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जींद की आबोहवा हुई खराब, एक्यूआई पहुंचा 1416

Sun, 03 Nov 2019 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2019 11:51 PM IST
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jind got deteriorated, aqi reached 1416
दोपहर के समय सफीदों में छाया स्मॉग। - फोटो : Jind
एक सप्ताह से आसमान में छाए स्मॉग की चादर रविवार को और अधिक गहरी हो गई। अब तक की सबसे जहरीली आबोहवा रविवार को दर्ज की गई। रविवार दोपहर साढ़े 12 बजे जींद का एक्यूआई 1184 दर्ज किया गया, जबकि साढ़े 11 बजे यह 1245 था। दोपहर दो बजकर 30 मिनट पर यह 1312 पहुंच गया। दिनभर सूर्य देवता के दर्शन नहीं हुए। स्मॉग इस तरह दिनभर छाया रहा जैसे कोहरा हो। दिन में ही लोगों को शाम का अहसास होने लगा तो वाहन चालकों को गाड़ी चलाने में खासी परेशानी हुई। वातावरण प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, इसका तुरंत असर लोगों की आंखों में जलन के रूप में देखने को मिल रहा है।
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एक सप्ताह से लोगों को स्मॉग से छुटकारा नहीं मिल रहा। दिन-प्रतिदिन स्मॉग की चादर गहरी होती जा रही है। रविवार को दिनभर छाए स्मॉग के कारण लोगों को खासी परेशानी हुई। लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर बुजुर्गों, बीमार लोगों व बच्चों पर पड़ रहा है। स्मॉग में घुली जहरीली गैस के कारण अस्थमा रोगियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि यह सब पराली जलाने से हुआ है लेकिन दिवाली से अगले दिन ही यह स्मॉग की चादर गहराने लगी थी।
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कई गैसों के मिलन से हो रही जहरीली हवा
इस समय हवा में कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, ऑक्साइड ऑफ नाइट्रोजन व सल्फर डाईआक्साइड गैस के उत्सर्जन से मौसम में गरमाहट और बेचैन कर देने वाली स्थिति बनी हुई है। 10 दिन पहले तक जींद में प्रदूषण का स्तर 110 से 135 एक्यूआई तक था।
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एक्यूआई का स्तर पहुंचा 1312 के पार
रविवार को एक्यूआई
समय एक्यूआई
6:30 650
7:30 628
8:30 718,
9:30 894,
10:30 1193,
11:30 1245,
12:30 1189,
1:30 1312
2:30 1312
इस दौरान पीएम-2.5 का स्तर औसतन 1269 रहा, जबकि पीएम-10 का स्तर 1416 दर्ज किया गया। वातावरण में प्रदूषण की इतनी भयंकर स्थिति पहली बार देखने को मिल रही है।
रसायन शास्त्री डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, कार्बन डाई ऑक्साइड का गुबार वातावरण में छा गया है। पीएम-2.5 व पीएम-10 साइज के पार्टिकल की सांद्रता वातावरण में बढ़ी है। पीएम-2.5 वाले कण सांस के जरिये फेफड़ों में प्रवेश करेंगे। कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, ऑक्साइड ऑफ नाइट्रोजन, सल्फर डाई ऑक्साइड गैस के उत्सर्जन से तापमान में अलग से बढ़ोतरी आई है। बारिश हुई तो यह कण नीचे बैठ जाएंगे अन्यथा ओस पड़ने से हानिकारक बैक्टीरिया पनपेंगे और कफ व वायरल जैसी बीमारियां बढ़ेंगी।
ऐसे बनता है स्मॉग
स्मॉग वायु प्रदूषण की एक अवस्था है। स्मॉक और फॉग के मिलने से स्मॉग बनता है। धूल, धुआं और कुहासे का यह मिश्रण धुआंसा (स्मॉग) कहलाता है। वाहनों, औद्योगिक कारखानों, पराली, और पटाखों का धुआं, धूल व अन्य हानिकारक रसायन जब धुंध के संपर्क में आते हैं तो स्मॉग का निर्माण होता है। बरसात या तेज हवा ही इस स्थिति से निजात दिलवा सकती है।
स्मॉग से बचने के लिए सावधानी जरूरी
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. नरेश वर्मा के अनुसार स्मॉग विशेषकर बुजुर्ग, सांस के रोगी व बच्चों के लिए ज्यादा परेशानी लाता है। लोगों की आंखों से पानी आता है। नाक से भी पानी बहता है। छींके ज्यादा आती हैं। इससे बचने के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। सुबह सैर पर जाने वालों को कुछ दिनों के लिए बंद कर देना चाहिए। इसी प्रकार बाइक आदि पर चलते हुए चश्मा व हेलमेट का प्रयोग करना चाहिए, ताकि हवा में मिले प्रदूषण से बचाव हो सके।
यह बरतें सावधानियां
-दोपहिया वाहन चालक चश्मा लगाकर चलें। मुंह पर मास्क लगाकर बाहर निकलें। आंखों में जलन या एलर्जी जैसी समस्या है तो स्वच्छ पानी से आंखों में छींटे मारें। बिना चिकित्सक की सलाह के किसी भी तरह की आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें।

एक्यूआई रैंक का स्वास्थ्य पर प्रभाव
0-50 अच्छा न्यूनतम प्रभाव
51-100 संतोषजनक, संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ
101-200 मध्यम, लोगों को सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा व दिल को नुकसान
201-300 खराब, ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है
301-400 बहुत खराब, लंबे समय तक रहने पर सांस की बीमारी हो सकती है
401-500 भयावह, स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता है। बीमार लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
रोक के बावजूद हांसी रोड पर चल रहा निर्माण कार्य
दिवाली के बाद से ही एक्यूआई में गिरावट नहीं आई है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ऐसे में एक्यूआई पर नियंत्रण पाने के लिए डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने निर्माण कार्य पर रोक के आदेश जारी किए थे, लेकिन इसके बाद भी हांसी रोड पर रेलवे पुल का निर्माण कार्य जारी है। आदेशों की अनदेखी के कारण हांसी रोड पर निर्माण कार्य के चलते दिनभर धूल उड़ती रहती है। इससे वहां रहने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं फाटक के पास डंपिंग साइट भी है, जहां पर कर्मचारियों द्वारा कूड़े में आग लगा दी जाती है। जिससे लगातार पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। इस मामले में डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने कहा कि स्मॉग के कारण निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई थी। अगर हांसी रोड पर निर्माण कार्य चल रहा है तो इसे बंद करवा दिया जाएगा। वहीं डंपिंग साइट पर कूड़ा जलाने के मामले में भी जांच की जाएगी।
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