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बीरेंद्र सिंह गुट को हरा भाजपा समर्थित पूनम सैनी बनीं प्रधान

jind Updated Thu, 23 Jun 2016 12:37 AM IST
जीत के बाद खुशी मनाते विजयी प्रत्याशी
जीत के बाद खुशी मनाते विजयी प्रत्याशी - फोटो : bureau
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सांसद-विधायक को मीटिंग कक्ष में नहीं जाने को लेकर एक घंटे चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच भाजपा समर्थित पूनम सैनी ने बीरेंद्र सिंह गुट की सुदेश देवी को दो वोट से हराकर चेयरमैनी कब्जा ली। वहीं कांग्रेस समर्थित और नप के पूर्व चेयरमैन विनोद आशरी एक वोट से जीत कर उपप्रधान बने। सांसद और विधायक ने पीठासीन अधिकारी से शिकायत की बात कही है। इससे पहले पार्षदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। मंगलवार शाम तक नगर परिषद चेयरपर्सन का चुनाव टलने का अंदेशा बना हुआ था।
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बुधवार सुबह परिषद की सुरक्षा को देखकर ही स्पष्ट हो गया था कि चुनाव हर हाल में होगा। सुबह 10:00 बजे ही पार्षद मीटिंग कक्ष में पहुंचने शुरू हो गए। भाजपा समर्थित पूनम सैनी के समर्थक 18 पार्षद एक साथ यात्री बस से नगर परिषद पहुंचे। सूत्रों की मानें तो इन पार्षदों को हिसार भेजा गया था। मीटिंग में सबसे पहले नव निर्वाचित पार्षदों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलवाई गई। उसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। एसडीएम एवं रिटर्निंग अधिकारी योगेश कुमार ने बताया कि प्रधान पद के लिए हुए चुनाव में पूनम सैनी को 17 और उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुदेश रानी को 15 वोट मिले। एक वोट रद्द हो गया। 31 पार्षदों वाली जींद नगर परिषद में विधायक और सांसद का वोट शामिल होने के बाद 33 वोटों से नगर परिषद की चौधर का फैसला हुआ। उप प्रधान पद के लिए विनोद आशरी को 17 और उनके प्रतिद्वंद्वी सुभाष जांगड़ा को 16 मत मिले।

ऐसे  शुरू हुआ विवाद
मीटिंग का समय सुबह 10:00 बजे का निर्धारित था। पार्षदों को शपथ दिलवाने के बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का तर्क था कि मीटिंग शुरू होने के बाद कोई भी अंदर नहीं आ सकता। विधायक ने कहा कि उन्हें जो पत्र भेजा गया है, उसमें शाम चार बजे तक मीटिंग का समय बताया गया है। ऐसे में वे किसी भी समय अपना वोट डालने आ सकते हैं। इसके बाद विधायक के बेटे डा. कृष्ण मिढ़ा ने डीसी विनय सिंह से बात की। डीसी ने उन्हें फोन पर कहा कि वे डीएसपी को बोलें की वो उनसे बात करें इसके बावजूद भी बात नहीं बनी।

बीरेंद्र सिंह से नजदीकी भी नहीं जिता सकी
सुदेश देवी को केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह की नजदीकी भी चुनाव नहीं जिता पाई। सुदेश देवी, सोमबीर पहलवान के भाई की पत्नी हैं। पहलवान जींद में केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के खास लोगों में शामिल हैं। साथ ही सुदेश देवी को जिलाने के लिए केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी और उचाना कलां से विधायक प्रेमलता ने भी तीन दिन पहले पार्षदों के साथ मीटिंग की थी। उस समय भी विधायक प्रेमलता ने 15 पार्षदों का समर्थन सुदेश देवी के साथ होने का दावा किया था। हालांकि उनका दावा सही निकला लेकिन सुदेश देवी चुनाव हार गईं।

ये रहा गणित
कुल वोट        33
प्रधान
पूनम सैनी        17
सुदेश देवी        15
रद्द        1
उपप्रधान
विनोद आशरी        17
सुभाष जांगड़ा        16


हर घर का विकास प्राथमिकता
जींद शहर की सफाई व्यवस्था और सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करवाना नगर परिषद की प्राथमिकता रहेगी। शहर के विकास को लेकर कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जाएगी। हर घर के विकास के लिए प्रयास किया जाएगा। - पूनम सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद, जींद

मीटिंग कक्ष में जाने से रोका
तो विधायक ने दिया धरना
जींद। नगर परिषद प्रधान और उपप्रधान चुनाव के दौरान सांसद और विधायक को मीटिंग रूम में रोके जाने पर हंगामे की स्थिति हो गई। पहले विधायक डा. हरिचंद मिढा आए तो उन्हें मीटिंग कक्ष में जाने से रोक दिया गया। कुछ पार्षदों ने एसडीएम सेे विधायक को अंदर लाने की अपील की। उन्होंने इससे साफ इन्कार कर दिया। विरोध में विधायक ने मीटिंग कक्ष के बाहर ही धरना शुरू कर दिया। यहां मौजूद पुलिस ने कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को मीटिंग कक्ष से दूर जाने को कहा। विधायक के करीब 10 मिनट तक धरने पर बैठने के बाद सोनीपत सांसद रमेश कौशिक भी पहुंचे। कौशिक ने अधिकारियों से बात कर भीतर जाने का प्रयास किया लेकिन उन्हें भी रोक दिया गया। सांसद ने मीटिंग कक्ष के बाहर से ही डीसी विनय सिंह को फोन पर जानकारी दी। फोन पर ही डीसी के आश्वासन के बावजूद विधायक और सांसद की मीटिंग रूम में एंट्री नहीं हो पाई। सांसद और विधायक नप कार्यकारी अधिकारी के कक्ष में बैठ गए और फिर से डीसी से बात की। इसके बाद डीसी ने स्वयं नप पहुंचने की बात कही। एक घंटे के हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद डीसी ने दोनों नेताओं को मीटिंग कक्ष में भेजा।

निर्वाचन अधिकारी की करेंगे शिकायत
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद रमेश कौशिक और विधायक डा. हरिचंद मिढा ने कहा कि मामला गंभीर है। उनका वोट का अधिकार है और उन्हें इससे महरूम रखने का प्रयास किया गया। इसकी शिकायत सरकार को की जाएगी। सांसद रमेश कौशिक ने तो इसे निर्वाचन अधिकारी की बेहूदगी तक कह दिया।

सूचना मिलने के बाद बुलाया
जिस समय विधायक और सांसद यहां पहुंचे मीटिंग की कार्रवाई शुरू हो चुकी थी। ऐसे में एक बार बाहर आवाज लगाई गई थी, लेकिन किसी के भी बाहर नहीं होने के बाद ही गेट बंद किया गया। जैसे ही सांसद और विधायक के पहुंचने की सूचना मिली, उन्हें अंदर बुला लिया गया।
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