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अभिभावक बच्चों के साथ समय बिता कर जानें मन की बात : नीरज
Thu, 31 Jul 2025 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 31 Jul 2025 12:03 AM IST
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30जेएनडी06- माता चन्नन देवी आर्य कन्या गुरूकुल पिल्लूखड़ा में छात्राओं को परामदर्श देते नीरज। स
जींद। माता चन्नन देवी आर्य कन्या गुरूकुल पिल्लूखड़ा में छात्राओं और शिक्षकों के लिए लाइफ स्किल व अन्य सामाजिक विषयों को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार की अध्यक्षता प्राचार्य ज्योति छिब्बर ने की जबकि परामर्शदाता नीरज कुमार ने विशेषकर किशोरावस्था में मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाओं व अभिभावकों की सकारात्मक भूमिका के महत्व को लेकर जागरूक किया।
परामर्शदाता नीरज कुमार ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिता कर उनके मन की बात जाननी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा आगे चल कर कामयाब बने लेकिन सफलता के लिए सिर्फ स्कूल की पढ़ाई काफी नहीं होती। बच्चों को छोटी उम्र से ही कुछ ऐसी बातें सीखनी चाहिए जो उन्हें जिंदगी में आगे बढ़ने में मदद करें।
अभिभावक बच्चों को स्वयं से समस्या का हल करना सिखाएं ताकि बच्चे में हर परिस्थिति से निपटने के लिए आत्मविश्वास हो। इससे बच्चे की सोचने की क्षमता बढ़ती है। प्राचार्य ज्योति छिब्बर ने कहा कि बच्चे को सिखाएं कि वह अपने छोटे-छोटे काम खुद करें। इससे वह जिम्मेदारी लेना सीखता हैं और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनता है।
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छोटी उम्र में जो सीखा जाता है उसका असर पूरी जिंदगी रहता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करती है। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेना भटकाव को कम कर सकता है। ध्यान और योग तनाव कम करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में मदद करते हैं।
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परामर्शदाता नीरज कुमार ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिता कर उनके मन की बात जाननी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा आगे चल कर कामयाब बने लेकिन सफलता के लिए सिर्फ स्कूल की पढ़ाई काफी नहीं होती। बच्चों को छोटी उम्र से ही कुछ ऐसी बातें सीखनी चाहिए जो उन्हें जिंदगी में आगे बढ़ने में मदद करें।
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अभिभावक बच्चों को स्वयं से समस्या का हल करना सिखाएं ताकि बच्चे में हर परिस्थिति से निपटने के लिए आत्मविश्वास हो। इससे बच्चे की सोचने की क्षमता बढ़ती है। प्राचार्य ज्योति छिब्बर ने कहा कि बच्चे को सिखाएं कि वह अपने छोटे-छोटे काम खुद करें। इससे वह जिम्मेदारी लेना सीखता हैं और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनता है।
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छोटी उम्र में जो सीखा जाता है उसका असर पूरी जिंदगी रहता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करती है। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेना भटकाव को कम कर सकता है। ध्यान और योग तनाव कम करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में मदद करते हैं।