फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Rabij injection in government hospitals

सरकारी अस्पतालों में नहीं रैबिज इंजेक्शन

Sun, 23 Nov 2014 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद Updated Sun, 23 Nov 2014 11:41 PM IST
विज्ञापन
सावधान अगर आप को कुत्ता या बंदर काट ले तो सरकारी अस्पताल का चक्कर छोड़ दें और सीधे निजी अस्पतालों का रुख करें क्योंकि सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबिज इंजेक्शन ही नहीं है।
विज्ञापन


 जिला मुख्यालय की सामान्य अस्पताल को छोड़ कर नरवाना, सफीदों सामान्य अस्पताल, मुआना, हाट पीएचसी व कालवा, जुलाना सीएचसी सहित जिले की सरकारी अस्पतालों में रैबिज इजेक्शन उपलब्ध नहीं है। अगर हम कुत्ते या बंदर के काटने की बात करें तो अकेले सफीदों उपमंडल में पिछले 15 दिन में ऐसे लगभग 45 मामले सामने आ चुके हैं लेकिन इंजेक्शन न होने की वजह से लोगों को अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना भी लोगों को मुंह चिढ़ा रही है।
विज्ञापन


सामान्य अस्पताल प्रशासन की माने तो एंटी रैबिज इंजेक्शन के कैथल में स्थित वेयर हाउस में ही दवा कई दिन से खत्म हो चुकी है। जानवरों के काटने वाले लोगों की संख्या काफी आ रही है, लेकिन पीछे से ही दवा नहीं मिलने के कारण उनकी भी मजबूरी है और दवा उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिलने के कारण क्षेत्र के लोगों को बाहर निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा है। अस्पताल पहुंचे शमशेर, गुरबचन ने कहा कि आवारा कुत्तों तथा बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अक्सर बंदर तथा कुत्ते लोगों को काट लेते हैं और उसके बाद एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य हो जाता है, लेकिन जब अस्पताल में मरीज पहुंचते हैं तो वहां पर स्टॉक खत्म होने का जवाब मिलता है। वैसे तो मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज का दावा किया जा रहा है, लेकिन अगर लोगों को दवा ही नहीं मिलती को इसका क्या फायदा है।

मुफ्त मिलने वाले इंजेक्शन मिलता है 400 रुपये का
प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना में बीपीएल परिवारों को एंटी रैबिज इंजेक्शन सरकारी अस्पतालों में मुफ्त लगाया जाता है, जबकि अन्य मरीजों को 100 रुपये में इंजेक्शन मिल जाता है। लेकिन अस्पताल में इंजेक्शन नहीं होने के कारण लोगों को निजी अस्पतालों में 350 से लेकर 400 रुपये में इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा है। ऐसे में कुत्ते के काटने पर तीन इंजेक्शन लगवाने पर प्रत्येक व्यक्ति को 300 रुपये की जगह 1200 रुपये खर्च करना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों में मिलने वाले इंजेक्शन को सही तापमान नहीं मिलने के कारण उनकी गुणवत्ता में भी कमी आ जाती है। अगर सरकारी अस्पताल में दवा नहीं है तो मजबूर होकर निजी अस्पतालों में इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा है।


निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा
गांव सिंघुपरा निवासी मेवा सिंह ने बताया कि उसे पागल कुत्ते ने काट लिया है। इसके बाद वह अपना बीपीएल राशन कार्ड लेकर टीका लगवाने के लिए सफीदों के सामान्य अस्पताल में गया तो उसे टीका नहीं लगाया गया। वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल में एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं है। इस महीने में भी आने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने किसी निजी अस्पताल में ही इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी। निजी अस्पताल में यह टीका 400 रुपये का लगाया जाता है, जबकि सरकारी अस्पतालों मेें सरकार द्वारा बीपीएल कार्डों पर निशुल्क सेवा है।


सफीदों सामान्य अस्पताल के फार्मासिस्ट सुभाष ने कहा कि एक सप्ताह पहले ही अस्पताल में एंटी रैबिज दवा खत्म हुई है। कैथल वेयर हाउस में दवाइयां लाने के 13 नवंबर को गए थे, लेकिन एंटी रैबिज दवा नहीं मिली। दवाइयां लाने के लिए प्रत्येक क्षेत्रों के सामान्य अस्पताल व पीएचसी व सीएचसी के लिए इंटरनेट पर तिथि दी जाती है, लेकिन अभी तब इंटरनेट पर अगली तिथि नहीं डाल गई है।



वेयर हाउस में ही दवा खत्म
सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र पूनिया ने बताया कि सेंट्रल वेयर हाउस में ही इंजेक्शन खत्म हो गया है। इंजेक्शन के लिए वेयर हाउस में डिमांड दी गई है, वहां दवा आते ही अस्पतालों में दवा पहुंच जाएगी। फिलहाल जींद के अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध है। डिमांड को देखते हुए जींद सामान्य अस्पताल प्रशासन ने पहले ही ज्यादा इंजेक्शन ले आए थे, इसलिए मुख्यालय अस्पताल में अभी इंजेक्शन मिल रहे हैं। अन्य अस्पतालों में भी इंजेक्शन जल्द उपलब्ध करा दिए जाएंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed