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मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य को नई दिशा प्रदान की : डॉ. कपिल
Fri, 01 Aug 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:06 AM IST
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31जेएनडी02- धागा मिल कॉलोनी स्थित मजदूर भवन में आयोजित सेमिनार में भाग लेते सदस्य। स्रोत : सदस्
जींद। धागा मिल कॉलोनी स्थित मजदूर भवन में मुंशी प्रेमचंद की जयंती, शहीद उधम सिंह के शहीदी दिवस व मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सेमिनार व कविता पाठ का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता जलेस के संरक्षक पूर्व प्राचार्य धर्मपाल पांचाल, ज्ञान विज्ञान समिति के जिलाध्यक्ष सोहनदास ने की। मंच का संचालन मंगतराम शास्त्री ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत संगीत के प्राध्यापक चमन लाल और आदर्श कुमार ने मोहम्मद रफी का गीत गाकर की। प्रेमचंद के साहित्य में जनपक्षीय स्वर विषय पर डॉ. कपिल भारद्वाज ने वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उनकी साहित्य यात्रा उर्दू से शुरू होती है। तब वे धनपत राय व नवाब राय नाम से लिखते थे।। उनकी पुस्तक सोजे वतन को अंग्रेजी शासन ने जब्त कर ली थी। बाद में हिंदी भाषा में लिखना शुरू किया।
मुंशी प्रेमचंद उपन्यास सम्राट के साथ ही बहुत साहसी साहित्यकार भी थे। डॉ. सुधीर नैन ने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड का उधम सिंह के बाल मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिसका इंग्लैंड में जाकर 1940 में गवर्नर जनरल माइकल डायर को मारकर उसका बदला लिया। उन्होंने साबित कर दिया कि दुनिया के किसी बड़े से बड़े ताकतवर को भी हराया जा सकता है।
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उधम सिंह सामाजिक सद्भावना के प्रतीक थे। इस अवसर पर रमेश भनवाला, राजकुमार श्योकंद, बलवान क्रांतिकारी, कामरेड कपूर सिंह, अशोक खर्ब, धर्मबीर ललितखेड़ा, जसपाल, शमशेर गांगोली, आजाद पांचाल, डॉक्टर मुरारी लाल, अनिल, वेद प्रकाश और पवन भी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत संगीत के प्राध्यापक चमन लाल और आदर्श कुमार ने मोहम्मद रफी का गीत गाकर की। प्रेमचंद के साहित्य में जनपक्षीय स्वर विषय पर डॉ. कपिल भारद्वाज ने वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उनकी साहित्य यात्रा उर्दू से शुरू होती है। तब वे धनपत राय व नवाब राय नाम से लिखते थे।। उनकी पुस्तक सोजे वतन को अंग्रेजी शासन ने जब्त कर ली थी। बाद में हिंदी भाषा में लिखना शुरू किया।
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मुंशी प्रेमचंद उपन्यास सम्राट के साथ ही बहुत साहसी साहित्यकार भी थे। डॉ. सुधीर नैन ने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड का उधम सिंह के बाल मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिसका इंग्लैंड में जाकर 1940 में गवर्नर जनरल माइकल डायर को मारकर उसका बदला लिया। उन्होंने साबित कर दिया कि दुनिया के किसी बड़े से बड़े ताकतवर को भी हराया जा सकता है।
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उधम सिंह सामाजिक सद्भावना के प्रतीक थे। इस अवसर पर रमेश भनवाला, राजकुमार श्योकंद, बलवान क्रांतिकारी, कामरेड कपूर सिंह, अशोक खर्ब, धर्मबीर ललितखेड़ा, जसपाल, शमशेर गांगोली, आजाद पांचाल, डॉक्टर मुरारी लाल, अनिल, वेद प्रकाश और पवन भी मौजूद रहे।