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Jind News: मोबाइल की लत से याददाश्त होती है कमजोर
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25जेएनडी19-सीआरएसयू में मोबाइल फोन के ज्यादा प्रयोग के नुकसान बताते हुए नरेश जागलान। स्रोत विवि
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन विभाग के स्टूडेंट इंडक्शन प्रोग्राम के छठे दिन सोमवार को वरिष्ठ मनोचिकित्सक नरेश जागलान और पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने शिरकत की।
नरेश जागलान ने आज के युवाओं में मोबाइल की लत से होने वाले दुष्प्रभाव एवं उसे छोड़ने के उपाय के बारे में चर्चा की। मोबाइल की लत से व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशानियां होती हैं। उससे उसकी याददाश्त भी कमजोर होती है। आज 78 प्रतिशत व्यक्ति कभी भी अपना मोबाइल स्विच ऑफ नहीं होने देते। 81 प्रतिशत लोग सुबह उठते ही सबसे पहले अपना मोबाइल देखते हैं एवं शत प्रतिशत लोग अपने मोबाइल के लगभग 83 प्रतिशत एप का कभी इस्तेमाल ही नहीं करते।
मोबाइल की लत का सबसे अधिक नुकसान आंखों एवं दिमाग पर होता है। यदि हम पांच-छह घंटे मोबाइल फोन पर रहते हैं तो अपने जीवन के लगभग 15 वर्ष हम मोबाइल के ऊपर ही बर्बाद कर देते हैं, जिसका की कोई भी लाभ नहीं होता है। वह हमें मानसिक रूप से बीमार कर जाता है।
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उन्होंने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार विश्व में लगभग 500 करोड़ व्यक्ति मोबाइल के कारण मानसिक रूप से बीमार चल रहे हैं। 500 वर्षों में मुस्लिम लोगों ने 200 वर्षों में अंग्रेजी लोगों ने एवं 25 वर्षों में टीवी ने बच्चों, युवाओं एवं समाज का इतना नुकसान नहीं किया। जितना कि पिछले पांच वर्ष में मोबाइल ने कर दिया है।
मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से केवल मानसिक एवं शारीरिक बीमारियां ही नहीं होती, अपितु नैतिक मूल्यों में भी बहुत भारी गिरावट देखने को मिल रही है। मोबाइल की आदत से छुटकारा पाने के लिए हमें परिवार में बैठकर आपस में बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें सप्ताह में एक दिन मोबाइल का उपवास रखना चाहिए। दूसरे सत्र में डॉ. अनिल कुमार ने विद्यार्थियों को लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह नियमित रूप से लाइब्रेरी में आए।
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नरेश जागलान ने आज के युवाओं में मोबाइल की लत से होने वाले दुष्प्रभाव एवं उसे छोड़ने के उपाय के बारे में चर्चा की। मोबाइल की लत से व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशानियां होती हैं। उससे उसकी याददाश्त भी कमजोर होती है। आज 78 प्रतिशत व्यक्ति कभी भी अपना मोबाइल स्विच ऑफ नहीं होने देते। 81 प्रतिशत लोग सुबह उठते ही सबसे पहले अपना मोबाइल देखते हैं एवं शत प्रतिशत लोग अपने मोबाइल के लगभग 83 प्रतिशत एप का कभी इस्तेमाल ही नहीं करते।
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मोबाइल की लत का सबसे अधिक नुकसान आंखों एवं दिमाग पर होता है। यदि हम पांच-छह घंटे मोबाइल फोन पर रहते हैं तो अपने जीवन के लगभग 15 वर्ष हम मोबाइल के ऊपर ही बर्बाद कर देते हैं, जिसका की कोई भी लाभ नहीं होता है। वह हमें मानसिक रूप से बीमार कर जाता है।
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उन्होंने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार विश्व में लगभग 500 करोड़ व्यक्ति मोबाइल के कारण मानसिक रूप से बीमार चल रहे हैं। 500 वर्षों में मुस्लिम लोगों ने 200 वर्षों में अंग्रेजी लोगों ने एवं 25 वर्षों में टीवी ने बच्चों, युवाओं एवं समाज का इतना नुकसान नहीं किया। जितना कि पिछले पांच वर्ष में मोबाइल ने कर दिया है।
मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से केवल मानसिक एवं शारीरिक बीमारियां ही नहीं होती, अपितु नैतिक मूल्यों में भी बहुत भारी गिरावट देखने को मिल रही है। मोबाइल की आदत से छुटकारा पाने के लिए हमें परिवार में बैठकर आपस में बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें सप्ताह में एक दिन मोबाइल का उपवास रखना चाहिए। दूसरे सत्र में डॉ. अनिल कुमार ने विद्यार्थियों को लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह नियमित रूप से लाइब्रेरी में आए।