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Jind News: मनरेगा मजदूरों ने प्रदर्शन कर किया हाईवे जाम
Fri, 19 Jan 2024 10:58 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 19 Jan 2024 10:58 PM IST
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19जेएनडी33-मांगों को लेकर लघु सचिवालय के बाहर हाईवे जाम करते मनरेगा मजदूर। संवाद
नरवाना। 600 रुपये मजदूरी करने की मांग को लेकर शुक्रवार को मनरेगा मेट मजदूर समिति के बैनर तले मजदूरों ने कपास मंडी में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद वह प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और वहां तहसीलदार निखिल सिंगला को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने से पहले वह लघु सचिवालय के बाहर जमा हो गए और दिल्ली-संगरूर नेशनल हाईवे जाम कर दिया। जाम लगभग आधा घंटा लगा रहा। इससे हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी लाइन लग गई।
शुक्रवार को जिलाभर के मनरेगा मजदूर मनरेगा मेट मजदूर समिति के बैनर तले समुंद्र दनौदा की अध्यक्षता में कपास मंडी में जुटे। इस दौरान पूर्व सरपंच रामबाज, कृष्ण माजरा, अन्नदाता कि सान यूनियन के गुरमुख सिंह विर्क, जगत राम और सतबीर सिंह ने कहा कि पिछले तीन-चार महीने से मनरेगा मेट मजदूर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा पंचकूला में भी धरना चल रहा है। उनकी मांग है कि मनरेगा मेट को मासिक वेतन दिया जाए। मजदूरों की मजदूरी 600 रुपये की जाए और पूरा साल मजदूरी दिलाई जाए। इसके अलावा मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की बीमा राशि 25 हजार से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की जाए। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार देश और प्रदेश में महंगाई बड़ी है, उसी प्रकार से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी भी बढ़ाई जानी चाहिए। आज मंत्री, विधायक, कर्मचारी, आंगनबाड़ी और आशा वर्कर तथा गांव के चौकीदारों का भी महंगाई भत्ता बढ़ा है, लेकिन मजदूर की तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। सरकार एक तरफ तो कहती है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान करना चाहते हैं। दूसरी तरफ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति पिछले चार महीने से अपनी मजदूरी बढ़वाने के लिए सड़कों पर है। इससे साफ जाहिर है कि सरकार का अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का नारा जो था वह कहीं न कहीं फ्लॉप दिखाई दे रहा है। सरकारी स्कूलों में ज्यादातर मजदूरों के बच्चे पढ़ते हैं लेकिन सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है। इससे साफ जाहिर है कि आने वाले समय में सरकार गरीबों के बच्चों को पढ़ाई से भी वंचित करना चाहती है। मजदूरों ने कहा कि या तो समय रहते सरकार मजदूरों की तरफ ध्यान दे, नहीं तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मनरेगा मेट मजदूर वोट से भाजपा को उखाड़ फेंकने का काम करेगा।
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शुक्रवार को जिलाभर के मनरेगा मजदूर मनरेगा मेट मजदूर समिति के बैनर तले समुंद्र दनौदा की अध्यक्षता में कपास मंडी में जुटे। इस दौरान पूर्व सरपंच रामबाज, कृष्ण माजरा, अन्नदाता कि सान यूनियन के गुरमुख सिंह विर्क, जगत राम और सतबीर सिंह ने कहा कि पिछले तीन-चार महीने से मनरेगा मेट मजदूर अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा पंचकूला में भी धरना चल रहा है। उनकी मांग है कि मनरेगा मेट को मासिक वेतन दिया जाए। मजदूरों की मजदूरी 600 रुपये की जाए और पूरा साल मजदूरी दिलाई जाए। इसके अलावा मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की बीमा राशि 25 हजार से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की जाए। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार देश और प्रदेश में महंगाई बड़ी है, उसी प्रकार से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी भी बढ़ाई जानी चाहिए। आज मंत्री, विधायक, कर्मचारी, आंगनबाड़ी और आशा वर्कर तथा गांव के चौकीदारों का भी महंगाई भत्ता बढ़ा है, लेकिन मजदूर की तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। सरकार एक तरफ तो कहती है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान करना चाहते हैं। दूसरी तरफ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति पिछले चार महीने से अपनी मजदूरी बढ़वाने के लिए सड़कों पर है। इससे साफ जाहिर है कि सरकार का अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का नारा जो था वह कहीं न कहीं फ्लॉप दिखाई दे रहा है। सरकारी स्कूलों में ज्यादातर मजदूरों के बच्चे पढ़ते हैं लेकिन सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है। इससे साफ जाहिर है कि आने वाले समय में सरकार गरीबों के बच्चों को पढ़ाई से भी वंचित करना चाहती है। मजदूरों ने कहा कि या तो समय रहते सरकार मजदूरों की तरफ ध्यान दे, नहीं तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मनरेगा मेट मजदूर वोट से भाजपा को उखाड़ फेंकने का काम करेगा।
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19जेएनडी33-मांगों को लेकर लघु सचिवालय के बाहर हाईवे जाम करते मनरेगा मजदूर। संवाद
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