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हादसे से महज आठ मिनट पहले गुजरी थी पैसेंजर गाड़ी

Wed, 25 Nov 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद Updated Wed, 25 Nov 2015 12:33 AM IST
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बरसोला में दिल्ली भटिंडा सैक्शन पर एक बड़ा हादसा होने से टल गया। सांड व गाय का झुंड मालगाड़ी की चपेट में आने से महज आठ मिनट पहले ही यात्री गाड़ी इसी रास्ते से निकली थी, लेकिन गनीमत यह रही कि गायों का झुंड इस ट्रेन के आगे नहीं आया। अगर यात्री गाड़ी के आगे गायों का झुंड आ जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। मालगाड़ी का हादसा 3:43 बजे हुआ। जबकि लगभग आठ मिनट पहले 03.35 बजे जींद से फिरोजपुर की तरफ जाने वाली पैसेंजर गाड़ी 54045 हादसे के स्थान से निकली थी। अगर मालगाड़ी की जगह यात्री गाड़ी होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। शहर में घूम रहे आवारा सांड व बेसहारा आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। वहीं दूसरों की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मालगाड़ी के आगे जब सांडों का झुंड आया उस समय ट्रेन की रफ्तार 73 किलोमीटर प्रति घंटा की थी और अचानक रेलगाड़ी के आगे गायों का झुंड को देखकर चालक ने लंबा हॉर्न भी दिया, इसमें कुछ गाय तो पटरी से नीचे उतर गई, जबकि पांच सांड तथा एक गाय इस दौरान ट्रेन की चपेट में आ गए। गाय व सांड इस दौरान ट्रेन व पटरी के बीच में फंस गए, लेकिन ट्रेन इस दौरान सांडों को 890 मीटर तक घसीटते हुए बरसोला रेलवे स्टेशन की तरफ चलती रही। लेकिन इस दौरान इंजन के साथ लगते दो डिब्बे पटरी से उतर गए और उसके बाद ट्रेन रुक पाई। दो डिब्बे उसे उतरने के बाद इस रास्ते से निकलने वाले आधा दर्जन अप व डाउन ट्रेन प्रभावित हो गई और अपने निर्धारित समय से काफी देरी से चली। इससे पहले भी आवारा सांडों की वजह से हादसे हो चुके हैं।
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जिला प्रशासन गंभीर नहीं
गत वर्ष जुलाना में भी इस तरह की घटना घटी थी। उस समय भी मालगाड़ी की चपेट में आने से तीन सांडों की मौत हुई थी। शहर में आए दिन आवारा सांडों की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं। इन दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। सामाजिक संस्थाओं द्वारा जन अदालत से लेकर हाईकोर्ट में भी केस डाला गया है। इसके बावजूद जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। शहर में सामाजिक संस्थाओं व नगर परिषद द्वारा अभियान चलाए जाने के बावजूद आए आवारा सांडों व बेसहारा गायों की तादाद बढ़ रही है।
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हादसे में ये गवां चुके हैं अपनी जान
24 अक्टूबर 2010 की रात डॉ. अश्विनी शर्मा अपनी कार में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान सामान्य अस्पताल के पास सड़क पर अचानक गाय आ गई और डॉ. अश्विनी शर्मा ने गाय को बचाने के लिए जैसे ही गाड़ी को सड़क के दूसरी तरफ टर्न किया, तो सामने से आ रहे कैंटर ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। इस हादसे में डॉ. अश्विनी शर्मा की जान चली गई। इसी वर्ष जुलाना के पास आवारा सांड के साथ गाड़ी दुर्घनाग्रस्त होने से अर्बन एस्टेट निवासी एडवोकेट कमल गोस्वामी की मौत हुई। करीब एक साल पहले शहर के बीड़बड़ा वन के पास गाय के साथ टैंपो की टक्कर में टैंपो चालक की मौत हो गई थी।
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विधायक भी बन चुके हैं सांडों की धींगा-मस्ती का शिकार
शहर की सड़कों पर बेसहारा घूम रहे सांडों की धींगा-मस्ती का शिकार जींद के इनेलो विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा भी हो चुके हैं। सांडों की लड़ाई के दौरान चपेट में आने के कारण इनेलो विधायक को बहुत ज्यादा चोटें आई थी। काफी लंबे उपचार के बाद विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा इस चोट से उभर पाए थे।

नहीं बना गौअभ्यारण
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सात-आठ माह पहले जींद में गौ अभ्यारण बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। आवारा सांडो व बेसहारा गायों की वजह से पहले भी दुर्घटनाएं घटी हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ है। ठंड बढने के साथ धुंध शुरु हो जाएगी, जिससे यह समस्या और बढ़ेगी।
हितेश ढांडा, अन्ना टीम सदस्य।

प्रत्येक जिले में बाड़ा बनाने का है प्रावधान
प्रत्येक जिले में एक बाड़ा होने का प्रावधान है, जिसमें आवारा पशुओं को रोका जा सके। सिवाय पानीपत के प्रदेश में कहीं भी बाड़ा नहीं है। जन अदालत में केस डालने पर गत वर्ष नगर परिषद ने बाड़ा बनाने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव तो भेजा था, लेकिन अब तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया है। आवारा घूम रहे पशुओं की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं तो हो ही रही हैं, साथ ही पशु भी दुर्घटनाग्रस्त होकर मर रहे हैं।

विनोद बंसल, एडवोकेट

आवारा पशुओं को गौशालाओं में छोड़ा जाए
इस समस्या के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम जनता भी जिम्मेदार है। आजकल काफी घरों में बुजुर्गों को ही दुत्कार दिया जाता है। सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिएं। जिला प्रशासन को गौशालाओं में इन पशुओं को छोडने का प्रबंध करना चाहिए। प्रत्येक पशु को टैग करना चाहिए, ताकि इनकी संख्या का पता लगाया जा सके।
कर्मबीर दुहन, प्रधान
जन संघर्ष समिति, जींद।
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