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तकनीकी खराबी से शुगर मिल फिर घंटो रही बंद
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
Updated Fri, 15 Apr 2016 12:04 AM IST
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मीट के बाहर खड़ा ट्रैक्टर।
- फोटो : bureau
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किसानों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। कभी मौसम की मार, तो कभी मंडियों में भाव नहीं मिलते। इसके साथ-साथ व्यवस्थाओं की मार भी किसानों पर पड़ती है। शुगर मिल में मिल प्रबंधन की लापरवाही के चलते किसानों को खासा नुकसान हो रहा है। किसानों के साथ शुगर मिल को भी लाखों रुपये का घाटा लगा है।
इस पेराई सत्र में शुगर मिल 250 घंटे से ज्यादा समय बंद रही है। कभी प्रदेश भर में पेराई के मामले में अव्वल रहने वाले इस शुगर मिल में अचानक से खराबी क्यों आने लगी, इसका जवाब मिल के अधिकारियों के पास भी नहीं है। इससे पहले भी मिल में बार-बार आ रही तकनीकी खराबी के चलते एसडीएम एवं शुगर मिल एमडी योगेश कुमार जांच के आदेश दे चुके हैं।
बृहस्पतिवार को सुबह एक बार फिर तकनीकी खराबी आने की वजह से मिल में पेराई का कार्य बंद हो गया। फिलहाल शुगर मिल में 200 के लगभग गन्ने की ट्रालियां भरी खड़ी हैं। फिलहाल गेहूं कटाई का सीजन भी जोरों पर चल रहा है, लेकिन किसान गन्ने की ट्रालियों के साथ शुगर मिल में फंसे हैं।
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आमतौर पर शुगर मिल में पेराई का कार्य 15 अप्रैल के आसपास तक चलता है, लेकिन अभी भी शुगर मिल में करीब डेढ़ लाख क्विंटल गन्ना आना बाकीहै, जिससे 25 अप्रैल तक शुगर मिल चलने की संभावना है। कैथल, पानीपत, करनाल, असंध, सोनीपत व गोहाना समेत अधिकतर शुगर मिल में पेराई का कार्य बंद हो चुका है या फिर एक-दो दिन में बंद होने वाला है। जींद के अलावा महम व रोहतक के शुगर मिल ही चलेंगे।
गर्मी के मौसम में शुगर मिल जितना लंबा चलेगा, किसानों व शुगर मिल का नुकसान बढ़ेगा। गर्मियों में गन्ना सूखने से वजन घटता है और साथ ही चीनी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। वहीं अब अगली फसल का भी समय नजदीक है।
गर्मी बढ़ने के साथ घटेगी चीनी की रिकवरी
शुगर मिल में इस सत्र में चीनी रिकवरी का लक्ष्य 9.25 प्रतिशत रखा गया था। फिलहाल रिकवरी औसतन 9.58 चल रही है। एक समय रिकवरी 11 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई थी। अब जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, रिकवरी घटेगी। इससे सीधे तौर पर शुगर मिल को तो नुकसान होगा ही, साथ ही किसानों को भी नुकसान होगा। शुगर मिल में अभी तक 19 लाख 60 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है और करीब डेढ़ लाख क्विंटल गन्ना आना बाकी है। फिलहाल गन्ने की रिकवरी दोबारा साढ़े नौ पर पहुंच गई है। अब जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी रिकवरी में और गिरावट आएगी।
घाटे में चल रहा है शुगर मिल
शुगर मिल करीब पौने दो सौ करोड़ के घाटे में चल रहा है। पिछले पेराई सत्र में किसानों को उनकी गन्ने की पेमेंट के लिए महीनों इंतजार करना पड़ा था। हालांकि इस बार मिल प्रबंधन द्वारा किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान किया गया है। गन्ने के भुगतान के लिए सरकार द्वारा राशि दी गई है।
