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विद्यालयों का 10 वीं परीक्षा परिणाम शून्य, नोटिस की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो जींद
Updated Sat, 27 May 2017 11:50 PM IST
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गांव सिल्लाखेड़ी स्कूल कार्यालय का दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गांव सिल्लाखेड़ी और ऐंचराकला के राजकीय उच्च विद्यालय का 10वीं परीक्षा परिणाम शून्य रहा। दोनों स्कूलों की 10वीं कक्षाओं में मौजूदा अध्यापक भी एक भी बच्चे को पास करवाने में सफल नहीं हुए। सिल्लाखेड़ी राजकीय स्कूल का तो पिछले कई वर्षों से ही शून्य परिणाम आ रहा है।
स्कूल प्रशासन इसका कारण स्कूल में अध्यापकों की कमी बता रहा है। हर वर्ष एक भी बच्चा पास ना होने से गांव के लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। सिल्लाखेड़ी स्कूल के 2016-17 में 10वीं कक्षा के 20 बच्चों ने, 2015-16 मेें 10वीं कक्षा के 15 बच्चे और 2014-15 में 22 बच्चों ने परीक्षा दी, लेकिन पिछले तीन सालों में एक भी बच्चा पास नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सरकार से गांव में घटते शिक्षा स्तर को देखते हुए स्कूल में अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर इस वर्ष भी स्कूल अध्यापक नहीं भेजे गए तो वे स्कूल को हमेशा के लिए ताला लगा देंगे।
दोनों स्कूलों से बीईओ कार्यालय द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अभिभावक महाबीर, राजेश, जितेंद्र, सतीश, सुनिता आदि आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल में अध्यापक ना होने से गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। जिस स्कूल में अध्यापक है, वहां फेल बच्चों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है।
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चार वर्ष से रिक्त हिंदी व साइस पद
गांव सिल्लाखेड़ी स्कूल के कार्यकारी मुख्याध्यापक प्रदीप ने बताया कि स्कूल में गत चार वर्षों से हिंदी और सांइस के अध्यापक पद खाली होने से 10वीं कक्षा परीक्षा परिणामों में असर देखने को मिला है। वहीं स्कूल में हेड मास्टर के अलावा प्राध्यापक फिजिक्स, हिंदी के पद भी खाली है। वहीं ऐंचराकलां स्कूल के कार्यकारी मुख्याध्यापक अनूप के अनुसार स्कूल में साइंस और हिंदी के अध्यापक की पोस्ट खाली है। इस वर्ष परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत से फिसल कर शून्य प्रतिशत पर आ गया है।
बीईओ डॉ. नरेश वर्मा ने कहा कि हलके के दो स्कूलों का परीक्षा परिणाम शून्य रहा है। स्कूलों को नोटिस जारी कर कारण पूछा जाएगा। इन स्कूलों में 10वीं कक्षा बच्चे किन-किन विषयों में फेल हुए हैं, उसका सर्वे कर रिपोर्ट तैयार किया जाएगा। स्कूलों में अध्यापकों या प्राध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्कूल प्रशासन इसका कारण स्कूल में अध्यापकों की कमी बता रहा है। हर वर्ष एक भी बच्चा पास ना होने से गांव के लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। सिल्लाखेड़ी स्कूल के 2016-17 में 10वीं कक्षा के 20 बच्चों ने, 2015-16 मेें 10वीं कक्षा के 15 बच्चे और 2014-15 में 22 बच्चों ने परीक्षा दी, लेकिन पिछले तीन सालों में एक भी बच्चा पास नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सरकार से गांव में घटते शिक्षा स्तर को देखते हुए स्कूल में अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर इस वर्ष भी स्कूल अध्यापक नहीं भेजे गए तो वे स्कूल को हमेशा के लिए ताला लगा देंगे।
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दोनों स्कूलों से बीईओ कार्यालय द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अभिभावक महाबीर, राजेश, जितेंद्र, सतीश, सुनिता आदि आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल में अध्यापक ना होने से गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। जिस स्कूल में अध्यापक है, वहां फेल बच्चों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है।
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चार वर्ष से रिक्त हिंदी व साइस पद
गांव सिल्लाखेड़ी स्कूल के कार्यकारी मुख्याध्यापक प्रदीप ने बताया कि स्कूल में गत चार वर्षों से हिंदी और सांइस के अध्यापक पद खाली होने से 10वीं कक्षा परीक्षा परिणामों में असर देखने को मिला है। वहीं स्कूल में हेड मास्टर के अलावा प्राध्यापक फिजिक्स, हिंदी के पद भी खाली है। वहीं ऐंचराकलां स्कूल के कार्यकारी मुख्याध्यापक अनूप के अनुसार स्कूल में साइंस और हिंदी के अध्यापक की पोस्ट खाली है। इस वर्ष परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत से फिसल कर शून्य प्रतिशत पर आ गया है।
बीईओ डॉ. नरेश वर्मा ने कहा कि हलके के दो स्कूलों का परीक्षा परिणाम शून्य रहा है। स्कूलों को नोटिस जारी कर कारण पूछा जाएगा। इन स्कूलों में 10वीं कक्षा बच्चे किन-किन विषयों में फेल हुए हैं, उसका सर्वे कर रिपोर्ट तैयार किया जाएगा। स्कूलों में अध्यापकों या प्राध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।