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नशामुक्त समाज के लिए मिलकर करें प्रयास : अमित सिहाग
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फोटो 04जेएनडी11-नशा मुक्ति केंद्र में नशा पीड़ित से बातचीत करते हुए सचिव अमित सिहाग। स्रोत प्रश
जींद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित सिहाग ने मंगलवार को सोमनाथ मंदिर के निकट स्थित नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया तथा उपचाराधीन व्यक्तियों एवं स्टाफ से बातचीत कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सचिव अमित सिहाग ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए गंभीर अभिशाप है। नशे से दूर रहकर ही स्वस्थ एवं समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें तथा दूसरों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि समाज को नशामुक्त बनाने के अभियान को मजबूती मिल सके।
भारत में वर्ष 1985 से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) लागू है, जिसके अंतर्गत मादक पदार्थों से संबंधित अपराध गैर-जमानती हैं, इनके लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना ही नहीं, बल्कि समाज को नशे जैसी गंभीर समस्या से सुरक्षित रखना भी है।
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निरीक्षण के समय नशा मुक्ति केंद्र में दस उपचाराधीन व्यक्ति मिले। प्राधिकरण सचिव ने केंद्र में उपलब्ध चिकित्सा, भोजन, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी ली तथा उपचाराधीन व्यक्तियों से उनके स्वास्थ्य एवं रहन-सहन के संबंध में बातचीत की। उन्होंने केंद्र के स्टाफ को निर्देश दिए कि उपचाराधीन व्यक्तियों की देखभाल, उपचार एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा उन्हें बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
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सचिव अमित सिहाग ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए गंभीर अभिशाप है। नशे से दूर रहकर ही स्वस्थ एवं समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें तथा दूसरों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि समाज को नशामुक्त बनाने के अभियान को मजबूती मिल सके।
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भारत में वर्ष 1985 से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) लागू है, जिसके अंतर्गत मादक पदार्थों से संबंधित अपराध गैर-जमानती हैं, इनके लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना ही नहीं, बल्कि समाज को नशे जैसी गंभीर समस्या से सुरक्षित रखना भी है।
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निरीक्षण के समय नशा मुक्ति केंद्र में दस उपचाराधीन व्यक्ति मिले। प्राधिकरण सचिव ने केंद्र में उपलब्ध चिकित्सा, भोजन, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी ली तथा उपचाराधीन व्यक्तियों से उनके स्वास्थ्य एवं रहन-सहन के संबंध में बातचीत की। उन्होंने केंद्र के स्टाफ को निर्देश दिए कि उपचाराधीन व्यक्तियों की देखभाल, उपचार एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा उन्हें बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए।