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सालभर चले आंदोलन में जींद के तीन लाख से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
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सरकार के साथ मांगों पर सहमति बनने पर खटकड़ टोल पर खुशी का इजहार करते किसान। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। एक साल तक दिल्ली की सीमाओं पर धरना देकर किसान अब घर लौटने की तैयारी में हैं। सालभर चले किसान आंदोलन में जींद जिले के लोगों की खास भूमिका रही। किसान नेताओं की माने तो एक साल में जिले से करीब तीन लाख से अधिक लोगों ने दिल्ली सीमाओं पर अपनी हाजिरी लगाई। वहीं 28 जनवरी को टिकैत के आंसुओं के बाद जिले के कंडेला गांव में सबसे पहला जाम लगा था। इसी रात को ही किसानों के जत्थे दिल्ली के लिए रवाना हुए। इससे किसान आंदोलन को नई मजबूती मिली और आंदोलन का माहौल बदल गया। ऐसे में जींद जिले की आंदोलन में खास भूमिका रही।
जींद जिला पंजाब व दिल्ली के बीच पुल का काम करता रहा। जींद के नरवाना की सीमा पंजाब से मिलती है। ऐसे में पिछले साल 26 नवंबर को पंजाब के किसानों ने इसी रास्ते से दिल्ली के लिए कूच किया। हालांकि हरियाणा पुलिस ने किसानों को पंजाब सीमा पर रोक रखा था, लेकिन जींद कि किसानों ने साथ देते हुए रास्ता खुलवाने में मदद की। इसके बाद हर मोड़ पर जींद के किसान आंदोलन में आगे रहे।
200 से अधिक किसानों पर मुकदमे दर्ज
एक साल तक चले किसान आंदोलन में जिले में भाजपा व जजपा नेताओं का विरोध जारी रहा। इस दौरान 200 से अधिक किसानों पर मुकदमे दर्ज हुए। इसके बावजूद किसानों ने अंतिम समय तक विरोध जारी रखा।
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जिले के 12 किसानों की गई जान
खटकड़ टोल प्लाजा कमेटी के उपलब्ध कराए नामों के अनुसार आंदोलन के दौरान जिले के 12 किसानों की मौत हुई। इनमें हंसडेहर गांव निवासी 38 वर्षीय किसान रलूद, उझाना गांव निवासी 60 वर्षीय किसान किताब सिंह चहल व 55 वर्षीय इंद्र सिंहमार, जुलाना के किसान देवेंद्र, नरवाना के सिंगवाल के कर्मवीर, ईंटल कलां निवासी 60 वर्षीय किसान जगबीर सिंह, डाहौला गांव निवासी 25 वर्षीय किसान पवन, ढिंढोली गांव निवासी राधा, शाहपुर गांव कर्ण सिंह, चुहड़पुर गांव निवासी, रोशन सिंह, खटकड़ गांव पालाराम, छापड़ा गांव निवासी रणधीर शामिल हैं।
एक साल तक अपने विधानसभा क्षेत्र में नहीं आ पाए उपमुख्यमंत्री
जींद में खाप पंचायतों का काफी प्रभाव माना जाता है। ऐसे में जब संयुक्त किसान मोर्चा ने गांवों में भाजपा व जजपा के नेताओं व सरकार के मंत्रियों का विरोध करने का ऐलान किया तो खाप पंचायतों ने भी साथ दिया। इसका असर यह हुआ कि एक साल तक उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला अपने विधानसभा क्षेत्र उचाना में कार्यक्रम नहीं कर पाए।
हर गांव से चंदा, हर गांव से हाजिरी
किसान आंदोलन में जींद जिले के हर गांव से लोगों को हाजिरी रही और हर गांव से चंदा जुटाकर आंदोलन को मदद की गई। इसके अलावा उझाना गांव से हर दूसरे दिन 2500 लीटर व धमतान साहिब गांव से हर दूसरे दिन दो हजार लीटर दूध दिल्ली सीमा पर पहुंचाया गया।
जींद में लगा पहला लंगर
जब पंजाब के किसान नरवाना के रास्ते दिल्ली की ओर बढ़े तो 27 नवंबर को जुलाना के आसपास काफी संख्या में किसानों ने डेरा डाला था। ऐसे में जुलाना क्षेत्र के किसानों ने किसानों के लिए अगले ही दिन 28 नवंबर को लंगर शुरू कर दिया। इसके बाद चीनी मिल के पास भी लंगर शुरू किया गया।
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जींद जिला पंजाब व दिल्ली के बीच पुल का काम करता रहा। जींद के नरवाना की सीमा पंजाब से मिलती है। ऐसे में पिछले साल 26 नवंबर को पंजाब के किसानों ने इसी रास्ते से दिल्ली के लिए कूच किया। हालांकि हरियाणा पुलिस ने किसानों को पंजाब सीमा पर रोक रखा था, लेकिन जींद कि किसानों ने साथ देते हुए रास्ता खुलवाने में मदद की। इसके बाद हर मोड़ पर जींद के किसान आंदोलन में आगे रहे।
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200 से अधिक किसानों पर मुकदमे दर्ज
एक साल तक चले किसान आंदोलन में जिले में भाजपा व जजपा नेताओं का विरोध जारी रहा। इस दौरान 200 से अधिक किसानों पर मुकदमे दर्ज हुए। इसके बावजूद किसानों ने अंतिम समय तक विरोध जारी रखा।
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जिले के 12 किसानों की गई जान
खटकड़ टोल प्लाजा कमेटी के उपलब्ध कराए नामों के अनुसार आंदोलन के दौरान जिले के 12 किसानों की मौत हुई। इनमें हंसडेहर गांव निवासी 38 वर्षीय किसान रलूद, उझाना गांव निवासी 60 वर्षीय किसान किताब सिंह चहल व 55 वर्षीय इंद्र सिंहमार, जुलाना के किसान देवेंद्र, नरवाना के सिंगवाल के कर्मवीर, ईंटल कलां निवासी 60 वर्षीय किसान जगबीर सिंह, डाहौला गांव निवासी 25 वर्षीय किसान पवन, ढिंढोली गांव निवासी राधा, शाहपुर गांव कर्ण सिंह, चुहड़पुर गांव निवासी, रोशन सिंह, खटकड़ गांव पालाराम, छापड़ा गांव निवासी रणधीर शामिल हैं।
एक साल तक अपने विधानसभा क्षेत्र में नहीं आ पाए उपमुख्यमंत्री
जींद में खाप पंचायतों का काफी प्रभाव माना जाता है। ऐसे में जब संयुक्त किसान मोर्चा ने गांवों में भाजपा व जजपा के नेताओं व सरकार के मंत्रियों का विरोध करने का ऐलान किया तो खाप पंचायतों ने भी साथ दिया। इसका असर यह हुआ कि एक साल तक उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला अपने विधानसभा क्षेत्र उचाना में कार्यक्रम नहीं कर पाए।
हर गांव से चंदा, हर गांव से हाजिरी
किसान आंदोलन में जींद जिले के हर गांव से लोगों को हाजिरी रही और हर गांव से चंदा जुटाकर आंदोलन को मदद की गई। इसके अलावा उझाना गांव से हर दूसरे दिन 2500 लीटर व धमतान साहिब गांव से हर दूसरे दिन दो हजार लीटर दूध दिल्ली सीमा पर पहुंचाया गया।
जींद में लगा पहला लंगर
जब पंजाब के किसान नरवाना के रास्ते दिल्ली की ओर बढ़े तो 27 नवंबर को जुलाना के आसपास काफी संख्या में किसानों ने डेरा डाला था। ऐसे में जुलाना क्षेत्र के किसानों ने किसानों के लिए अगले ही दिन 28 नवंबर को लंगर शुरू कर दिया। इसके बाद चीनी मिल के पास भी लंगर शुरू किया गया।