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आरक्षण संघर्ष समिति ने दिया झांझ गांव में धरना
jind
Updated Mon, 06 Jun 2016 12:31 AM IST
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धरने में बैठे जाट नेता
- फोटो : bureau
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अदालत द्वारा जाट आरक्षण पर रोक लगाने के बाद सरकार पर आरक्षण की सही पैरवी का दबाव बनाने के लिए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा शुरू किए गए धरने का स्थान अब बदल सकता है।दरअसल समिति को झंाझ गांव में दिल्ली-पटियाला हाईवे के साथ एक दिन की रैली की अनुमति प्रशासन ने दी थी। अब समिति को धरना कहीं और देना होगा। अनिशिचतकालीन धरने की अनुमति के लिए जाट नेता रविवार शाम डीसी विनय सिंह से मिलने पहुंचे, लेकिन डीसी ने उन्हें इसके लिए औपचारिक रूप से आवेदन करने को कहा है।
रविवार को समिति ने झांझ गांव के पास धरना दिया। हालांकि आयोजकों ने कार्यक्रम को जाट न्याय रैली का नाम दिया, लेकिन भीड़ के मामले में यह धरना ही रहा। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल ने कहा कि जब तक सरकार मांगें नहीं मानती, धरना जारी रहेगा। वहीं वक्ताओं ने सरकार के साथ-साथ उन जाट व खाप नेताओं को भी खूब कोसा, जिन्होंने सरकार के साथ बातचीत कर आंदोलन वपसी की घोषणा की। समिति के कार्यक्रम के चलते भारी संख्या में पुलिस था केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात रहे। सुबह आठ बजे से ही धरना स्थल पर आयोजक पहुंचने शुरू हो गए। हालांकि शुरूआत में लोगों की संख्या बहुत कम रही, लेकिन 11 बजे तक सैकड़ों लोग एकत्रित हो गए। इस दौरान वक्ताओं ने अपने-अपने तरीके से जाट आरक्षण की पैरवी करते हुए अपनी बात रखी, लेकिन अधिकतर वक्ताओं ने लोगों से आह्वान किया कि वे आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखें और आंदोलन को बदनाम करने वालों से भी निपटें।
बुजुर्गों के साथ दिखा युवा जोश
कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों के साथ युवा जोश भी दिखा। हालांकि युवाओं को मंच को अधिक बोलने का मौका नहीं मिला, लेकिन युवाओं की भागेदारी काफी रही। जिला के अलग-अलग हिस्सों से लोग धरने पर पहुंचे। 43 डिग्री तापमान और झुलसा देने वाली गर्मी के बीच काफी संख्या में महिलाएं भी कार्यक्रम में पहुंची।
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समिति की मांगें
कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकार से छह मांगें की।
-हरियाणा में जाटों के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है। निर्दोष लोगों को जेलों में डाला जा रहा है। उन्हें रिहा किया जाए। लोगों पर फर्जी केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें रद्द किया जाए।
-आंदोलन के दौरान जो भी लोग घायल हुए हैं या मारे गए हैं, सरकार द्वारा घोषित मुआवजा उन्हें दिया जाए।
-सांसद राजकुमार सैनी द्वारा आंदोलन के दौरान और उससे पहले जाटों पर किए गए हमलों की जांच की जाए।
-आंदोलन के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा जाट समाज के साथ किए गए भेदभाव के आरोपियों को जेल भेजा जाए।
-सांसद राजकुमार सैनी द्वारा पिछले एक साल में फैलाए गए जातीय जहर की जांच संसद की एथिक्स कमेटी द्वारा करवाई जाए व उनकी सदस्यता रद्द की जाए।
-जाट समाज के लोगों खिलाफ आंदोलन के दौरान दर्ज केस वापस हों और हाल ही में जींद में 130 लोगों पर दर्ज किए गए केस तुरंत प्रभाव से खारिज किए जाएं।
धरना स्थल से दूर सुरक्षा बलों से संभाला मोर्चा
हालांकि धरना स्थल पर पुलिसकर्मी सादी वर्दी में तथा सीआईडी के कर्मचारी तैनात रहे, लेकन पुलिस व केंद्रयी सुरक्षा बलों ने धरना स्थल से दूर मोर्चा संभाला। शुगर मिल के पास भारी संख्या में पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात रहे। वहीं धरना स्थल से कुछ ही दूरी पर पुलिस ने भी बैरिगेट लगा रखे थे।
