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भगवान विष्णु ने लिया था अवतार
Jind
Updated Mon, 18 Aug 2014 12:12 AM IST
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शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक गांव बराह कलां जो महाभारत काल व इससे भी पहले की प्राचीन यादें समेटे हुए है। इस गांव में भगवान बराह का तीर्थ है जहां फाल्गुन में मेला लगता है। स्थानीय लोगों की धारणा है कि यहां पर पर भगवान विष्णु ने बराह का अवतार लिया था। विष्णु के अवतार बराह के नाम से ही इस गांव को बराह नाम से जाना जाता है।
पांडू पिंडारा, ईक्कस, रामराय के साथ-साथ बराह गांव में भी महाभारत काल की यादें बसी हुई हैं।
महंत उमेश गिरी के अनुसार भगवान विष्णु ने यहां पर वराह का अवतार लिया था, जिसका जिक्र स्कंद पुराण, वामन पुराण और महाभारत में भी मिलता है। उनके अनुसार भगवान विष्णु ने दस अवतारों में से तीसरा अवतार बराह के रूप में प्रकट हुए थे और प्रलय के वक्त जब पृथ्वी रसातल में गई हुई थी तब भगवान विष्णु ने बराह का रूप धारणा करके नाक पर पृथ्वी को ऊपर लाकर संपूर्ण सृष्टि को बचाया था।
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फाल्गुन की द्वादशी को गांव में हर साल मेला लगता है और आसपास के लोग भगवान बराह की पूजा अर्चना के लिए यहां आते हैं।
महंत के अनुसार इस तीर्थ में स्नान करने के लिए युधिष्ठिर तथा अन्य पांडव अपने पितृों को जल देने के लिए व भगवान बराह की पूजा अर्चना करने के लिए आए थे।
शेषनाग के अवतार बलराम ने यहां स्नान करके ब्रह्म हत्या के श्राप से मुक्ति पाई थी। इस तीर्थ की खुदाई जहां पांडवों ने की थी वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने स्नान कर पूजा अर्चना की थी। यह तीर्थ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड में आता है। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन की अनदेखी के चलते बदहाली का शिकार है।
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तीर्थ में चारदीवारी तथा लाइट लगवाने की प्रशासन से कई सालों से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गांव की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘‘चले बराह वन की ओर’’ के नाम से दूरदर्शन पर भी आ चुकी है जिसमें तथ्य के आधार पर दिखाया गया है कि यहां दलदल की भूमि पर जंगल हुआ करते थे और किस तरह भगवान विष्णु ने यहां बराह का रूप धारण करके धरती को रसातल से निकाला था।