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सरकार की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार पर भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी : एंजेल
Sat, 01 Aug 2026 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 01 Aug 2026 11:59 PM IST
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फोटो 01जेएनडी01-जुड़वा बहनें एंजेल और सोफी।
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। 16 वर्ष की उम्र में लंदन में छात्र संघ चुनाव जीत चुकीं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं पानीपत की जुड़वां बहनों ने जींद के मीडिया सेंटर में शनिवार को जेन-जी को लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने का संदेश दिया। हाउस ऑफ लाड्र्स में भारत का पक्ष रख चुकीं एंजेल ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार है लेकिन किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग उचित नहीं है। वह जींद में अपने रिश्तेदार के घर आई थीं।
दोनों बहनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विद्यार्थियों से संवाद कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं। 15 वर्ष की उम्र में 12वीं पास करने वाली एंजेल और सोफी एसीपी नरेश अहलावत और आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अलका अहलावत की जुड़वां बेटियां हैं। वे 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम चली गई थीं। फिलहाल दोनों बहने हरियाणा आई हुई हैं। एंजेल अहलावत ने यनिवर्सिटी ऑफ सरे में क्रिमिनोलॉजी विद फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन की पढ़ाई के दौरान मात्र 16 वर्ष की उम्र में स्टूडेंट्स यूनियन की सोसाइटीज चेयर का चुनाव भी जीता है।
उन्होंने चीन, यूरोप सहित कई देशों के उम्मीदवारों को करीब 800 वोटों के अंतर से हराया था। इस पद पर रहते हुए वह करीब 16 हजार छात्रों और 150 से अधिक छात्र सोसाइटियों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। एंजेल यूके संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भारत का पक्ष रख चुकी हैं। वह इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन यूके की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं। भारत-यूके शैक्षणिक सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
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एंजल की जुड़वा बहन सोफी अहलावत लंदन में एयरो स्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। उनका चयन इसरो के आजादी सेट-2 कार्यक्रम के लिए हुआ है। वह इंडो-जर्मन इंटरनेशनल कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं।
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जींद। 16 वर्ष की उम्र में लंदन में छात्र संघ चुनाव जीत चुकीं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं पानीपत की जुड़वां बहनों ने जींद के मीडिया सेंटर में शनिवार को जेन-जी को लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने का संदेश दिया। हाउस ऑफ लाड्र्स में भारत का पक्ष रख चुकीं एंजेल ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार है लेकिन किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग उचित नहीं है। वह जींद में अपने रिश्तेदार के घर आई थीं।
दोनों बहनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विद्यार्थियों से संवाद कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं। 15 वर्ष की उम्र में 12वीं पास करने वाली एंजेल और सोफी एसीपी नरेश अहलावत और आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अलका अहलावत की जुड़वां बेटियां हैं। वे 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम चली गई थीं। फिलहाल दोनों बहने हरियाणा आई हुई हैं। एंजेल अहलावत ने यनिवर्सिटी ऑफ सरे में क्रिमिनोलॉजी विद फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन की पढ़ाई के दौरान मात्र 16 वर्ष की उम्र में स्टूडेंट्स यूनियन की सोसाइटीज चेयर का चुनाव भी जीता है।
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उन्होंने चीन, यूरोप सहित कई देशों के उम्मीदवारों को करीब 800 वोटों के अंतर से हराया था। इस पद पर रहते हुए वह करीब 16 हजार छात्रों और 150 से अधिक छात्र सोसाइटियों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। एंजेल यूके संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भारत का पक्ष रख चुकी हैं। वह इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन यूके की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं। भारत-यूके शैक्षणिक सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
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एंजल की जुड़वा बहन सोफी अहलावत लंदन में एयरो स्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। उनका चयन इसरो के आजादी सेट-2 कार्यक्रम के लिए हुआ है। वह इंडो-जर्मन इंटरनेशनल कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं।