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श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के साथ वैदिक परंपरा से किया था सुदामा का सम्मान : योगेश दत्त
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फोटो 3 नरवाना। हवन यज्ञ करते हुए आर्य समाज के लोग। स्रोत समाज।
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नरवाना। आर्य समाज नरवाना परिसर में चतुर्वेद पाठ पारायण यज्ञ कार्यक्रम के तहत हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। यजमान यशपाल, सुनील व मनोज कुमार सहित स्टाफ सदस्यों, विद्यार्थियों और आर्य समाज के सदस्यों ने वेद मंत्रों का सामूहिक पाठ करते हुए यज्ञ में आहुतियां डालीं।
हवन के बाद मुख्य उपदेशक पंडित योगेश दत्त ने योगीराज श्रीकृष्ण चंद्र के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में श्रीकृष्ण जैसे विलक्षण प्रतिभावान, बुद्धिमान, दूरदर्शी और नीतिज्ञ व्यक्तित्व का जन्म युगों बाद होता है। उन्होंने द्रोणाचार्य और पांचाल नरेश द्रुपद की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों के संबंधों में राजा और रंक का भेद सामने आया, जबकि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता आत्मीयता एवं समानता का प्रतीक थी।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने महारानी रुक्मिणी के साथ वैदिक परंपराओं के अनुसार सुदामा का आत्मिक भाव से सम्मान किया और बिना कुछ मांगे उनके परिवार का उद्धार किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने युद्धभूमि में अर्जुन को कर्म के सिद्धांत का ज्ञान देकर कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित किया।
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आर्य समाज प्रधान चंद्रकांत आर्य ने समाजसेवा, वेद प्रचार, यज्ञ और राष्ट्र रक्षा के लिए सत्यनिष्ठा से कार्य करने का आह्वान किया। जयपाल सिंह आर्य ने श्रीकृष्ण के चरित्र से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर वेदपाल, धर्मपाल, यशपाल, रामकुमार, किताब सिंह, बलबीर सिंह, राजवीर सिंह, रिपन गर्ग, मनोज कुमार, मीना व सीमा मौजूद रहे।
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हवन के बाद मुख्य उपदेशक पंडित योगेश दत्त ने योगीराज श्रीकृष्ण चंद्र के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में श्रीकृष्ण जैसे विलक्षण प्रतिभावान, बुद्धिमान, दूरदर्शी और नीतिज्ञ व्यक्तित्व का जन्म युगों बाद होता है। उन्होंने द्रोणाचार्य और पांचाल नरेश द्रुपद की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों के संबंधों में राजा और रंक का भेद सामने आया, जबकि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता आत्मीयता एवं समानता का प्रतीक थी।
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उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने महारानी रुक्मिणी के साथ वैदिक परंपराओं के अनुसार सुदामा का आत्मिक भाव से सम्मान किया और बिना कुछ मांगे उनके परिवार का उद्धार किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने युद्धभूमि में अर्जुन को कर्म के सिद्धांत का ज्ञान देकर कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित किया।
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आर्य समाज प्रधान चंद्रकांत आर्य ने समाजसेवा, वेद प्रचार, यज्ञ और राष्ट्र रक्षा के लिए सत्यनिष्ठा से कार्य करने का आह्वान किया। जयपाल सिंह आर्य ने श्रीकृष्ण के चरित्र से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर वेदपाल, धर्मपाल, यशपाल, रामकुमार, किताब सिंह, बलबीर सिंह, राजवीर सिंह, रिपन गर्ग, मनोज कुमार, मीना व सीमा मौजूद रहे।