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Jind News: मां के संस्कारों को दी सलामी, लेफ्टिनेंट बन गए हरदीप गिल
Mon, 15 Dec 2025 12:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 15 Dec 2025 12:19 AM IST
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14जेएनडी54: संतरो देवी लेफ्टिनेंट बने अपने बेटे हरदीप गिल के साथ। स्रोत : सोशल मीडिया
जींद। यह कहानी है अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे की। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हरदीप गिल ने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों मजबूत इरादों के सामने हार मान ही जाती हैं।
20 वर्ष पूर्व संतरो देवी के पति का निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उस समय तीन बेटियां और मात्र दो वर्ष का बेटा हरदीप था। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद संतरो देवी ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने सरकारी स्कूल में मिड डे मील वर्कर के रूप में काम करना शुरू किया।
इतना ही नहीं स्कूल की छुट्टी के बाद वे खेतों में मजदूरी कर अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटी रहीं। गांव अलीपुर में कठिन हालातों में जीवन यापन करते हुए संतरो देवी ने बच्चों को मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया। इसी संस्कारों का परिणाम है कि आज उनका बेटा हरदीप गिल भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देश सेवा के लिए तैयार है।
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हरदीप गिल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने इग्नू से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने भी अपनी मां का हाथ बंटाया और खेतों में मेहनत मजदूरी की। कठिन परिश्रम और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाते हुए हरदीप ने भारतीय सेना में जाने का सपना संजोया और आखिरकार भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से कमीशन प्राप्त कर उसे साकार कर दिखाया। लेफ्टिनेंट हरदीप गिल की सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह कहानी बताती है कि हमारे सशस्त्र बलों की असली ताकत ग्रामीण युवा हैं, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
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20 वर्ष पूर्व संतरो देवी के पति का निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उस समय तीन बेटियां और मात्र दो वर्ष का बेटा हरदीप था। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद संतरो देवी ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने सरकारी स्कूल में मिड डे मील वर्कर के रूप में काम करना शुरू किया।
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इतना ही नहीं स्कूल की छुट्टी के बाद वे खेतों में मजदूरी कर अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटी रहीं। गांव अलीपुर में कठिन हालातों में जीवन यापन करते हुए संतरो देवी ने बच्चों को मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया। इसी संस्कारों का परिणाम है कि आज उनका बेटा हरदीप गिल भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देश सेवा के लिए तैयार है।
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हरदीप गिल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने इग्नू से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने भी अपनी मां का हाथ बंटाया और खेतों में मेहनत मजदूरी की। कठिन परिश्रम और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाते हुए हरदीप ने भारतीय सेना में जाने का सपना संजोया और आखिरकार भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से कमीशन प्राप्त कर उसे साकार कर दिखाया। लेफ्टिनेंट हरदीप गिल की सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह कहानी बताती है कि हमारे सशस्त्र बलों की असली ताकत ग्रामीण युवा हैं, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।