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लॉकडाउन से बंद दुकानों का दो माह का माह कर दिया किया
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अपनी पति राजेंद्र भारद्वाज के साथ सरोज।
- फोटो : Jind
जब से लॉकडाउन हुआ है, किराना की दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें बंद हैं। अर्बन इस्टेट निवासी राजेंद्र भारद्वाज की पत्नी सरोज ने अपनी तीन दुकानों के किरायेदारों का दर्द समझते हुए उनका दो महीने का किराया माफ कर दिया है।
सरोज ने कहा कि यदि लॉकडाउन आगे बढ़ा तो वह अपने दुकानदारों से आगे भी किराया नहीं लेंगी। सरोज ने तीन दुकानदारों का किराया माफ करके एक मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि इस कारोना वायरस से लड़ने के लिए हर कोई अपना किसी न किसी रूप में योगदान दे रहा है। उनके पति राजेंद्र प्रतिदिन अपनी इच्छानुसार गरीब लोगों खाना खिलाते हैं तथा कई घरों में सूखा राशन भी पहुंचाते हैं। उनके बेटे पेशे से इंजीनियर हैं। वह भी गायों को भोजन आदि खिलाते हैं, इसलिए वह भी कैसे पीछे रह सकती हैं। उनके नाम पर तीन दुकानें हैं और इन दुकानों का लगभग 25 हजार रुपये किराया प्रति महीना आता है। उन्होेंने सोचा कि जिनकी दुकानें ही बंद हैं तो वह किराया कहां से देंगे। इसलिए उनके दुख को समझते हुए सहयोग करने की सोची और दुकानदारों को फोन करके कहा कि उनका मार्च और अप्रैल का किराया माफ कर दिया है। यदि लॉकडाउन आगे बढ़ा तो वह आगे भी किराया नहीं लेंगी।
ससुर से मिली है प्रेरणा
सरोज ने कहा कि उनकी पैतृक जमीन गांव निडाना में है। उनके ससुर बारुराम गांव में जमीन ठेके पर देते थे। जब किसी प्राकृतिक आपदा के कारण किसान की फसल खराब हो जाती थी तो ससुर किसान से जमीन का ठेका नहीं लेेते थे। जो व्यक्ति जमीन ठेके पर लेता था, यदि उसका उत्पादन कम होता तो वे जमीन का आधा ही ठेका लेते थे। उनका पूरा परिवार ससुर के बताए रास्ते पर चल रहा है।
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सरोज ने कहा कि यदि लॉकडाउन आगे बढ़ा तो वह अपने दुकानदारों से आगे भी किराया नहीं लेंगी। सरोज ने तीन दुकानदारों का किराया माफ करके एक मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि इस कारोना वायरस से लड़ने के लिए हर कोई अपना किसी न किसी रूप में योगदान दे रहा है। उनके पति राजेंद्र प्रतिदिन अपनी इच्छानुसार गरीब लोगों खाना खिलाते हैं तथा कई घरों में सूखा राशन भी पहुंचाते हैं। उनके बेटे पेशे से इंजीनियर हैं। वह भी गायों को भोजन आदि खिलाते हैं, इसलिए वह भी कैसे पीछे रह सकती हैं। उनके नाम पर तीन दुकानें हैं और इन दुकानों का लगभग 25 हजार रुपये किराया प्रति महीना आता है। उन्होेंने सोचा कि जिनकी दुकानें ही बंद हैं तो वह किराया कहां से देंगे। इसलिए उनके दुख को समझते हुए सहयोग करने की सोची और दुकानदारों को फोन करके कहा कि उनका मार्च और अप्रैल का किराया माफ कर दिया है। यदि लॉकडाउन आगे बढ़ा तो वह आगे भी किराया नहीं लेंगी।
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ससुर से मिली है प्रेरणा
सरोज ने कहा कि उनकी पैतृक जमीन गांव निडाना में है। उनके ससुर बारुराम गांव में जमीन ठेके पर देते थे। जब किसी प्राकृतिक आपदा के कारण किसान की फसल खराब हो जाती थी तो ससुर किसान से जमीन का ठेका नहीं लेेते थे। जो व्यक्ति जमीन ठेके पर लेता था, यदि उसका उत्पादन कम होता तो वे जमीन का आधा ही ठेका लेते थे। उनका पूरा परिवार ससुर के बताए रास्ते पर चल रहा है।
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