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Jind News: महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा करना सरकार की प्राथमिकता
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09जेएनडी04: लघु सचिवालय में बाल श्रम मामलों को लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल कुमार की अध्यक्षता में लघु सचिवालय में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बैठक हुई। इस दौरान बाल संरक्षण, बाल श्रम उन्मूलन, बाल विवाह रोकथाम, शिक्षा, पोषण, प्राइवेट प्ले स्कूल नियमों और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई।
आयोग सदस्य अनिल कुमार ने निर्देश दिए कि बच्चों से जुड़े हर मामले में संवेदनशीलता, तत्परता और पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाल श्रम से जुड़े मामलों में कार्रवाई केवल ‘चाइल्ड लेबर (प्रोहिबिशन एंड रेगुलेशन) एसओपी 2017’ के नियमों के तहत ही की जाए।
किसी भी छापेमारी से पहले डीसी की अनुमति अनिवार्य होगी व प्राप्त सूचना की सत्यता की पूर्ण पुष्टि की जाए। अनुपस्थित अधिकारियों पर अनिल कुमार ने कहा कि ऐसी बैठकों में गैरहाजिरी दायित्वों के प्रति उदासीनता दर्शाती है।
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अनिल कुमार ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे की फीस संबंधी समस्या का तुरंत समाधान किया जाए। भट्ठों, अस्थाई बस्तियों और प्रवासी परिवारों के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की जाए। जहां 20 या इससे अधिक बच्चे हों, वहां स्वयंसेवी शिक्षक नियुक्त किए जाएं।
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जींद। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल कुमार की अध्यक्षता में लघु सचिवालय में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बैठक हुई। इस दौरान बाल संरक्षण, बाल श्रम उन्मूलन, बाल विवाह रोकथाम, शिक्षा, पोषण, प्राइवेट प्ले स्कूल नियमों और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई।
आयोग सदस्य अनिल कुमार ने निर्देश दिए कि बच्चों से जुड़े हर मामले में संवेदनशीलता, तत्परता और पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाल श्रम से जुड़े मामलों में कार्रवाई केवल ‘चाइल्ड लेबर (प्रोहिबिशन एंड रेगुलेशन) एसओपी 2017’ के नियमों के तहत ही की जाए।
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किसी भी छापेमारी से पहले डीसी की अनुमति अनिवार्य होगी व प्राप्त सूचना की सत्यता की पूर्ण पुष्टि की जाए। अनुपस्थित अधिकारियों पर अनिल कुमार ने कहा कि ऐसी बैठकों में गैरहाजिरी दायित्वों के प्रति उदासीनता दर्शाती है।
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अनिल कुमार ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे की फीस संबंधी समस्या का तुरंत समाधान किया जाए। भट्ठों, अस्थाई बस्तियों और प्रवासी परिवारों के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की जाए। जहां 20 या इससे अधिक बच्चे हों, वहां स्वयंसेवी शिक्षक नियुक्त किए जाएं।