पिल्लूखेड़ा। मांडी खुर्द में एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन आत्मा स्कीम के तहत किया गया। इसमें किसानों को धान की कटाई के बाद पराली के प्रबंध के बारे में बताया गया। शिविर में खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र ने किसानों को बताया कि पराली जलाने से कार्बन डाईआक्साइड व मिथेन जैसी जहरीली गैस निकलती हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
उन्होंने बताया कि पराली के जलाने से वातावरण दूषित होता है। साथ मेें सांस लेने में भी कठिनाई आती है। पराली के जलाने से भूमि के आवश्यक तत्व व लाभकारी जीवाणु भी जलकर नष्ट हो जाते हैं और साथ में जमीन भी बंजर हो जाती है। डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि किसान पराली को जलाए नहीं, बल्कि मल्चर चौपर और पल्टू हल जैसे कृषि यंत्रों से मिट्टी में मिला दें। इसके अलावा पराली की बेलर से गांठे बनाकर बेच सकते हैं। जिसके लिए कृषि विभाग एक हजार रुपये प्रति एकड़ गांठें बनवाने के लिए किसानों की मदद करेगा। इसके लिए किसान विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो किसान मेरी फसल- मेरा ब्योरा के तहत अपनी फसल का पंजीकरण नहीं करवा पाए, वह 3 अक्तूबर तक करवा सकते हैं। बीटीएम अनीश कुमार ने किसानों को बताया कि धान में पत्ता लपेट सूंडी का प्रकोप है। इसके लिए किसान 200 मिली मोनोक्रोटोफास नामक दवा 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इस अवसर पर रघबीर, डिंपल एटीएम, सुरेंद्र, विशेष कुमार कृषि सुपरावाइजर, सुनील, कुलदीप, बंसीलाल, राजा, मदन मौजूद रहे।