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‘राजनेताओं ने ही मुफ्त रेवड़ी बांटने का कल्चर शुरू किया’

Mon, 18 Jul 2022 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 12:24 AM IST
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'Politicians started the culture of distributing free Revdi'
संजू। - फोटो : Jind
जींद। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के समय शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में मुफ्त रेवड़ी बांटने के कल्चर को घातक बताया। उन्होंने इससे युवाओं को सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि इससे युवाओं का भविष्य अंधेरे में सिमट जाएगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शहर के युवाओं ने अपनी अलग-अलग राय दी है। युवाओं का कहना है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां ऐसा कल्चर बना रही हैं। लोगों को मुफ्त में मिलने वाली वस्तुओं की आदत पड़ गई है। यह केवल युवाओं के लिए घातक नहीं बल्कि पूरे देश के लिए घातक है। युवाओं ने सबसे पहले जनप्रतिनिधियों को ही मुफ्त की रेवड़ी छोड़ने की नसीहत दी है ताकि कोई भी पार्टी इस प्रकार का प्रलोभन नहीं दे।
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वास्तव में मुफ्त की वस्तुओं की आदत घातक है। ऐसे में लोग काम करने से परहेज करने लगे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। किसी भी राजनीतिक पार्टी द्वारा मुफ्त कोई भी चीज देने या घोषणा करने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। इसके लिए कठोर निर्णयों की आवश्यकता है।
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-सोनू संधु।
राजनेताओं ने ही सबसे पहले ऐसी आदत डाली है। यदि वे खुद सभी फ्री मिलने वाली वस्तुओं को छोड़कर अपनी सेलरी या फिर पेंशन से मिलने वाली राशि से सुविधाएं त्यागकर उदाहरण पेश करें तो इससे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। युवा भी मुफ्त की रेवड़ी बांटने वाली पार्टियों से परहेज करेंगे और विकास की तरफ ध्यान देंगे।
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-नवीन चहल।
देश का भविष्य संवारना है तो युवाओं को सोचना होगा। वोट देते समय हमें किसी भी प्रलोभन या मुफ्त की वस्तुओं की तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए। यदि युवाओं ने ऐसी बात ठान की कि जो भी पार्टी मुफ्त देने की घोषणा करेगी, वह उसका बहिष्कार करेंगे या उसे वोट नहीं देंगे तो ही सुधार हो सकता है।
-प्रवीण नैन
चुनाव आयोग को मुफ्त देने की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टियों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। आज हर कोई पार्टी कोई न कोई लालच देकर युवाओं का ठग रही है। देश में एक भी ऐसी पार्टी नहीं है, जो लोकलुभावनी घोषणाएं नहीं करती हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों को केवल विकास की घोषणाएं करनी चाहिए ताकि देश तरक्की कर सके।
-अमरजीत।
राजनीतिक पार्टियों द्वारा जो घोषणपत्र तैयार किए जाते हैं, उनको पहले चुनाव आयोग से अप्रूव करवाना चाहिए ताकि वह ऐसी कोई भी घोषणा नहीं कर सकें जो लोगों में लालच पैदा करे। हर बार लोकसभा व विधानसभा चुनावों में पार्टियों ऐसी घोषणाएं करती हैं, जैसे कि पूरे देश का नक्सा ही बदल देंगी लेकिन ऐसा आज तक कुछ नहीं हुआ। अब तक गांवों में सरपंच चुनाव में भी घोषणाएं होने लगी हैं। इस कल्चर को बंद किया जाना चाहिए।
-मोनू
आज के समय देश की जनता शिक्षित हो चुकी है। ऐसे में जनता को इसका ज्ञान होना चाहिए कि कौन सी पार्टी उनको बरगला रही है और कौन सी पार्टी या उम्मीदवार देश के लिए सही साबित हो सकते हैं। इसलिए बिना किसी लोभ लालच के हमें केवल ऐसे उम्मीदवार को वोट देनी चाहिएं, जो देश के विकास में योगदान दे सके।
-अजय।
देश को अर्थव्यवस्था में सुदृढ़ बनाना है तो हमें मुफ्त में मिलने वाली सुविधाओं का त्याग करना होगा। पुराने समय में कोई भी व्यक्ति मुफ्त का नहीं खाता था। यदि कोई व्यक्ति किसी निर्धन पर दया करके उसे भोजन भी देता था तो वह व्यक्ति उसका कुछ न कुछ काम बदले में जरूर करता था। हमें भी मुफ्त के लालच से बाहर निकलना होगा और मेहनत के दम पर देश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना होगा। बहुत सा खजाना लोगों को मुफ्त की सुविधाएं उपलब्ध करवाने में खर्च हो जाता है। इसलिए इस कल्चर को बंद करना चाहिए। यह शुरुआत पहले जनप्रतिनिधियों को ही करनी होगी।
-सचिन
इस प्रकार के नियम केवल जनता पर ही क्यों लागू होते हैं। जनप्रतिनिधियों को भी वीआईपी कल्चर छोडना होगा। उन्हें भी मुफ्त में बिजली, पानी, खाने-पीने की वस्तुएं तथा घूमने के लिए गाड़ियां व सुरक्षाकर्मी मिलते हैं। यदि देश से मुफ्त की रेवड़ी का कल्चर बंद करना है तो जनप्रतिनिधियों को मुफ्त मिलने वाली सुविधाओं को छोड़ना होगा। जनप्रतिनिधियों को भी अपने बेटों को देश सेवा के लिए बॉर्डर पर भेजना चाहिए। किसी भी बड़े नेता का कोई बेटा कभी बॉर्डर पर नहीं देखा गया।

-संजू

सचिन।

सचिन।- फोटो : Jind

 अजय।

अजय।- फोटो : Jind

 मोनू।

मोनू।- फोटो : Jind

 अमरजीत।

अमरजीत।- फोटो : Jind

प्रवीण नैन।

प्रवीण नैन।- फोटो : Jind

नवीन चहल।

नवीन चहल।- फोटो : Jind

 सोनू संधु।

सोनू संधु।- फोटो : Jind

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