सरकार से बातचीत करने वाले भाई नहीं दुश्मन
कार्यक्रम के दौरान समिति के सदस्य खजान सिंह बूरा ने कहा कि कुछ लोग बीच में आकर आंदोलन को खराब कर रहे हैं। ऐसे लोग कोम के जयचंद हैं वे भाई नहीं, दुश्मन हैं। बूरा ने कहा कि जाट तोडफ़ोड़ में नहीं, जोडने में विश्वास रखते हैं।
सरकार पर साधा निशाना
इस दौरान कृष्ण श्योकंद ने कहा कि अभी तो यह ट्रेलर है, फिल्म अभी बाकी है। श्योकंद ने जैसे ही जोशीला भाषण शुरू किया, जाट नेताओं ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कहा कि यदि लोग उन्हें सुनना चाहते हैं तो वे बोलेंगे। ऐसे में लोगों ने हाथ उठाकर श्योकंद का समर्थन किया। इस पर श्योकंद ने कहा कि सांसद राजकुमार सैनी ओबीसी ब्रिगेड बनाते रहे। यह देशद्रोह, लेकिन सरकार ने उन्हें सुरक्षा मुहैया करवा रही है और अपने हकों की बात करने वाले जाटों के खिलाफ देशद्रोह के केस दर्ज किए जा रहे हैं। श्याकंद ने कहा कि पहलवान सुशील कुमार को भी जाट होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण आंदोलन के पक्ष में हैं, लेकिन यदि सरकार नहीं मानती तो हर प्रकार का आंदोलन किया जाएगा।
धरने जारी हाईकमान के आदेश का इंतजार
समिति के शीर्ष नेतृत्व के आदेशानुसार धरने शुरू किए गए हैं। अब शीर्ष नेतृत्व के आदेश पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। हां यदि सरकार कुछ दिन नहीं मानती तो फिर धरने जिला स्तर से ब्लॉक स्तर पर ले जाए जाएंगे। सरकार को जाट युवाकों को रिहा करना चाहिए और जाटों को आरक्षण दिलवाना चाहिए।
कैप्टन रणधीर सिंह चहल, सदस्य केंद्रीय कमेटी अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति
प्रशासन उपद्रव नहीं करेगा सहन
समिति को एक दिन की रैली की अनुमति दी गई थी। अब धरने के लिए दोबारा से उन्हें स्वीकृति लेनी होगी। इसकी अपनी प्रक्रिया है। यह स्थान हाईवे से 100 मीटर अंदर है, ऐसे में यहां धरने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
वियन सिंह, डीसी
झांझ गांव में एक दिन की रैली के लिए ही प्रशासन ने अनुमति दी थी। इसके बाद शाम के समय डीसी विनय सिंह से जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल ने बात की। क्योंकि धरना स्थल हाईवे से 100 मीटर दूर नहीं है, ऐसे में यहां कल से कार्यक्रम की अनुमति नहीं है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति प्रशासन से काई टकराव नहीं चाहती, इसलिए दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
कैप्टन भूपेंद्र, जिलाध्यक्ष जाट आरक्षण संघर्ष समिति
नरवाना में चप्पे-चप्पे पर रही सुरक्षा
जाट आंदोलन को लेकर पूरे दिन शांति का माहौल रहा। भयंकर गर्मी का माहौल होने के कारण भी कई जाट नेता अपने घरों में आराम फरमाते नजर आए। नरवाना में आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान पवनजीत बनवाला और अन्य जाट खापों व संगठनों ने पांच जून के आंदोलन से खुद के अलग कर लिया था। इसके बावजूद शहर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। शहर के विश्वकर्मा चौक,हरियल चौक, लघु सचिवालय सहित सरकारी सस्थानों पर भी सेना पूरी तरह मुस्तैद रही।
पुष्कर में बनेगी भावी रणनीति-बनवाला
आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान पवनजीत बनवाला ने कहा कि आठ जून से 12 जून तक राजस्थान के पुष्कर में जुटेंगे और भावी रणनीति तैयार करेगे। बनवाला ने कहा कि आगामी 12 जून को ही नरवाना में सर्व खाप पंचायत बुलाकर आगामी रणनीति का ऐलान कर दिया जाएगा।
आरक्षण की लड़ाई सरकार से-समैण
