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मंडी में नमी पर अटकी धान की खरीद

Mon, 10 Oct 2016 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
अमर उजाला ब्यूरो, जींद Updated Mon, 10 Oct 2016 12:17 AM IST
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अनाज मंडी में धान की फसल को सुखाते मजदूर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

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  सरकार द्वारा फसल में 22 प्रतिशत तक नमी की छूट दिए जाने के बाद भी किसानों को राहत नहीं मिल पाई है। जिले की अनाज मंडियों में समय पर फसल की बिक्री नहीं होने से किसान अनाज मंडी में फसल की चौकीदारी करने के लिए मजबूर हैं। खरीद एजेंसियां नमी की आड़ लेकर फसल की खरीद में आना-कानी कर रही हैं। ऑनलाइन खरीद प्रक्रिया की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। मंडी प्रशासन द्वारा शुरू किए ऑन लाइन बिक्री केंद्र पर अब तक एक भी किसान फसल की बिक्री के लिए नहीं पहुंचा है। किसानों की बेरुखी के कारण सरकार की ऑनलाइन खरीद प्रक्रिया भी फ्लाप साबित हो गई है।

छह हजार क्विंटल में से 2675 क्विंटल की हो पाई खरीद
धान का सीजन शुरू होने के बाद से जींद की अनाज मंडी में छह हजार क्विंटल धान बिक्री के लिए पहुंची है। इसमें से अब तक सिर्फ 2675 क्विंटल ही धान की खरीद हो पाई है। इसमें से 1870 क्विंटल की खरीद एफसीआई तथा 805 क्विंटल की खरीद हैफेड द्वारा की गई है। खरीद एजेंसियों द्वारा अभी तक अनाज मंडियों में आ रही धान की फसल में नमी की मात्रा को आड़ बनाकर खरीद में आना-कानी की जा रही है। जबकि सरकार द्वारा 22 प्रतिशत तक की नमी वाली फसल को खरीदने के आदेश दिए गए हैं।
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पिछले तीन दिनों से धान की फसल अलेवा अनाज मंडी में पड़ी है, लेकिन खरीद एजेंसियां धान में नमी बताकर खरीद करने से मना कर रही हैं। धान की खरीद नहीं हो पाने से तीन दिनों से ही मंडी में बैठा हूं। इससे खेत का कामकाज प्रभावित हो रहा है। -राजराम, किसान
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आज खरीद नहीं हुई तो मंडी पर जड़ देंगे ताला
 अनाज मंडी में सरकारी एजेंसी द्वारा धान की पीआर किस्म की सरकारी खरीद नहीं होने से परेशान किसानों ने रविवार को मंडी में जिला प्रशासन व सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष जताया। किसानों ने जिला प्रशासन को चेताते हुए कहा कि अगर सरकारी एजेंसी द्वारा सोमवार को धान की पीआर किस्म की सरकारी खरीद नहीं की गई तो किसान अनाज मंडी के मुख्य गेट पर ताला जड़ने को मजबूर होंगे। अनाज मंडी में फसल बेचने आए किसान राजाराम अलेवा, गोविंद शर्मा, सुनील चहल, शिवा राम, प्रेम पेगां, पालू बागड़ी व राजबीर ने कहा कि सरकारी एजेंसी हैफेड के कर्मचारियों द्वारा बुधवार को कुछ किसानों की धान की खरीद की गई थी, जबकि दर्जनों किसानों की धान की ढेरियां पिछले लगभग 10 दिनों से बिकने की बाट जोह रही हैं। सरकारी एजेंसी द्वारा सरकारी खरीद करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाकर मात्र राइस मिलर की राह देखी जा रही है।  

सफीदों में कछुआ चाल से हो रही खरीद
सफीदों की नई अनाज मंडी में कछुआ चाल से खरीद होने से किसानों को भारी परेशानी हो रही है। समय पर खरीद नहीं होने से अनाज मंडी में करीब छह हजार क्विंटल धान खुले में पड़ी है। एफसीआई सरकारी एजेंसी द्वारा की गई खरीद की अभी तक लिफ्टिंग नहीं होने से मामला तूल पकड़ता जा रहा है। किसानों के आरोप है कि पिछले 10 दिनों से खरीद के नाम पर अधिकारियों द्वारा खानापूर्ति की जा रही है। अब तक लगभग 2,5000 क्विंटल धान की खरीद हुई है। इसमें सरकारी खरीद में एजेंसियों द्वारा पीआर किस्म धान को करीब 11,333 क्विंटल की खरीद की है।

खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं
मंडी में करीब 10 दिन से फसल डाली हुई है। दो दिन पहले ही एक व्यक्ति ने मुझसे 100 रुपये क्विंटल मांगा और कहा कि तेरी फसल जैसी भी है, उठा ली जाएगी। मैने मना कर दिया तो खरीद तो दूर ये लोग धान को देखने के लिए भी नहीं आए। समय पर खरीद नहीं होने से काफी परेशान हैं। सरकार की हिदायतों के अनुसार हम फसल बेचना चाहते हैं, लेकिन खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है। -वजीर सिंह, किसान

खरीद एजेंसियां कर रही हैं मनमानी
मंडी में हजारों क्विंटल धान पड़ी है, लेकिन खरीदार मनमानी करते हुए खरीद करता है। जो किसान 10 दिन पहले से धान को मंडी में लाया है। उसमें नमी बता कर छोड़ दी जाती है। जिससे बात करते हैं, पैसे की मांग करता है। -ईशपाल राणा, किसान

ठेकेदार नहीं, कैसे होगी लिफ्टिंग
धान की लिफ्टिंग को लेकर एफसीआई के परचेजर विशाल ने बताया कि अभी तक लिफ्टिंग व लोडिंग के लिए ठेकेदार नहीं मिला है। इसके बारे में अधिकारियों को लिखित में सूचना दे दी है। मिलरों से बात चल रही है, सोमवार या मंगलवार तक लिफ्टिंग हो सकती है।

लिखित में शिकायत दें किसान
मार्केट कमेटी सफीदों की सचिव आशा रानी ने कहा कि किसान धान को खेतों से ही सुखाकर लाएं, ताकि यहां आने के बाद उसे जल्द से जल्द खरीदा जा सके। अगर कोई खरीदार किसानों से फसल की बिक्री के बदले में रुपये मांगता है, तो किसान इसकी लिखित में शिकायत दें, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।


हो रही खरीद
धान की फसल की खरीद सुचारू रूप से करवाई जा रही है। अभी तक एफसीआई 1870 तथा हैफेड द्वारा 805 क्विंटल की खरीद की जा चुकी है। ऑनलाइन खरीद की तरफ किसानों का रुझान नहीं बना है। इसलिए इस बार ऑन लाइन की बजाए मेन्युअल ही धान की खरीद की जा रही है। -ओमप्रकाश, सचिव, मार्केट कमेटी, जींद

नहीं हो रही धान की खरीदारी
नरवाना (ब्यूरो)। नरवाना की मंडी में पिछले 10 दिनों से किसानों की धान की फसल पड़ी है लेकिन खरीद एजेंसियों द्वारा फसल की खरीद नहीं की जा रही है। लाचार किसान ढेरी पर बैठकर बोली का इंतजार कर रहे हैं और जब खरीद का समय आता है तो नमी ज्यादा बताकर खरीद नही की जाती है। रविवार को पिछले 10 दिनों से बैठे किसान अनिल, दर्शन, हरिकेश, मोदन सहित कई किसानों ने रोष जताया। उन्होंने कहा कि वह पिछले 10 दिनों से मंडी में बैठे हैं। फसल को नहीं बेच पाए। किसानों ने कहा कि कभी नमी की मात्रा ज्यादा बता दी जाती है तो कभी एजेंसियों की मनमानी का शिकार होना पड़ता है। जिसके कारण धान की खरीद नहीं हो पाती।


50 क्विंटल की जगह खरीदी पांच क्विंटल
मोहलखेड़ा गांव के किसान हरिकेश ने बताया कि वह धान की 50 क्विंटल फसल बेचने के लिए मंडी में आया था लेकिन एजेंसियों की लापरवाही के कारण उसकी पांच क्विंटल फसल ही बिक पाई। वह एक हफ्ते से मंडी में है और जब उसकी फसल बिक ने की बारी आई तो एजेंसियों की लापरवाही के कारण रजिस्टर में पांच क्विंटल लिख दी गई। जिसके कारण अब दोबारा खरीद का इंतजार करना पड़ रहा है।


 
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