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सरकार व प्रशासन की बेरुखी से हांफ रहा औद्योगिक क्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
Updated Wed, 15 Feb 2017 12:06 AM IST
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सुनसान पड़ा एचएसआईआईडीसी कार्यालय।
- फोटो : bureau
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शहर के उद्योगों को संजीवनी देने के लिए 35 साल पहले हांसी रोड पर बना औद्योगिक क्षेत्र अब प्रशासन और सरकार की लापरवाही से खुद हांफने लगा है। 25 साल में यहां चल रही 20 इकाईयां बंद हो चुकी हैं। जो चल रही हैं, वे भी बंद होने के कगार पर हैं। इससे जींद का उद्योग और यहां के उद्योगपति दोनों ही परेशानी में हैं।
1982 में औद्योगिक क्षेत्र बनने के बाद 1992 में यहां करीब 35 इकाईयां चल रही थी। फिलहाल महज 15 उद्योग बचे हैं। वहीं शहर में औद्योगिक क्षेत्र कुल 28 एकड़ में बना है, जिसमें कुल 78 प्लॉट हैं। इन पर 48 व्यक्तिओं का मालिकाना हक है। मौजूदा समय में दर्जनभर से अधिक उद्योग इकाई बंद हो चुकी हैं। उद्योगों की दुर्गति के लिए उद्यमी एचएसआईआईडीसी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार क्लक्टर रेट भी अधिक वसूल कर रहे हैं, जबकि सरकारी फीस 5500 रुपये है, एचएसआईआईडीसी 18000 हजार रुपये स्टांप फीस वसूल कर रहा है, इससे कोई भी नया उद्योगपति यहां उद्योग स्थापित करने से परहेज करता है। एचएसआईआईडीसी का कार्य तो बस मेंटेनेंस चार्ज वसूल करने तक ही सीमित रह गया है, उसे उद्यमियों को हो रही परेशानी से जैसे कोई लेना-देना ही नहीं हो।
बिजली व निकासी की समस्या का नहीं कोई हल औद्योगिक इकाई की सबसे बड़ी समस्या बिजली व गंदे पानी की है। वैसे तो कहने को तो निगम द्वारा पूरे 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, लेकिन बमुश्किल 15 से 16 घंटे भी बिजली उपलब्ध नहीं हो पाती। इसकी मुख्य वजह औद्योगिक इकाई को दी जाने वाली सप्लाई के साथ कई गांवों तथा कालोनियों को निगम द्वारा जोड़ा गया है। इस वजह से ओवरलोड होने व अन्य आने वाली तकनीकी खराबियों की वजह से आए दिन कई घंटों बिजली गुल रहती है। इकाई की बिजली सप्लाई के साथ गांवों व कालोनियों की सप्लाई क्यों जोड़ी गई है, इसका जवाब निगम के अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार इस लाइन से कई वर्षों से गांवों में बिजली सप्लाई दी जा रही है। इसके अलावा गंदे पानी की निकासी भी लाइलाज बीमारी बन चुकी है। इकाई का पानी बाहर निकालने का एचएसआईआईडीसी अब तक कोई हल नहीं निकाल पाई है। उद्यमियों के अनुसार, जींद शाखा में मैनेजमेंट नहीं होने की वजह से उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उद्यमियों के अनुसार, माह में एकाध बार ही सीनियर मैनेजर जींद शाखा के कार्यालय में आते हैं, जो पूरा दिन कागजी कार्रवाई में निकल जाता है।
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डीएलसीसी से होगा समाधान
डीसी विनय सिंह ने औद्योगिक स्थापित करने के लिए जिलास्तर पर डीएलसीसी व डीएलपीजी कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी का काम किसी प्रकार की उद्योगपति को कोई समस्या है तो उस समस्या का समाधान किया जाएगा।
आलाधिकारी नहीं देते ध्यान
यहां औद्योगिक क्षेत्र की हालात काफी खराब है। मूलभूत सुविधाओं का आभाव है, ग्रीन बेल्ट व सड़कों की हालात काफी खराब है। ग्रीन बेल्ट की हालात काफी खराब है, जिससे सारा दिन बदबू आती रहती है। औद्योगिक क्षेत्र की लगभग सभी सड़कें गड्ढों में तबदील हो चुकी हैं। कई बार आलाधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक औद्योगिक क्षेत्र को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई।
-सुधीर गर्ग, प्रधान औद्योगिक इकाई
बिजली और पानी निकासी की बड़ी समस्या
औद्योगिक क्षेत्र बिजली व निकासी की बड़ी समस्या है। बरसात के समय तो यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं होता। यहीं हालत बिजली की है। औद्योगिक बिजली फीडर से गांव व कॉलोनियों को जोड़ रखा है, जिसके पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल पाती। कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया है।
-प्यारे लाल सिंगला, उद्योगपति
10 साल से उद्योगपतियों की ओर से एक करोड़ यूनिट बिल बकाया है। जब उद्योगपतियों बकाया बिल ही नहीं भरेंगे तो कैसे विकास होगा। इसको लेकर उद्योगपतियों को नोटिस तक दिया गया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। 20 से 25 यूनिट तो बंद हैं। औद्योगिक क्षेत्र में मेरे पास सात अतिरिक्त चार्ज है। समस्या को देखते हुए असिस्टेंट मैनेजर की ड्यूटी सप्ताह में दो बार लगाई जा चुकी है। जल्द ही समस्याओं को दूर किया जाएगा। यह फैसला डीसी द्वारा ली गई मीटिंग में किया गया था।
-विनोद कत्याल, सीनियर मैनेजर, औद्योगिक इकाई
वर्जन...
औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी प्रशासन के पास रहती है। इसमें समय-समय पर सुधार भी किया जाता है। बिजली पूरी नहीं मिलने का मामला निगम के अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। वहीं क्षेत्र में सडक़ व अन्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए भी उचित कार्रवाई की जाएगी।
विनय सिंह, डीसी
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1982 में औद्योगिक क्षेत्र बनने के बाद 1992 में यहां करीब 35 इकाईयां चल रही थी। फिलहाल महज 15 उद्योग बचे हैं। वहीं शहर में औद्योगिक क्षेत्र कुल 28 एकड़ में बना है, जिसमें कुल 78 प्लॉट हैं। इन पर 48 व्यक्तिओं का मालिकाना हक है। मौजूदा समय में दर्जनभर से अधिक उद्योग इकाई बंद हो चुकी हैं। उद्योगों की दुर्गति के लिए उद्यमी एचएसआईआईडीसी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार क्लक्टर रेट भी अधिक वसूल कर रहे हैं, जबकि सरकारी फीस 5500 रुपये है, एचएसआईआईडीसी 18000 हजार रुपये स्टांप फीस वसूल कर रहा है, इससे कोई भी नया उद्योगपति यहां उद्योग स्थापित करने से परहेज करता है। एचएसआईआईडीसी का कार्य तो बस मेंटेनेंस चार्ज वसूल करने तक ही सीमित रह गया है, उसे उद्यमियों को हो रही परेशानी से जैसे कोई लेना-देना ही नहीं हो।
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बिजली व निकासी की समस्या का नहीं कोई हल औद्योगिक इकाई की सबसे बड़ी समस्या बिजली व गंदे पानी की है। वैसे तो कहने को तो निगम द्वारा पूरे 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, लेकिन बमुश्किल 15 से 16 घंटे भी बिजली उपलब्ध नहीं हो पाती। इसकी मुख्य वजह औद्योगिक इकाई को दी जाने वाली सप्लाई के साथ कई गांवों तथा कालोनियों को निगम द्वारा जोड़ा गया है। इस वजह से ओवरलोड होने व अन्य आने वाली तकनीकी खराबियों की वजह से आए दिन कई घंटों बिजली गुल रहती है। इकाई की बिजली सप्लाई के साथ गांवों व कालोनियों की सप्लाई क्यों जोड़ी गई है, इसका जवाब निगम के अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार इस लाइन से कई वर्षों से गांवों में बिजली सप्लाई दी जा रही है। इसके अलावा गंदे पानी की निकासी भी लाइलाज बीमारी बन चुकी है। इकाई का पानी बाहर निकालने का एचएसआईआईडीसी अब तक कोई हल नहीं निकाल पाई है। उद्यमियों के अनुसार, जींद शाखा में मैनेजमेंट नहीं होने की वजह से उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। उद्यमियों के अनुसार, माह में एकाध बार ही सीनियर मैनेजर जींद शाखा के कार्यालय में आते हैं, जो पूरा दिन कागजी कार्रवाई में निकल जाता है।
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डीएलसीसी से होगा समाधान
डीसी विनय सिंह ने औद्योगिक स्थापित करने के लिए जिलास्तर पर डीएलसीसी व डीएलपीजी कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी का काम किसी प्रकार की उद्योगपति को कोई समस्या है तो उस समस्या का समाधान किया जाएगा।
आलाधिकारी नहीं देते ध्यान
यहां औद्योगिक क्षेत्र की हालात काफी खराब है। मूलभूत सुविधाओं का आभाव है, ग्रीन बेल्ट व सड़कों की हालात काफी खराब है। ग्रीन बेल्ट की हालात काफी खराब है, जिससे सारा दिन बदबू आती रहती है। औद्योगिक क्षेत्र की लगभग सभी सड़कें गड्ढों में तबदील हो चुकी हैं। कई बार आलाधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक औद्योगिक क्षेत्र को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई।
-सुधीर गर्ग, प्रधान औद्योगिक इकाई
बिजली और पानी निकासी की बड़ी समस्या
औद्योगिक क्षेत्र बिजली व निकासी की बड़ी समस्या है। बरसात के समय तो यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं होता। यहीं हालत बिजली की है। औद्योगिक बिजली फीडर से गांव व कॉलोनियों को जोड़ रखा है, जिसके पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल पाती। कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया है।
-प्यारे लाल सिंगला, उद्योगपति
10 साल से उद्योगपतियों की ओर से एक करोड़ यूनिट बिल बकाया है। जब उद्योगपतियों बकाया बिल ही नहीं भरेंगे तो कैसे विकास होगा। इसको लेकर उद्योगपतियों को नोटिस तक दिया गया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। 20 से 25 यूनिट तो बंद हैं। औद्योगिक क्षेत्र में मेरे पास सात अतिरिक्त चार्ज है। समस्या को देखते हुए असिस्टेंट मैनेजर की ड्यूटी सप्ताह में दो बार लगाई जा चुकी है। जल्द ही समस्याओं को दूर किया जाएगा। यह फैसला डीसी द्वारा ली गई मीटिंग में किया गया था।
-विनोद कत्याल, सीनियर मैनेजर, औद्योगिक इकाई
वर्जन...
औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी प्रशासन के पास रहती है। इसमें समय-समय पर सुधार भी किया जाता है। बिजली पूरी नहीं मिलने का मामला निगम के अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। वहीं क्षेत्र में सडक़ व अन्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए भी उचित कार्रवाई की जाएगी।
विनय सिंह, डीसी