सर्व जाट समाज संगठन के सूबे सिंह समैण ने कहा कि आरक्षण को लेकर लड़ाई सरकार से है और जब तक आरक्षण नहीं मिलता लड़ाई जारी रहेगी। समैण ने कहा कि हम अपनी लड़ाई किसी यूपी के मलिक के सहारे नहीं लडना चाहते। उन्होंने कहा कि अगर यशपाल मलिक ने आंदोलन चलाना है तो यूपी में जाकर चलाएं। हरियाणा के खापें व जाट अपना आदोंलन खुद लडना जानते है। खापों की जयचंद से तुलना पर समैण ने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी करने वाले 'पेड मैम्बरÓ है। ऐसे मैम्बर जाट समाज का भला नहीं कर सकते।
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रविवार को समिति ने झांझ गांव के पास धरना दिया। हालांकि आयोजकों ने कार्यक्रम को जाट न्याय रैली का नाम दिया, लेकिन भीड़ के मामले में यह धरना ही रहा। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल ने कहा कि जब तक सरकार मांगें नहीं मानती, धरना जारी रहेगा। वहीं वक्ताओं ने सरकार के साथ-साथ उन जाट व खाप नेताओं को भी खूब कोसा, जिन्होंने सरकार के साथ बातचीत कर आंदोलन वपसी की घोषणा की। समिति के कार्यक्रम के चलते भारी संख्या में पुलिस था केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात रहे। सुबह आठ बजे से ही धरना स्थल पर आयोजक पहुंचने शुरू हो गए। हालांकि शुरूआत में लोगों की संख्या बहुत कम रही, लेकिन 11 बजे तक सैकड़ों लोग एकत्रित हो गए। इस दौरान वक्ताओं ने अपने-अपने तरीके से जाट आरक्षण की पैरवी करते हुए अपनी बात रखी, लेकिन अधिकतर वक्ताओं ने लोगों से आह्वान किया कि वे आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखें और आंदोलन को बदनाम करने वालों से भी निपटें।
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कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों के साथ युवा जोश भी दिखा। हालांकि युवाओं को मंच को अधिक बोलने का मौका नहीं मिला, लेकिन युवाओं की भागेदारी काफी रही। जिला के अलग-अलग हिस्सों से लोग धरने पर पहुंचे। 43 डिग्री तापमान और झुलसा देने वाली गर्मी के बीच काफी संख्या में महिलाएं भी कार्यक्रम में पहुंची।
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समिति की मांगें
कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकार से छह मांगें की।
-हरियाणा में जाटों के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है। निर्दोष लोगों को जेलों में डाला जा रहा है। उन्हें रिहा किया जाए। लोगों पर फर्जी केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें रद्द किया जाए।
-आंदोलन के दौरान जो भी लोग घायल हुए हैं या मारे गए हैं, सरकार द्वारा घोषित मुआवजा उन्हें दिया जाए।
-सांसद राजकुमार सैनी द्वारा आंदोलन के दौरान और उससे पहले जाटों पर किए गए हमलों की जांच की जाए।
-आंदोलन के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा जाट समाज के साथ किए गए भेदभाव के आरोपियों को जेल भेजा जाए।
-सांसद राजकुमार सैनी द्वारा पिछले एक साल में फैलाए गए जातीय जहर की जांच संसद की एथिक्स कमेटी द्वारा करवाई जाए व उनकी सदस्यता रद्द की जाए।
-जाट समाज के लोगों खिलाफ आंदोलन के दौरान दर्ज केस वापस हों और हाल ही में जींद में 130 लोगों पर दर्ज किए गए केस तुरंत प्रभाव से खारिज किए जाएं।
धरना स्थल से दूर सुरक्षा बलों से संभाला मोर्चा
हालांकि धरना स्थल पर पुलिसकर्मी सादी वर्दी में तथा सीआईडी के कर्मचारी तैनात रहे, लेकन पुलिस व केंद्रयी सुरक्षा बलों ने धरना स्थल से दूर मोर्चा संभाला। शुगर मिल के पास भारी संख्या में पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात रहे। वहीं धरना स्थल से कुछ ही दूरी पर पुलिस ने भी बैरिगेट लगा रखे थे।
सरकार से बातचीत करने वाले भाई नहीं दुश्मन
कार्यक्रम के दौरान समिति के सदस्य खजान सिंह बूरा ने कहा कि कुछ लोग बीच में आकर आंदोलन को खराब कर रहे हैं। ऐसे लोग कोम के जयचंद हैं वे भाई नहीं, दुश्मन हैं। बूरा ने कहा कि जाट तोडफ़ोड़ में नहीं, जोडने में विश्वास रखते हैं।
