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नियम 134 ए सर!निजी स्कूलों पर कार्रवाई करो
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
Updated Thu, 21 Apr 2016 12:16 AM IST
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प्रदर्शन करते।
- फोटो : bureau
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बुधवार को एक बार फिर नियम 134 के तहत निजी स्कूलों में होने वाले गरीब बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया टल गई। शिक्षा विभाग द्वारा दाखिले की सूची ही जारी नहीं की गई, जिससे भड़के अभिभावक बीईओ ऑफिस से नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां इन लोगों ने एसडीएम योगेश मेहता को मांगों का ज्ञापन सौंपा। इन लोगों ने कहा कि शहर के नामचीन स्कूल एडमिशन देने में टाल मटोल कर रहे हैं, ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि जींद और सफीदों खंडों में अभी तक दाखिले के लिए ड्रा ही नहीं निकल पाया है। वहीं अन्य ब्लाकों में स्कूलों द्वारा दर्शाई गई खाली सीटों की संख्या एडमिशन के लिए आए आवेदनों से कहीं ज्यादा है। अब अभिभावकों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले जिन ब्लॉकों के लिए ड्रा निकले थे, उनमें भी स्कूल बच्चों को दाखिले नहीं दे रहे हैं।
2386 बच्चे 1136 सीट
जींद ब्लॉक में नियम 134 ए के तहत दाखिला लेने वालों की कतार बहुत लंबी है। यहां 2386 बच्चों ने नियम 134 ए के तहत दाखिले के लिए आवेदन किया है, लेकिन जींद ब्लॉक के निजी स्कूलों ने महज 1136 सीटें ही खाली होने का ब्योरा शिक्षा विभाग को दिया है। वहीं सोमवार को निकले उचाना ब्लॉक के ड्रा में 454 में से महज 268 विद्यार्थियों को ही स्कूल अलाट किए जा सके हैं।
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बार-बार काट रहे हैं चक्कर
नियम 134 ए सरकार द्वारा बनाया गया नियम है, लेकिन शहर के कई नामचीन स्कूल इस नियम को नहीं मान रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गरीब लोग अपना काम धंधा छोड़कर आते हैं और हर बार निराश होकर लौटना पड़ता है।
सुमन, अभिभावक
पढ़ाई खराब होने का खतरा
मेरी बेटी चौथी कक्षा में है, लेकिन प्रशासन लगातार ड्रा की सूची में देरी कर रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई खराब होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में भी दाखिला प्रक्रिया बंद हो जाएगी और निजी स्कूलों में एडमिशन होने पर संशय बना हुआ है।
राधिका, अभिभावक
क्या है नियम 134 ए
नियम 134 ए प्रदेश सरकार की विशेष व्यवस्था है। यह शिक्षा के अधिकार कानून से अलग है और बहुत पहले से प्रदेश में लागू है। इसके तहत स्कूल में पढ़ने वाले कुल बच्चों का दस प्रतिशत निजी स्कूलों के गरीब बच्चों को दाखिला देना होता है। वहीं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जमीन में बने स्कूलों को 20 प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला देना होता है।
कई स्कूलों ने नहीं दी खाली सीटों की सूचना
वहीं अभिभावकों का कहना है कि कई स्कूलों ने अभी तक खाली सीटों का ब्योरा भी शिक्षा विभाग को नहीं दिया है। अभिभावकों कहना है कि ये स्कूल टालमटोल में लगे हुए हैं। ऐसे में इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
29 अप्रैल तक दाखिले
पहले बने नियम के अनुसार ड्रा में नाम आने पर विद्यार्थी 25 अप्रैल तक दाखिला ले सकते थे। जिन सीटों पर दाखिले नहीं होंगे, उन पर 26 अप्रैल को ड्रा निकाला जाना है। इस पर 29 अप्रैल तक बच्चे दाखिले ले सकते हैं।
विभाग से नहीं मिले दिशानिर्देश
ड्रा की सूची तैयार है, फिलहाल इस पर शिक्षा विभाग ने रोक लगा दी है। शिक्षा विभाग से दिशा निर्देश मिलते ही ड्रा की सूची जारी कर दी जाएगी।
सतबीर सिंह सरोहा, डीईओ
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गौरतलब है कि जींद और सफीदों खंडों में अभी तक दाखिले के लिए ड्रा ही नहीं निकल पाया है। वहीं अन्य ब्लाकों में स्कूलों द्वारा दर्शाई गई खाली सीटों की संख्या एडमिशन के लिए आए आवेदनों से कहीं ज्यादा है। अब अभिभावकों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले जिन ब्लॉकों के लिए ड्रा निकले थे, उनमें भी स्कूल बच्चों को दाखिले नहीं दे रहे हैं।
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2386 बच्चे 1136 सीट
जींद ब्लॉक में नियम 134 ए के तहत दाखिला लेने वालों की कतार बहुत लंबी है। यहां 2386 बच्चों ने नियम 134 ए के तहत दाखिले के लिए आवेदन किया है, लेकिन जींद ब्लॉक के निजी स्कूलों ने महज 1136 सीटें ही खाली होने का ब्योरा शिक्षा विभाग को दिया है। वहीं सोमवार को निकले उचाना ब्लॉक के ड्रा में 454 में से महज 268 विद्यार्थियों को ही स्कूल अलाट किए जा सके हैं।
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बार-बार काट रहे हैं चक्कर
नियम 134 ए सरकार द्वारा बनाया गया नियम है, लेकिन शहर के कई नामचीन स्कूल इस नियम को नहीं मान रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गरीब लोग अपना काम धंधा छोड़कर आते हैं और हर बार निराश होकर लौटना पड़ता है।
सुमन, अभिभावक
पढ़ाई खराब होने का खतरा
मेरी बेटी चौथी कक्षा में है, लेकिन प्रशासन लगातार ड्रा की सूची में देरी कर रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई खराब होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में भी दाखिला प्रक्रिया बंद हो जाएगी और निजी स्कूलों में एडमिशन होने पर संशय बना हुआ है।
राधिका, अभिभावक
क्या है नियम 134 ए
नियम 134 ए प्रदेश सरकार की विशेष व्यवस्था है। यह शिक्षा के अधिकार कानून से अलग है और बहुत पहले से प्रदेश में लागू है। इसके तहत स्कूल में पढ़ने वाले कुल बच्चों का दस प्रतिशत निजी स्कूलों के गरीब बच्चों को दाखिला देना होता है। वहीं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जमीन में बने स्कूलों को 20 प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला देना होता है।
कई स्कूलों ने नहीं दी खाली सीटों की सूचना
वहीं अभिभावकों का कहना है कि कई स्कूलों ने अभी तक खाली सीटों का ब्योरा भी शिक्षा विभाग को नहीं दिया है। अभिभावकों कहना है कि ये स्कूल टालमटोल में लगे हुए हैं। ऐसे में इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
29 अप्रैल तक दाखिले
पहले बने नियम के अनुसार ड्रा में नाम आने पर विद्यार्थी 25 अप्रैल तक दाखिला ले सकते थे। जिन सीटों पर दाखिले नहीं होंगे, उन पर 26 अप्रैल को ड्रा निकाला जाना है। इस पर 29 अप्रैल तक बच्चे दाखिले ले सकते हैं।
विभाग से नहीं मिले दिशानिर्देश
ड्रा की सूची तैयार है, फिलहाल इस पर शिक्षा विभाग ने रोक लगा दी है। शिक्षा विभाग से दिशा निर्देश मिलते ही ड्रा की सूची जारी कर दी जाएगी।
सतबीर सिंह सरोहा, डीईओ