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मानसून सिर पर, पानी निकासी की व्यवस्था नहीं
jind
Updated Fri, 17 Jun 2016 12:18 AM IST
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नाला बंद होने के कारण गली में आया गंदा पानी
- फोटो : bureau
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मानसून दस्तक दे रहा है और शहर के बरसाती पानी निकासी के नाले गंदगी से पटे पड़े हैं। इस हाल में यदि बारिश हुई तो शहर जलमग्न हो सकता है। बेशक इस बार अधिक बारिश का अनुमान है, लेकिन शहर में बरसाती पानी निकासी के कोई इंतजाम नहीं हैं। अभी तक सरकारी अमला योजना बनाने में ही उलझा है। हर साल बारिश का सीजन शहर के लिए आफत लेकर आता है। आठ से दस एमएम बारिश में ही शहर के अधिकतर हिस्से जलमग्न हो जाते हैं। हालांकि अपने पंपसेट से जन स्वास्थ्य विभाग पानी की निकासी करता है, लेकिन इसमें बहुत देर हो जाती है। इसके बावजूद प्रशासन समय रहते काम शुरू करने की बजाए अभी तक योजना ही बना रहा है। शहर के बरसाती पानी निकासी के नालों की हालत देखकर यह कहा जा सकता है कि आने वाला बारिश का सीजन शहर पर भारी पड़ सकता है।
तीन विभागों में उलझा सफाई का मामला
शहर में बरसाती पानी निकासी के लिए मुख्य तौर पर नगर परिषद का काम है, लेकिन नगर परिषद के सारे नाले आखिरकार आकर सीवर लाइन में ही मिलते हैं। सीवर लाइन में पानी आने के बाद यह काम जन स्वास्थ्य विभाग का हो जाता है। इसमें सबसे बड़ा मामला मुख्य सड़कों के साथ बने नाले हैं। इन नालों का निर्माण बीएंडआर द्वारा करवाया गया है, लेकिन इनकी सफाई का जिम्मा कोई भी उठाने को तैयार नहीं है। यही नाले बरसाती पानी की निकासी में सबसे अधिक बाधक बनते हैं।
डेरियां बनीं आफत
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो शहर में बनी पशु डेरियां सीवरेज व्यवस्था के लिए आफत हैं। विशेषकर बारिश के दिनों में अधिकतर लोग गोबर को सीवरेज में ही बहा देते हैं, इससे सीवरेज चोक हो जाता है और सीवेज गलियों तक पर फैल जाता है।
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जन स्वास्थ्य विभाग का काम सीवरेज की सफाई का होता है इसके लिए विभाग तैयार है। सीवरेज की सफाई करवाई जा रही है। बरसात के मौसम को दखते हुए सभी बूस्टिंग स्टेशनों को ठीक किया गया है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास करीब 40 पंपसेट हैं, जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग भी किया जा सकता है।
- जगदेव मोर, एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग।
नगर परिषद के जितने भी नाले हैं, उनकी सफाई करवाई जा रही है। इसके अलावा जन स्वास्थ्य विभाग और बीएंडआर का काम बचता है। नगर परिषद के किसी भी नाले में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- नगर परिषद का काम
नगर परिषद क्षेत्र के अंदर आने वाले सभी नालों की सफाई का काम नगर परिषद का है। फिर भी इस बारे में एक-दो दिन में डीसी के साथ मीटिंग होनी है। वहां से जैसे आदेश मिलेंगे, उस पर कार्रवाई की जाएगी। यदि नालों की सफाई बीएंडआर को करवानी होगी तो तुरंत करवा दी जाएगी।
- केएल चोपड़ा, एसडीओ बीएंडआर
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तीन विभागों में उलझा सफाई का मामला
शहर में बरसाती पानी निकासी के लिए मुख्य तौर पर नगर परिषद का काम है, लेकिन नगर परिषद के सारे नाले आखिरकार आकर सीवर लाइन में ही मिलते हैं। सीवर लाइन में पानी आने के बाद यह काम जन स्वास्थ्य विभाग का हो जाता है। इसमें सबसे बड़ा मामला मुख्य सड़कों के साथ बने नाले हैं। इन नालों का निर्माण बीएंडआर द्वारा करवाया गया है, लेकिन इनकी सफाई का जिम्मा कोई भी उठाने को तैयार नहीं है। यही नाले बरसाती पानी की निकासी में सबसे अधिक बाधक बनते हैं।
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डेरियां बनीं आफत
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो शहर में बनी पशु डेरियां सीवरेज व्यवस्था के लिए आफत हैं। विशेषकर बारिश के दिनों में अधिकतर लोग गोबर को सीवरेज में ही बहा देते हैं, इससे सीवरेज चोक हो जाता है और सीवेज गलियों तक पर फैल जाता है।
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जन स्वास्थ्य विभाग का काम सीवरेज की सफाई का होता है इसके लिए विभाग तैयार है। सीवरेज की सफाई करवाई जा रही है। बरसात के मौसम को दखते हुए सभी बूस्टिंग स्टेशनों को ठीक किया गया है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास करीब 40 पंपसेट हैं, जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग भी किया जा सकता है।
- जगदेव मोर, एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग।
नगर परिषद के जितने भी नाले हैं, उनकी सफाई करवाई जा रही है। इसके अलावा जन स्वास्थ्य विभाग और बीएंडआर का काम बचता है। नगर परिषद के किसी भी नाले में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- नगर परिषद का काम
नगर परिषद क्षेत्र के अंदर आने वाले सभी नालों की सफाई का काम नगर परिषद का है। फिर भी इस बारे में एक-दो दिन में डीसी के साथ मीटिंग होनी है। वहां से जैसे आदेश मिलेंगे, उस पर कार्रवाई की जाएगी। यदि नालों की सफाई बीएंडआर को करवानी होगी तो तुरंत करवा दी जाएगी।
- केएल चोपड़ा, एसडीओ बीएंडआर