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Jind News: मरीज ले रहे निजी अस्पतालों का सहारा, नागरिक अस्पताल में नहीं पड़ रहा नंबर
Fri, 08 Aug 2025 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:55 PM IST
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08जेएनडी26-नागरिक अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचे लोग। संवाद
जींद। आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों का भुगतान न होने के कारण लाभार्थियों का इलाज दूसरे दिन भी बंद रखा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा। शहर में 19 निजी अस्पताल आयुष्मान के पैनल पर हैं।
वहीं जिन लोगों को ऑपरेशन की तारीख मिली थी उनके ऑपरेशन भी नहीं हुए। ऐसे में आमजन की सरकार से मांग है कि निजी चिकित्सक एसोसिएशन से बातचीत कर उनका भुगतान किया जाए व आयुष्मान कार्ड पर फिर से ऑपरेशन की सुविधा को शुरू करवाया जाए।
नागरिक अस्पताल में एक दिन में 10 से 12 सर्जरी ही हो सकती है। वहीं सभी निजी अस्पतालों में एक दिन की औसतन सर्जरी की संख्या 40 से 50 तक आ जाती है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में ही सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।
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जिले में आयुष्मान के पैनल पर आने वाले निजी अस्पताल में ज्यादातर पित्त की थैली में पथरी, बच्चेदानी, मोतियाबिंद संबंधित मरीज सबसे ज्यादा ऑपरेशन करवाने के लिए जाते हैं। जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड हैं उनका निजी अस्पतालों में इलाज मुक्त हो जाता है। वहीं जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है। निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करवाने का इलाज काफी महंगा पड़ता है।
तीन-तीन साल तक नहीं हो रहा भुगतान
आईएमए के पूर्व प्रधान डॉ. सुशील मंगला ने बताया कि निजी अस्पताल संचालकों के साथ यह तय किया हुआ है कि आयुष्मान पर किए जाने वाले इलाज का भुगतान 15 दिन के अंदर सरकार करेगी लेकिन भुगतान तीन-तीन साल बाद भी नहीं हो पा रहा है। इसके बावजूद निजी अस्पतालों की ओर से मरीज का उपचार कर दिया जाता है।
सुविधा को कराया जा रहा उपलब्ध : सीएमओ
सीएमओ डॉ. सुमन कोहली ने बताया कि अस्पताल के पास जितनी सुविधाएं हैं वो सब मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। अस्पताल में चिकित्सक लगातार ओपीडी कर रहे हैं और जो सर्जरी के केस हैं प्रतिदिन की तरह उन्हें निपटाया जा रहा है।
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वहीं जिन लोगों को ऑपरेशन की तारीख मिली थी उनके ऑपरेशन भी नहीं हुए। ऐसे में आमजन की सरकार से मांग है कि निजी चिकित्सक एसोसिएशन से बातचीत कर उनका भुगतान किया जाए व आयुष्मान कार्ड पर फिर से ऑपरेशन की सुविधा को शुरू करवाया जाए।
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नागरिक अस्पताल में एक दिन में 10 से 12 सर्जरी ही हो सकती है। वहीं सभी निजी अस्पतालों में एक दिन की औसतन सर्जरी की संख्या 40 से 50 तक आ जाती है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में ही सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।
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जिले में आयुष्मान के पैनल पर आने वाले निजी अस्पताल में ज्यादातर पित्त की थैली में पथरी, बच्चेदानी, मोतियाबिंद संबंधित मरीज सबसे ज्यादा ऑपरेशन करवाने के लिए जाते हैं। जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड हैं उनका निजी अस्पतालों में इलाज मुक्त हो जाता है। वहीं जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है। निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करवाने का इलाज काफी महंगा पड़ता है।
तीन-तीन साल तक नहीं हो रहा भुगतान
आईएमए के पूर्व प्रधान डॉ. सुशील मंगला ने बताया कि निजी अस्पताल संचालकों के साथ यह तय किया हुआ है कि आयुष्मान पर किए जाने वाले इलाज का भुगतान 15 दिन के अंदर सरकार करेगी लेकिन भुगतान तीन-तीन साल बाद भी नहीं हो पा रहा है। इसके बावजूद निजी अस्पतालों की ओर से मरीज का उपचार कर दिया जाता है।
सुविधा को कराया जा रहा उपलब्ध : सीएमओ
सीएमओ डॉ. सुमन कोहली ने बताया कि अस्पताल के पास जितनी सुविधाएं हैं वो सब मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। अस्पताल में चिकित्सक लगातार ओपीडी कर रहे हैं और जो सर्जरी के केस हैं प्रतिदिन की तरह उन्हें निपटाया जा रहा है।