 15 से 20 मिनट की तक देरी से पहुंच रही हैं। रेलवे विभाग अब खराब कांटों को बदलने में जुट गया है। पिछले कई दिनों से अलग अलग दिन ब्लॉक लेकर साइट पर कार्य चल रहा है और कई कांटे बदले जा चुके हैं।
नरवाना स्टेशन अधीक्षक रणधीर सिंह का कहना है कि खराब कांटों को बदलने का कार्य चल रहा है और जल्द ही समस्या से निजात मिल जाएगी। विभाग को लगातार इस मुद्दे से अवगत कराया जा रहा था। इसके बाद अब मरम्मत और बदलाव का काम तेज किया गया है। तकनीकी दिक्कत का सबसे ज्यादा असर रोजाना सफर करने वाले कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
सुबह के समय बठिंडा की ओर से आने वाली सभी ट्रेनें देरी से पहुंच रही हैं। नरवाना, उचाना से जींद, रोहतक की तरफ जाने वाले सरकारी व गैर-सरकारी कर्मचारी हर दिन समय पर दफ्तर पहुंचने में परेशानी झेल रहे हैं।
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कुरुक्षेत्र से दिल्ली जाने वाली 14024 दिल्ली मेमू एक्सप्रेस प्रतिदिन करीब 15 मिनट लेट पहुंच रही है। 20424 पातालकोट एक्सप्रेस के लेट होने से यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यात्रियों की नजरें रेलवे पर टिकी हैं कि कब तक दबलैन फाटक की यह तकनीकी बीमारी पूरी तरह खत्म होगी और ट्रेनों की रफ्तार पटरी पर लौटेगी।
संवाद
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नरवाना स्टेशन अधीक्षक रणधीर सिंह का कहना है कि खराब कांटों को बदलने का कार्य चल रहा है और जल्द ही समस्या से निजात मिल जाएगी। विभाग को लगातार इस मुद्दे से अवगत कराया जा रहा था। इसके बाद अब मरम्मत और बदलाव का काम तेज किया गया है। तकनीकी दिक्कत का सबसे ज्यादा असर रोजाना सफर करने वाले कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
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सुबह के समय बठिंडा की ओर से आने वाली सभी ट्रेनें देरी से पहुंच रही हैं। नरवाना, उचाना से जींद, रोहतक की तरफ जाने वाले सरकारी व गैर-सरकारी कर्मचारी हर दिन समय पर दफ्तर पहुंचने में परेशानी झेल रहे हैं।
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कुरुक्षेत्र से दिल्ली जाने वाली 14024 दिल्ली मेमू एक्सप्रेस प्रतिदिन करीब 15 मिनट लेट पहुंच रही है। 20424 पातालकोट एक्सप्रेस के लेट होने से यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यात्रियों की नजरें रेलवे पर टिकी हैं कि कब तक दबलैन फाटक की यह तकनीकी बीमारी पूरी तरह खत्म होगी और ट्रेनों की रफ्तार पटरी पर लौटेगी।
संवाद