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पिता लड़ रहा कैंसर से जंग: घर में आर्थिक तंगी, बेटी सरोज के सपने बड़े, बोर्ड एग्जाम में हासिल किया तीसरा स्थान

Tue, 13 May 2025 06:36 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Published by: शाहिल शर्मा Updated Tue, 13 May 2025 06:36 PM IST
सार

पिता फल की रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और बीते तीन साल से कैंसर की बीमारी से लड़ रहे हैं। बावजूद इसके सरोज ने हर चुनौती को अवसर में बदलते हुए हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड के 12वीं के परीक्षा परिणाम में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया। 10वीं क्लास में भी बेटी ने हरियाणा में तीसरा स्थान हासिल किया था। डिटेल में पढ़ें खबर...

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Jind Saroj got 3rd place in Arts overall Haryana HBSE Result 2025
अपने स्कूल शिक्षकों के साथ सरोज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नगूरां गांव राजनगर की निवासी सरोज जो डीएन मॉडल स्कूल की छात्रा है उसने कला संकाय में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में 500 में से 494 अंक हासिल कर हरियाणा की ओवरऑल मेरिट लिस्ट में तीसरा स्थान हासिल किया है। परमजीत और सुदेश की बेटी सरोज ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी अपने सपनों को उड़ान दी।

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सरोज का एग्जाम में शानदार प्रदर्शन 

सरोज ने अपनी पढ़ाई में असाधारण प्रदर्शन किया। उन्होंने अंग्रेजी में 99, हिंदी में 96, भूगोल में 100, राजनीति विज्ञान में 99, अर्थशास्त्र में 100 और गणित में 94 अंक हासिल किए। इससे पहले, सरोज ने 10वीं कक्षा में भी प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया था, जो सरोज की निरंतर मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण है।
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पिता लड़ रहे कैंसर से जंग 

सरोज के पिता परमजीत फल की रेहड़ी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और बीते तीन सालों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। मां सुदेश एक गृहिणी हैं, और सरोज तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी हैं। आईएएस अधिकारी दिव्या तंवर की एक प्रेरणादायक वीडियो देखकर सरोज ने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया है। अब वह आईएएस बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं।

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सेल्फ स्टडी और अनुशासन का नतीजा

सरोज ने अपनी पढ़ाई के लिए किसी ट्यूशन या कोचिंग का सहारा नहीं लिया। स्कूल से लौटने के बाद वह रोजाना सात घंटे पढ़ाई करती थीं और फिर घर के कामों में मां का हाथ बंटाती थी। रात में एक से दो बजे तक पढ़ाई कर वह अपनी तैयारी को और मजबूत करती थीं। सरोज ने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। पढ़ाई के लिए सरोज ने यूट्यूब का सहारा लिया जो बेटी की सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

परिवार का गर्व, बहनों की प्रेरणा

सरोज की मां सुदेश ने बताया कि वह अपनी बेटी की मेहनत और लगन से बहुत खुश हैं। सरोज न केवल अपनी पढ़ाई में अव्वल रही, बल्कि अपनी छोटी बहनों को भी पढ़ाती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद सरोज ने कभी हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प से यह मुकाम हासिल किया।



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