सर्विस के लिए रोका गया है मशीनरी को
गर्मी चल रही है, जिससे समस्या आ जाती है। फिलहाल सर्विस करने के लिए मशीनरी को रोका गया है, ताकि पिराई का कार्य सुचारू रूप से चल सके।
एसके रस्तोगी, चीफ इंजीनियर
दी सहकारी शुगर मिल, जींद।
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इस पेराई सत्र में शुगर मिल 250 घंटे से ज्यादा समय बंद रही है। कभी प्रदेश भर में पेराई के मामले में अव्वल रहने वाले इस शुगर मिल में अचानक से खराबी क्यों आने लगी, इसका जवाब मिल के अधिकारियों के पास भी नहीं है। इससे पहले भी मिल में बार-बार आ रही तकनीकी खराबी के चलते एसडीएम एवं शुगर मिल एमडी योगेश कुमार जांच के आदेश दे चुके हैं।
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बृहस्पतिवार को सुबह एक बार फिर तकनीकी खराबी आने की वजह से मिल में पेराई का कार्य बंद हो गया। फिलहाल शुगर मिल में 200 के लगभग गन्ने की ट्रालियां भरी खड़ी हैं। फिलहाल गेहूं कटाई का सीजन भी जोरों पर चल रहा है, लेकिन किसान गन्ने की ट्रालियों के साथ शुगर मिल में फंसे हैं।
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आमतौर पर शुगर मिल में पेराई का कार्य 15 अप्रैल के आसपास तक चलता है, लेकिन अभी भी शुगर मिल में करीब डेढ़ लाख क्विंटल गन्ना आना बाकीहै, जिससे 25 अप्रैल तक शुगर मिल चलने की संभावना है। कैथल, पानीपत, करनाल, असंध, सोनीपत व गोहाना समेत अधिकतर शुगर मिल में पेराई का कार्य बंद हो चुका है या फिर एक-दो दिन में बंद होने वाला है। जींद के अलावा महम व रोहतक के शुगर मिल ही चलेंगे।
गर्मी के मौसम में शुगर मिल जितना लंबा चलेगा, किसानों व शुगर मिल का नुकसान बढ़ेगा। गर्मियों में गन्ना सूखने से वजन घटता है और साथ ही चीनी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। वहीं अब अगली फसल का भी समय नजदीक है।
गर्मी बढ़ने के साथ घटेगी चीनी की रिकवरी
शुगर मिल में इस सत्र में चीनी रिकवरी का लक्ष्य 9.25 प्रतिशत रखा गया था। फिलहाल रिकवरी औसतन 9.58 चल रही है। एक समय रिकवरी 11 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई थी। अब जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, रिकवरी घटेगी। इससे सीधे तौर पर शुगर मिल को तो नुकसान होगा ही, साथ ही किसानों को भी नुकसान होगा। शुगर मिल में अभी तक 19 लाख 60 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है और करीब डेढ़ लाख क्विंटल गन्ना आना बाकी है। फिलहाल गन्ने की रिकवरी दोबारा साढ़े नौ पर पहुंच गई है। अब जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी रिकवरी में और गिरावट आएगी।
घाटे में चल रहा है शुगर मिल
शुगर मिल करीब पौने दो सौ करोड़ के घाटे में चल रहा है। पिछले पेराई सत्र में किसानों को उनकी गन्ने की पेमेंट के लिए महीनों इंतजार करना पड़ा था। हालांकि इस बार मिल प्रबंधन द्वारा किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान किया गया है। गन्ने के भुगतान के लिए सरकार द्वारा राशि दी गई है।
सर्विस के लिए रोका गया है मशीनरी को
गर्मी चल रही है, जिससे समस्या आ जाती है। फिलहाल सर्विस करने के लिए मशीनरी को रोका गया है, ताकि पिराई का कार्य सुचारू रूप से चल सके।
एसके रस्तोगी, चीफ इंजीनियर
दी सहकारी शुगर मिल, जींद।