{"_id":"65f3641df1c3d9c0640c3594","slug":"prisoners-prepared-flower-nursery-mahki-jail-jind-news-c-199-1-sroh1009-114349-2024-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: बंदियों ने तैयार की फूलों की नर्सरी, महकी जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: बंदियों ने तैयार की फूलों की नर्सरी, महकी जेल
Fri, 15 Mar 2024 02:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 15 Mar 2024 02:24 AM IST
विज्ञापन
जींद। जिला जेल में बंदियों ने अक्तूबर में अलग-अलग किस्म के फूल के पौधों की नर्सरी तैयार की थी। अब जेल की हर सड़क व पार्क में अलग ही महक बनी हुई है। जेल में कैदियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए महानिदेशक कारागार हरियाणा अकिल मोहम्मद ने बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। इस पर जेल अधीक्षक संजीव बुधवार ने बेहतर तरीके से काम किया। इसके बाद जेल में बंदियों से नर्सरी तैयार करवाई और अब जिला जेल को फूलों से महकाने का काम किया।
जिला जेल में केवल एक या दो तरह के नहीं बल्कि दस से ज्यादा अलग-अलग वरायटी के फूल हैं। इनमें गजेनिया, कैलेनडूल्ला, मेरीगोल्ड, कॉमोस, नगरेटा वाइट, स्टॉक पर्पल के फूल जेल के अंदर अपनी सुगंध बिखेर रहे हैं। इन फूलों से जिला कारागार की फिजा पूरी तरह से बदल गई है। जिला जेल में हर साल फूल के पौधों की नर्सरी तैयार की जाती थी। इस बार जेल में अलग तरीके से यह फूलों के पौधे लगाए। कारागार परिसर को हरियालीयुक्त रखने पर फूलों की खुशबू से बंदियों को स्वस्थ वातावरण उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे एक तो जेल में बेहतर माहौल बंदियों को मिल रहा है और दूसरा इन बंदियों को फूल की नर्सरी तैयार करने, उनकी लगाकर देखभाल करने समेत कई तरह के कार्यों की जानकारी मिल रही है। इससे वह सजा पूरी होने के बाद बागवानी का अपना व्यवसाय कर सकते हैं।
बढ़ रहे आत्मनिर्भरता की तरफ कदम
जिला कारागार के पुरुष बंदियों को रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने के लिए फूलों की खेती करने की जानाकरी उपलब्ध करवाई जा रही है। इससे वह आजीविका चलाने में दक्षता हासिल कर सकेंगे। कारागार को सुंदरीकरण करने के लिए बंदियों ने मौसम के अनुरूप तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूलों की खेती की है।
विज्ञापन
बंदियों और कैदियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए वातावरण जरूरी
जिला जेल में बंदियों को सीजनल फूलों की पौध तैयार करना सिखाया गया। इसकी देखभाल करवाई गई।उनसे गुड़ाई करवाकर पौधे तैयार किए गए हैं। अब इनको पार्क व सड़कों पर व्यवस्थित तरीके से लगाकर जेल की सूरत बदलने का काम किया है। इससे जेल में बेहतर वातावरण मिले, यही उनका लक्ष्य है। यहां पर बंदी व कैदी प्रतिदिन घूमकर स्वास्थ्य लाभ लेते हैं। -संजीव कुमार, जेल अधीक्षक जींद।
विज्ञापन
जिला जेल में केवल एक या दो तरह के नहीं बल्कि दस से ज्यादा अलग-अलग वरायटी के फूल हैं। इनमें गजेनिया, कैलेनडूल्ला, मेरीगोल्ड, कॉमोस, नगरेटा वाइट, स्टॉक पर्पल के फूल जेल के अंदर अपनी सुगंध बिखेर रहे हैं। इन फूलों से जिला कारागार की फिजा पूरी तरह से बदल गई है। जिला जेल में हर साल फूल के पौधों की नर्सरी तैयार की जाती थी। इस बार जेल में अलग तरीके से यह फूलों के पौधे लगाए। कारागार परिसर को हरियालीयुक्त रखने पर फूलों की खुशबू से बंदियों को स्वस्थ वातावरण उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे एक तो जेल में बेहतर माहौल बंदियों को मिल रहा है और दूसरा इन बंदियों को फूल की नर्सरी तैयार करने, उनकी लगाकर देखभाल करने समेत कई तरह के कार्यों की जानकारी मिल रही है। इससे वह सजा पूरी होने के बाद बागवानी का अपना व्यवसाय कर सकते हैं।
विज्ञापन
बढ़ रहे आत्मनिर्भरता की तरफ कदम
जिला कारागार के पुरुष बंदियों को रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने के लिए फूलों की खेती करने की जानाकरी उपलब्ध करवाई जा रही है। इससे वह आजीविका चलाने में दक्षता हासिल कर सकेंगे। कारागार को सुंदरीकरण करने के लिए बंदियों ने मौसम के अनुरूप तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूलों की खेती की है।
विज्ञापन
बंदियों और कैदियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए वातावरण जरूरी
जिला जेल में बंदियों को सीजनल फूलों की पौध तैयार करना सिखाया गया। इसकी देखभाल करवाई गई।उनसे गुड़ाई करवाकर पौधे तैयार किए गए हैं। अब इनको पार्क व सड़कों पर व्यवस्थित तरीके से लगाकर जेल की सूरत बदलने का काम किया है। इससे जेल में बेहतर वातावरण मिले, यही उनका लक्ष्य है। यहां पर बंदी व कैदी प्रतिदिन घूमकर स्वास्थ्य लाभ लेते हैं। -संजीव कुमार, जेल अधीक्षक जींद।