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रोजगार के लिए ठोकरें खाने को मजबूर मलेरिया स्प्रे स्टाफ ने जताया रोष

Sun, 11 Aug 2019 11:57 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2019 11:57 PM IST
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malaria drug spray staff fights to few jobs for employment
नागरिक अस्पताल स्थित पार्क में मलेरिया स्प्रे स्टाफ एसोसिएशन की प्रदेश स्तरीय बैठक हुई। जिसमें कर्मचारियों ने प्रदेशभर के नागरिक अस्पतालों पर मलेरिया व डेंगू के केस छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मच्छर पूरे वर्ष होते हैं, लेकिन उन्हें केवल पांच महीने ही काम दिया जाता है। अब यह काम भी एक जिले में केवल एक ही पार्टी से करवाया जाता है, जिसमें केवल छह लोग शामिल होते हैं, जबकि एक जिले में 100 पार्टी कार्यरत हैं। एसोसिएशन ने उन्हें पूरे वर्ष कार्य देने तथा पक्का करने की मांग की।
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सर्व कर्मचारी संघ से संबद्ध मलेरिया स्प्रे एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष ने कहा कि पूरे प्रदेश में लगभग छह हजार लोग हैं जो पिछले 20-22 साल से स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आते हैं। यह लोग मच्छर होने पर फॉगिंग व दवा छिड़कने का काम करते हैं। सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये के कारण उन्हें केवल पांच महीने ही काम मिलता है। यह भी केवल छह लोगों को ही मिलता है, जबकि एक जिले में 600 लोग कार्यरत हैं। पहले उन्हें स्वास्थ्य विभाग पैसा देता था। जब प्रदेश में चौधरी बंसीलाल की सरकार बनी तो उन्होंने मलेरिया स्प्रे करने वालों को डीसी रेट दिया। इसके बाद आई सभी सरकारों ने उन्हें पक्का करने का आश्वासन दिया, लेकिन किसी भी सरकार में उन्हें न्याय नहीं मिला। यदि पूरे साल फॉगिंग का काम उन्हें मिलता रहे तो लोगों को मच्छरों से होने वाली बीमारियों से भी छुटकारा मिल जाता। प्रदेशाध्यक्ष सुभाष ने कहा कि अब यूनियन अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ेगी। जल्द ही वे निर्णायक लड़ाई का निर्णय लेंगे।
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भूखे मरने की नौबत आई
मेवात से आए हप्पू ने कहा कि वह 1984 से यह कार्य कर रहा है। उसे पांच महीने ही काम मिलता है। पूरे प्रदेश में छह हजार लोग यह कार्य करते हैं, लेकिन अब एक जिले में केवल छह लोगों की टीम से ही काम चलाया जा रहा है। बाकी लोग बेरोजगार हो गए हैं। नौबत उनके परिवारों के भूखे मरने की आ गई है। वह और कोई अन्य कार्य करने में पूरी तरह से असमर्थ हैं, लेकिन विभाग इसमें काम नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे सैकड़ों परिवार हैं, जो केवल इसी काम के सहारे अपना गुजारा कर रहे हैं। यदि ऐसे ही चलता रहा तो कई परिवार उजड़ जाएंगे।
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