{"_id":"65bfc6a0d3a0a6b40404d724","slug":"meeting-held-regarding-nationwide-strike-of-16-jind-news-c-199-1-jnd1001-112553-2024-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: 16 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर हुई बैठक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: 16 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर हुई बैठक
Sun, 04 Feb 2024 10:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 04 Feb 2024 10:47 PM IST
विज्ञापन
04जेएनडी03: बैठक को संबोधित करते हुए सीटू जिला सचिव कपूर सिंह। संवाद
जींद। ट्रेड यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा की 16 फरवरी को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारियों को लेकर रविवार को धागा मिल कॉलोनी के मजदूर भवन में बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता सीटू जिला उपाध्यक्ष रमेश चंद्र ने और संचालन संदीप जाजवान ने किया।
सीटू जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि 16 फरवरी की ट्रेड यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ऐतिहासिक होगी। दो साल पहले 13 महीने चले ऐतिहासिक किसान आंदोलन के आगे केंद्र सरकार को घुटने टेकने पड़े थे। तीनों कृषि कानूनों को वापस करवाने में सफलता मिली थी। इस आंदोलन में मजदूरों और आम जनता का व्यापक समर्थन मिला था, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की कानूनी गारंटी, बिजली निजीकरण विधेयक की वापसी के मामले में जो वादे किए गए थे, उन पर केंद्र सरकार ने धोखा दे दिया। मजदूरों को गुलाम बनाने के लिए पारित चार लेबर कोड्स को भी सरकार वापस नहीं ले रही है। लखीमपुर खीरी कांड की साजिश रचने वाले मंत्री को पद से नहीं हटाया गया है। किसान का गन्ना, कपास, सरसों, धान, सब्जियां और अन्य फसलें लूटी जा रही हैं। इनके लागत खर्च बढ़ने और पूरे भाव न मिलने से काश्तकारों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। फसल खराबे के मुआवजे और बीमा क्लेम जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस अवसर पर अनीता, राजबाला, जगवंती, कैलाश, सुनीता, राजबाला, कमलेश, सरला, मीना, सुनीता, पूनम, परदीप शर्मा, करतार, सुरेश करसोला, राजेश, रामनिवास, गुलाब, दीनदयाल, संदीप, नसीब, जयपाल, राजेश मौजूद थे।
विज्ञापन
सीटू जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि 16 फरवरी की ट्रेड यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ऐतिहासिक होगी। दो साल पहले 13 महीने चले ऐतिहासिक किसान आंदोलन के आगे केंद्र सरकार को घुटने टेकने पड़े थे। तीनों कृषि कानूनों को वापस करवाने में सफलता मिली थी। इस आंदोलन में मजदूरों और आम जनता का व्यापक समर्थन मिला था, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की कानूनी गारंटी, बिजली निजीकरण विधेयक की वापसी के मामले में जो वादे किए गए थे, उन पर केंद्र सरकार ने धोखा दे दिया। मजदूरों को गुलाम बनाने के लिए पारित चार लेबर कोड्स को भी सरकार वापस नहीं ले रही है। लखीमपुर खीरी कांड की साजिश रचने वाले मंत्री को पद से नहीं हटाया गया है। किसान का गन्ना, कपास, सरसों, धान, सब्जियां और अन्य फसलें लूटी जा रही हैं। इनके लागत खर्च बढ़ने और पूरे भाव न मिलने से काश्तकारों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। फसल खराबे के मुआवजे और बीमा क्लेम जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस अवसर पर अनीता, राजबाला, जगवंती, कैलाश, सुनीता, राजबाला, कमलेश, सरला, मीना, सुनीता, पूनम, परदीप शर्मा, करतार, सुरेश करसोला, राजेश, रामनिवास, गुलाब, दीनदयाल, संदीप, नसीब, जयपाल, राजेश मौजूद थे।
विज्ञापन