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Jind News: सोमवती अमावस्या पर पितरों के लिए किया पिंडदान
Mon, 08 Apr 2024 11:24 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 08 Apr 2024 11:24 PM IST
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जींद। पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर सोमवार को चैत्र कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया तथा पिंडदान करके तर्पण किया। ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर रविवार को शाम से ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए थे। पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन का आयोजन किया गया। सोमवार को अल सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्यान्ह के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूरदराज से आएं श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान कर सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान जाम की स्थिति बनी रही और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
क्या है महत्व
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस्या आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं।
मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीदारी
पिंडारा तीर्थ पर सोमवती अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थीं। जिस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीदारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे, वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे। पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहा। इससे जाम जैसी स्थिति बनी रही। पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिसबल तैनात किया गया था। सरोवर में नहाते हुए कोई अनहोनी घटना न हो, इसके लिए गोताखोर व किस्ती का विशेष प्रबंध किया गया था।
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श्रद्धालुओं ने पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा पाठ किए : शास्त्री
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सोमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रही। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। जिसके चलते इस दिन पूजा-पाठ व पितृ तर्पण का विशेष महत्व बढ़ गया है। अब दूसरी सोमवती अमावस्या का योग 17 जुलाई को है।
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क्या है महत्व
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस्या आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं।
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मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीदारी
पिंडारा तीर्थ पर सोमवती अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थीं। जिस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीदारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे, वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे। पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहा। इससे जाम जैसी स्थिति बनी रही। पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिसबल तैनात किया गया था। सरोवर में नहाते हुए कोई अनहोनी घटना न हो, इसके लिए गोताखोर व किस्ती का विशेष प्रबंध किया गया था।
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श्रद्धालुओं ने पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष पूजा पाठ किए : शास्त्री
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सोमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रही। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। जिसके चलते इस दिन पूजा-पाठ व पितृ तर्पण का विशेष महत्व बढ़ गया है। अब दूसरी सोमवती अमावस्या का योग 17 जुलाई को है।