सरकार पर साधा निशाना
इस दौरान कृष्ण श्योकंद ने कहा कि अभी तो यह ट्रेलर है, फिल्म अभी बाकी है। श्योकंद ने जैसे ही जोशीला भाषण शुरू किया, जाट नेताओं ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कहा कि यदि लोग उन्हें सुनना चाहते हैं तो वे बोलेंगे। ऐसे में लोगों ने हाथ उठाकर श्योकंद का समर्थन किया। इस पर श्योकंद ने कहा कि सांसद राजकुमार सैनी ओबीसी ब्रिगेड बनाते रहे। यह देशद्रोह, लेकिन सरकार ने उन्हें सुरक्षा मुहैया करवा रही है और अपने हकों की बात करने वाले जाटों के खिलाफ देशद्रोह के केस दर्ज किए जा रहे हैं। श्याकंद ने कहा कि पहलवान सुशील कुमार को भी जाट होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण आंदोलन के पक्ष में हैं, लेकिन यदि सरकार नहीं मानती तो हर प्रकार का आंदोलन किया जाएगा।
धरने जारी हाईकमान के आदेश का इंतजार
समिति के शीर्ष नेतृत्व के आदेशानुसार धरने शुरू किए गए हैं। अब शीर्ष नेतृत्व के आदेश पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। हां यदि सरकार कुछ दिन नहीं मानती तो फिर धरने जिला स्तर से ब्लॉक स्तर पर ले जाए जाएंगे। सरकार को जाट युवाकों को रिहा करना चाहिए और जाटों को आरक्षण दिलवाना चाहिए।
कैप्टन रणधीर सिंह चहल, सदस्य केंद्रीय कमेटी अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति
प्रशासन उपद्रव नहीं करेगा सहन
समिति को एक दिन की रैली की अनुमति दी गई थी। अब धरने के लिए दोबारा से उन्हें स्वीकृति लेनी होगी। इसकी अपनी प्रक्रिया है। यह स्थान हाईवे से 100 मीटर अंदर है, ऐसे में यहां धरने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
वियन सिंह, डीसी
झांझ गांव में एक दिन की रैली के लिए ही प्रशासन ने अनुमति दी थी। इसके बाद शाम के समय डीसी विनय सिंह से जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल ने बात की। क्योंकि धरना स्थल हाईवे से 100 मीटर दूर नहीं है, ऐसे में यहां कल से कार्यक्रम की अनुमति नहीं है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति प्रशासन से काई टकराव नहीं चाहती, इसलिए दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
कैप्टन भूपेंद्र, जिलाध्यक्ष जाट आरक्षण संघर्ष समिति
नरवाना में चप्पे-चप्पे पर रही सुरक्षा
जाट आंदोलन को लेकर पूरे दिन शांति का माहौल रहा। भयंकर गर्मी का माहौल होने के कारण भी कई जाट नेता अपने घरों में आराम फरमाते नजर आए। नरवाना में आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान पवनजीत बनवाला और अन्य जाट खापों व संगठनों ने पांच जून के आंदोलन से खुद के अलग कर लिया था। इसके बावजूद शहर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। शहर के विश्वकर्मा चौक,हरियल चौक, लघु सचिवालय सहित सरकारी सस्थानों पर भी सेना पूरी तरह मुस्तैद रही।
पुष्कर में बनेगी भावी रणनीति-बनवाला
आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रधान पवनजीत बनवाला ने कहा कि आठ जून से 12 जून तक राजस्थान के पुष्कर में जुटेंगे और भावी रणनीति तैयार करेगे। बनवाला ने कहा कि आगामी 12 जून को ही नरवाना में सर्व खाप पंचायत बुलाकर आगामी रणनीति का ऐलान कर दिया जाएगा।
आरक्षण की लड़ाई सरकार से-समैण
सर्व जाट समाज संगठन के सूबे सिंह समैण ने कहा कि आरक्षण को लेकर लड़ाई सरकार से है और जब तक आरक्षण नहीं मिलता लड़ाई जारी रहेगी। समैण ने कहा कि हम अपनी लड़ाई किसी यूपी के मलिक के सहारे नहीं लडना चाहते। उन्होंने कहा कि अगर यशपाल मलिक ने आंदोलन चलाना है तो यूपी में जाकर चलाएं। हरियाणा के खापें व जाट अपना आदोंलन खुद लडना जानते है। खापों की जयचंद से तुलना पर समैण ने कहा कि इस प्रकार की बयानबाजी करने वाले 'पेड मैम्बरÓ है। ऐसे मैम्बर जाट समाज का भला नहीं कर सकते।